छह साल के अव्युक्त से लेकर ‘ह्यूमन कैलकुलेटर’ आर्यन तक, भारत के इन बच्चों ने अपनी अनोखी प्रतिभा से बनाए विश्व रिकॉर्ड
एक मिनट में 40 क्रिकेटरों की पहचान, 46 डायनासोरों के वैज्ञानिक नाम याद, 87 देशों की मुद्राएं पहचानना और पांच साल की उम्र में योग शिक्षक बनने तक की कहानी

एक मिनट में 40 क्रिकेटरों की पहचान, 46 डायनासोरों के वैज्ञानिक नाम याद, 87 देशों की मुद्राएं पहचानना और पांच साल की उम्र में योग शिक्षक बन जाना… ये किसी बड़े वैज्ञानिक या खिलाड़ी की उपलब्धियां नहीं, बल्कि भारत के उन बच्चों की कहानी है जिन्होंने बेहद कम उम्र में अपनी असाधारण प्रतिभा से दुनिया का ध्यान खींचा है।
हाल ही में नोएडा के छह वर्षीय अव्युक्त सिंह ने एक मिनट में 40 पेशेवर क्रिकेट खिलाड़ियों की पहचान कर तीसरा Guinness World Record बनाया। इससे पहले वह एक मिनट में 46 डायनासोरों को वैज्ञानिक नामों सहित पहचानने का रिकॉर्ड भी बना चुके हैं।
लेकिन अव्युक्त अकेले नहीं हैं। भारत में अलग-अलग क्षेत्रों में बच्चों और किशोरों ने स्मरण शक्ति, गणित, योग, विज्ञान, प्रकृति, लेखन और पहचान क्षमता जैसी प्रतिभाओं से विश्व रिकॉर्ड बनाए हैं।
1. अव्युक्त सिंह: एक मिनट में 40 क्रिकेटरों की पहचान

नोएडा के छह वर्षीय अव्युक्त सिंह ने 15 मार्च 2026 को एक मिनट में 40 पेशेवर क्रिकेट खिलाड़ियों की पहचान कर रिकॉर्ड बनाया। Guinness World Records ने इस उपलब्धि की पुष्टि छह अगस्त को की और उन्हें प्रमाणपत्र व पदक से सम्मानित किया।
इससे पहले आठ फरवरी 2026 को उन्होंने एक मिनट में 46 डायनासोरों को उनके वैज्ञानिक नामों सहित पहचानने का Guinness World Records रिकॉर्ड बनाया था। आधिकारिक GWR रिकॉर्ड के अनुसार यह उपलब्धि नोएडा में दर्ज हुई।
अव्युक्त की खासियत चेहरों और तस्वीरों को तेजी से याद रखना है। क्रिकेटरों की पहचान के लिए उन्होंने पोस्टरों के जरिए अभ्यास किया।
यानी छह साल की उम्र में ही उन्होंने स्मरण शक्ति को एक खास कौशल में बदल दिया।
2. आर्यन शुक्ला: दिमाग ही बन गया कैलकुलेटर

