भारत के हर कोने से

नालंदा से IISc तक… दुनिया की यूनिवर्सिटी रैंकिंग में भारत का सफर, 19 से बढ़कर 143 संस्थान हुए, फिर भी टॉप-250 से बाहर

THE World University Rankings 2027 में भारत के 143 उच्च शिक्षण संस्थान शामिल, लेकिन IISc 254वें स्थान पर; एक साल पहले 201–250 बैंड में था भारत का सबसे ऊपर का संस्थान

भारत को दुनिया की सबसे पुरानी ज्ञान परंपराओं में से एक के लिए जाना जाता है। नालंदा और विक्रमशिला जैसे प्राचीन शिक्षा केंद्रों की कहानियां आज भी इतिहास का हिस्सा हैं। आधुनिक भारत में भी आईआईटी, आईआईएससी, आईआईएम, बीएचयू, जेएनयू और दिल्ली विश्वविद्यालय जैसे संस्थानों ने उच्च शिक्षा का बड़ा ढांचा खड़ा किया है।

इसके बावजूद वैश्विक विश्वविद्यालय रैंकिंग में भारत की तस्वीर हमेशा उतनी मजबूत नहीं रही, जितनी उसकी विशाल उच्च शिक्षा व्यवस्था को देखकर उम्मीद की जाती है।

Times Higher Education यानी THE World University Rankings 2027 में भारत से 143 संस्थान शामिल हुए हैं। संख्या के लिहाज से भारत दुनिया में अमेरिका के बाद दूसरा सबसे अधिक प्रतिनिधित्व वाला देश है। लेकिन शीर्ष 250 की बात करें तो इस बार भारत का कोई संस्थान वहां नहीं है। भारतीय विज्ञान संस्थान यानी IISc बेंगलुरु को 254वां स्थान मिला है।

1. 2027 में 143 संस्थान, लेकिन टॉप-250 में एक भी नहीं

30 सितंबर 2026 को जारी THE World University Rankings 2027 में दुनिया भर के विश्वविद्यालयों का आकलन किया गया। इस बार रैंकिंग में 118 देश और क्षेत्र शामिल हैं।

भारत से 143 संस्थान सूची में आए। अमेरिका 168 संस्थानों के साथ सबसे आगे रहा, जबकि भारत दूसरे स्थान पर रहा। यह भारत की उच्च शिक्षा व्यवस्था के बढ़ते वैश्विक प्रतिनिधित्व को दिखाता है।

लेकिन शीर्ष 250 में भारत की मौजूदगी नहीं रही।

IISc 254वें स्थान पर भारत का सबसे ऊपर रहने वाला संस्थान है।

इससे पहले 2026 में IISc 201–250 बैंड में था। यानी इस बार भारत का सबसे ऊपर का संस्थान उस दायरे से बाहर निकल गया।

2. कहानी केवल 2027 की नहीं, 2016 से बड़ा बदलाव दिखता है

अगर पिछले एक दशक पर नजर डालें तो भारत की स्थिति का दूसरा पहलू भी सामने आता है।

THE के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार 2016 में भारत से 19 संस्थान रैंकिंग में शामिल थे। 2017 में यह संख्या 31, 2018 में 42, 2019 में 49 और 2020 में 56 हो गई।

इसके बाद 2021 में 63, 2022 में 71, 2023 में 75, 2024 में 91 और 2025 में 107 संस्थान रैंकिंग में पहुंचे।

2026 में संख्या 128 और 2027 में 143 हो गई।

यानी दस से ज्यादा वर्षों में भारत की भागीदारी कई गुना बढ़ी है।

2016 : 19 संस्थान
2025 : 107 संस्थान
2027 : 143 संस्थान

यह आंकड़ा बताता है कि वैश्विक रैंकिंग में भारत की मौजूदगी तेजी से बढ़ी है।

3. IISc बना भारत की रैंकिंग यात्रा का सबसे मजबूत चेहरा

भारतीय विज्ञान संस्थान, बेंगलुरु यानी IISc इस पूरी कहानी का सबसे महत्वपूर्ण नाम है।

2016-17 में IISc ने 201–250 बैंड में जगह बनाई थी। THE ने उस समय इसे भारत का अब तक का सर्वोच्च प्रदर्शन बताया था।

इसके बाद कई वर्षों में रैंक ऊपर-नीचे होती रही। लेकिन IISc लंबे समय तक भारत का सबसे ऊपर रहने वाला संस्थान बना रहा।

2024 में यह फिर 201–250 बैंड में पहुंचा। THE के आंकड़ों में 2024 के लिए IISc की स्थिति 201–250 और उससे पिछले साल 251–300 थी।

2025 में भी IISc 201–250 बैंड में रहा। THE की संशोधित जानकारी के अनुसार 2025 में IISc की स्थिति 201–250 की गई थी।

2026 में भी यही बैंड बना रहा।

लेकिन 2027 में IISc 254वें स्थान पर है।

4. 2016 में सिर्फ 19, आज 143 संस्थान

भारत की कहानी का सबसे बड़ा बदलाव संख्या में दिखाई देता है।

THE के आधिकारिक आंकड़े इस प्रकार हैं—

वर्षभारत के रैंक किए गए संस्थान
201619
201731
201842
201949
202056
202163
202271
202375
202491
2025107
2026128
2027143

2016 से 2025 तक के आंकड़े THE के आधिकारिक “India’s growth” डेटा में दिए गए हैं। 2026 और 2027 के आंकड़े THE की ताजा रैंकिंग सामग्री में उपलब्ध हैं।

यहां एक महत्वपूर्ण बात है। रैंकिंग में ज्यादा संस्थानों का शामिल होना और टॉप रैंक हासिल करना दो अलग-अलग बातें हैं।

भारत ने पहली दिशा में काफी विस्तार किया है। दूसरी दिशा में चुनौती अभी बनी हुई है।

5. 2016 में IISc ने पहली बार 201–250 में जगह बनाई

2016-17 का साल भारत के लिए खास था। IISc ने 201–250 बैंड में जगह बनाई।

उस समय THE की वैश्विक रैंकिंग में कुल 980 संस्थानों को शामिल किया गया था। IISc के लिए 201–250 बैंड उसका उस समय तक का सर्वोच्च प्रदर्शन था।

इससे यह उम्मीद बनी कि भारत का कोई संस्थान आने वाले वर्षों में टॉप-200 और फिर टॉप-100 में जगह बना सकता है।

लेकिन बाद की यात्रा सीधी रेखा में आगे नहीं बढ़ी।

6. रैंकिंग में सिर्फ पढ़ाई नहीं, शोध भी बहुत मायने रखता है

THE की विश्व रैंकिंग केवल यह नहीं देखती कि किसी विश्वविद्यालय में कितने विद्यार्थी पढ़ते हैं।

इसमें शिक्षण, शोध वातावरण, शोध की गुणवत्ता, उद्योग से जुड़ाव और अंतरराष्ट्रीय दृष्टिकोण जैसे क्षेत्रों को शामिल किया जाता है। THE की वर्तमान पद्धति में 18 प्रदर्शन संकेतक पांच व्यापक क्षेत्रों में आते हैं।

यानी किसी विश्वविद्यालय के पास बड़ी संख्या में विद्यार्थी होना अपने आप में ऊंची वैश्विक रैंक की गारंटी नहीं है।

शोध की गुणवत्ता, शोध का प्रभाव, अंतरराष्ट्रीय सहयोग और उद्योग से जुड़ाव भी महत्वपूर्ण हो जाते हैं।

यही कारण है कि भारत में हजारों कॉलेज और सैकड़ों विश्वविद्यालय होने के बावजूद वैश्विक शीर्ष सूची में कुछ ही संस्थान दिखाई देते हैं।

7. भारत के IIT और दूसरे संस्थान भी लगातार आगे बढ़े

IISc के अलावा भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान यानी IIT भी THE की रैंकिंग में लगातार दिखाई देते रहे हैं।

IIT बॉम्बे, IIT दिल्ली, IIT मद्रास, IIT खड़गपुर, IIT कानपुर और IIT रुड़की जैसे संस्थान लंबे समय से वैश्विक सूचियों में भारत का प्रतिनिधित्व करते रहे हैं।

लेकिन भारत की चुनौती यह है कि केवल कुछ तकनीकी संस्थानों की वैश्विक पहचान मजबूत होने से पूरी उच्च शिक्षा व्यवस्था की रैंकिंग नहीं बदलती।

इसके लिए विश्वविद्यालयों, राज्य संस्थानों और शोध संस्थानों की बड़ी संख्या को भी उच्च गुणवत्ता वाले शोध और अंतरराष्ट्रीय सहयोग की दिशा में आगे बढ़ना होगा।

8. नालंदा की कहानी से आज की रैंकिंग तक

भारत की विश्वविद्यालय कहानी आज से शुरू नहीं होती।

बिहार का नालंदा महाविहार प्राचीन भारत के सबसे प्रसिद्ध शिक्षा केंद्रों में रहा। वहां देश-विदेश से विद्यार्थी और विद्वान आते थे।

नालंदा की परंपरा को आधुनिक विश्वविद्यालय व्यवस्था से सीधे तुलना करना इतिहास की दृष्टि से सही नहीं होगा, लेकिन यह जरूर बताती है कि भारतीय उपमहाद्वीप में संगठित ज्ञान और उच्च अध्ययन की परंपरा बहुत पुरानी रही है।

आज की वैश्विक रैंकिंग की कसौटियां अलग हैं। अब शोध पत्र, उद्धरण, शोध वातावरण, उद्योग सहयोग और अंतरराष्ट्रीय भागीदारी जैसे आंकड़ों के आधार पर संस्थानों का आकलन होता है।

यानी नालंदा की प्रतिष्ठा इतिहास की ताकत है, जबकि THE रैंकिंग वर्तमान संस्थागत प्रदर्शन को मापती है।

9. एक दिलचस्प तथ्य: भारत की संख्या बढ़ी, लेकिन शीर्ष रैंक में उतार-चढ़ाव

भारत की रैंकिंग यात्रा का सबसे दिलचस्प पहलू यही है।

संस्थानों की संख्या लगातार बढ़ती गई, लेकिन शीर्ष संस्थान की रैंक हर साल उसी दिशा में नहीं गई।

IISc ने 2016-17 में 201–250 बैंड हासिल किया। बाद के वर्षों में वह 251–300 और फिर 301–350 जैसे बैंड में भी गया। 2024 से 2026 के बीच वह फिर 201–250 बैंड में पहुंचा। 2027 में अब उसका स्थान 254 है।

इससे पता चलता है कि वैश्विक रैंकिंग में प्रतिस्पर्धा कितनी कठिन है।

10. 2027 में एक और बदलाव, रैंकिंग की पद्धति भी बदली

2027 की रैंकिंग को पिछले साल से सीधे तुलना करते समय एक सावधानी जरूरी है।

THE ने इस बार 1 से 300 तक अलग-अलग रैंक देने की व्यवस्था की है। इसके बाद अलग-अलग आकार के बैंड बनाए गए हैं। 2026 में विस्तृत रैंकिंग 200 तक थी, जबकि 2027 में यह सीमा 300 तक बढ़ाई गई।

इसलिए 2026 के 201–250 बैंड और 2027 के 254 को बिल्कुल समान पैमाने पर पढ़ना तकनीकी रूप से सही नहीं होगा।

फिर भी एक बात स्पष्ट है—2027 में भारत का सबसे ऊपर रहने वाला संस्थान 250 के पार है।

11. एशिया की तस्वीर में भारत कहां खड़ा है?

THE की एशिया रैंकिंग भारत की एक अलग तस्वीर दिखाती है।

2026 की एशिया यूनिवर्सिटी रैंकिंग में भारत से 128 संस्थान शामिल हुए और IISc एशिया में 43वें स्थान पर रहा।

इसका अर्थ है कि वैश्विक रैंकिंग में भारत के शीर्ष संस्थानों की स्थिति अपेक्षाकृत पीछे हो सकती है, लेकिन एशियाई स्तर पर भारतीय संस्थान बड़ी संख्या में प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं।

आगे की चुनौती क्या है?

भारत के लिए अगली चुनौती सिर्फ रैंकिंग में और ज्यादा संस्थानों को शामिल कराना नहीं होगी।

बड़ी चुनौती होगी—

  • विश्वस्तरीय शोध को बढ़ाना
  • शोध की गुणवत्ता और प्रभाव बढ़ाना
  • अंतरराष्ट्रीय शोध सहयोग बढ़ाना
  • उद्योग और विश्वविद्यालय के बीच संबंध मजबूत करना
  • प्रतिभाशाली शिक्षकों और शोधकर्ताओं को आकर्षित करना
  • विश्वविद्यालयों में शोध के लिए पर्याप्त संसाधन उपलब्ध कराना

इनमें से कई पहलू सीधे THE के मूल्यांकन क्षेत्रों से जुड़े हैं।

भारत की रैंकिंग यात्रा का सबसे बड़ा सबक

2016 में 19 संस्थानों से शुरू होकर 2027 में 143 संस्थानों तक पहुंचना छोटी यात्रा नहीं है।

लेकिन इसी यात्रा में यह भी दिखाई देता है कि संख्या बढ़ना और विश्वस्तरीय प्रदर्शन बढ़ना अलग-अलग लक्ष्य हैं।

भारत की उच्च शिक्षा व्यवस्था बहुत बड़ी है। उसके सामने अब चुनौती यह है कि अधिक से अधिक संस्थान वैश्विक स्तर के शोध, नवाचार और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के केंद्र बनें।

नालंदा की विरासत से वैश्विक प्रतिस्पर्धा तक

भारत के लिए विश्वविद्यालयों की कहानी केवल रैंकिंग की कहानी नहीं है।

यह नालंदा और विक्रमशिला से लेकर आधुनिक IISc, IIT, BHU, JNU और देश के सैकड़ों विश्वविद्यालयों तक फैली कहानी है।

THE की 2027 रैंकिंग भारत को एक साथ दो तस्वीरें दिखाती है—143 संस्थानों की बड़ी वैश्विक मौजूदगी और टॉप-250 में शून्य प्रतिनिधित्व।

एक तरफ भागीदारी लगातार बढ़ रही है। दूसरी तरफ शीर्ष स्तर पर अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा और कठिन होती जा रही है।

इसलिए 2027 का आंकड़ा भारत के लिए केवल पीछे रहने का आंकड़ा नहीं, बल्कि यह देखने का अवसर भी है कि भारत की विशाल उच्च शिक्षा व्यवस्था को संख्या से आगे बढ़ाकर विश्वस्तरीय शोध और प्रभाव में कैसे बदला जाए।

एक नजर में भारत की यात्रा

2016 — 19 संस्थान
2017 — 31
2018 — 42
2019 — 49
2020 — 56
2021 — 63
2022 — 71
2023 — 75
2024 — 91
2025 — 107
2026 — 128
2027 — 143

Times Higher Education (THE) रैंकिंग के प्रमुख मानक

THE World University Rankings में विश्वविद्यालयों को मुख्य रूप से इन आधारों पर परखा जाता है—

  • शिक्षण व्यवस्था (Teaching): पढ़ाई का माहौल, शिक्षक-विद्यार्थी अनुपात और शैक्षणिक गुणवत्ता।
  • शोध (Research): शोध की मात्रा, गुणवत्ता और शोध का प्रभाव।
  • शोध उद्धरण (Citations): दुनिया के वैज्ञानिक उस शोध को कितना महत्व देते हैं।
  • उद्योग सहयोग: कंपनियों के साथ शोध, तकनीक और नवाचार।
  • अंतरराष्ट्रीय पहचान: विदेशी विद्यार्थी, शिक्षक और वैश्विक सहयोग।

जमुना दयाल

जमुना दयाल वाराणसी के निवासी हैं और उन्हें हिंदी समाचार मीडिया में 10 से अधिक वर्षों का गहन रिपोर्टिंग अनुभव है। उन्होंने अमर उजाला और दैनिक जागरण जैसे देश के प्रतिष्ठित समाचार पत्रों में जिला रिपोर्टर के रूप में कार्य करते हुए खेल, शिक्षा, राजनीति, कृषि तथा सामाजिक मुद्दों को प्रमुखता से कवर किया है। शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो उन्होंने महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ से जनसंचार में परास्नातक (MJMC) की डिग्री प्राप्त की है और यूजीसी नेट (UGC NET) परीक्षा उत्तीर्ण की है।

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