महाराष्ट्र के आर्यन शुक्ला को Guinness World Records ने ‘Human Calculator’ के रूप में पहचान दी है।
2024 में 13 साल की उम्र में उन्होंने पांच अंकों वाली 50 संख्याओं को मानसिक रूप से जोड़ने में सिर्फ 25.19 सेकंड लगाए। बाद में छह दिसंबर 2024 को दुबई में उन्होंने एक ही दिन में छह मानसिक गणित के रिकॉर्ड बनाए। इनमें 100 चार अंकों की संख्याओं को मानसिक रूप से जोड़ने में 30.9 सेकंड और दो आठ अंकों की संख्याओं को मानसिक रूप से गुणा करने में 2 मिनट 35.41 सेकंड शामिल हैं।
आर्यन के अनुसार वह रोज पांच से छह घंटे अभ्यास करते थे। उनकी मां के मुताबिक उन्होंने छह साल की उम्र से मानसिक गणना का अभ्यास शुरू किया था।
3. निथन्या ए.: चार साल की उम्र में 58 पक्षियों की पहचान
तमिलनाडु की निथन्या ए. ने महज चार साल की उम्र में पक्षियों की पहचान के क्षेत्र में विश्व रिकॉर्ड बनाया।
13 अगस्त 2025 को तिरुचिरापल्ली में उन्होंने एक मिनट में 58 पक्षी प्रजातियों की पहचान की। Guinness World Records के अनुसार वह दुनिया के अलग-अलग पक्षियों के बारे में सीखने में विशेष रुचि रखती थीं।
इतनी कम उम्र में पक्षियों की इतनी प्रजातियों को पहचानना उनकी असाधारण स्मरण और प्रकृति के प्रति रुचि को दिखाता है।
4. तानुज एसजी: वैज्ञानिक नाम से 67 जानवरों की पहचान
तमिलनाडु के अवाडी के तानुज एसजी ने भी प्रकृति से जुड़ी अपनी प्रतिभा को रिकॉर्ड में बदला।
एक मार्च 2026 को उन्होंने एक मिनट में 67 जानवरों को उनके वैज्ञानिक नाम से पहचानने का रिकॉर्ड बनाया। Guinness World Records के अनुसार उन्होंने पिछला 50 जानवरों का रिकॉर्ड पीछे छोड़ा।
यह उपलब्धि सिर्फ सामान्य ज्ञान नहीं, बल्कि जीव-जंतुओं के वैज्ञानिक नामों की गहरी जानकारी और तेज स्मरण शक्ति का उदाहरण है।
5. धस्विन के.: आवाज सुनकर 41 जानवरों की पहचान
पुडुचेरी के धस्विन के. ने जानवरों की तस्वीर देखकर नहीं, बल्कि उनकी आवाज सुनकर पहचानने की क्षमता दिखाई।
15 मार्च 2026 को उन्होंने एक मिनट में 41 जानवरों को उनकी आवाज से पहचानने का रिकॉर्ड बनाया। Guinness World Records के अनुसार धस्विन को जानवरों में खास रुचि है और इसी वजह से उन्होंने यह रिकॉर्ड चुना।
यानी जहां दूसरे बच्चे जानवरों को देखकर पहचानते हैं, वहीं धस्विन ने आवाज से पहचानने की अपनी क्षमता को विश्व रिकॉर्ड में बदल दिया।
6. समायरा पी.: पानी के जीवों की पहचान में कमाल
पुडुचेरी की समायरा पी. ने जलीय जीवों के प्रति अपनी रुचि को रिकॉर्ड में बदला।
21 मार्च 2026 को उन्होंने एक मिनट में 54 जलीय प्रजातियों की पहचान कर Guinness World Records बनाया। रिकॉर्ड के मुताबिक वह जलीय वन्यजीवों में विशेष रुचि रखती हैं।
यह उदाहरण दिखाता है कि बच्चों की रुचि अगर सही दिशा में विकसित हो तो सामान्य शौक भी असाधारण उपलब्धि में बदल सकता है।
7. नियाति चेतरंश: एक मिनट में 74 वाद्ययंत्र पहचानने वाली बच्ची
दिल्ली की 13 वर्षीय नियाति चेतरंश ने संगीत की दुनिया में अपनी पहचान बनाई।
दो नवंबर 2025 को उन्होंने एक मिनट में 74 संगीत वाद्ययंत्रों की पहचान कर Guinness World Records बनाया। Guinness के अनुसार वह 42 से अधिक वाद्ययंत्र बजाने में दक्ष हैं।
उनकी उपलब्धि सिर्फ पहचान क्षमता तक सीमित नहीं है। इतने कम उम्र में इतने अधिक वाद्ययंत्रों को सीखना भी उनकी बहुमुखी प्रतिभा को दर्शाता है।
8. अल्फी बेसिल एल्डहोस: एक मिनट में 73 नक्षत्र
केरल के कोल्लम के अल्फी बेसिल एल्डहोस ने अंतरिक्ष और खगोल विज्ञान से जुड़ा रिकॉर्ड बनाया।
23 नवंबर 2025 को उन्होंने एक मिनट में 73 नक्षत्रों की पहचान की। Guinness World Records के अनुसार उन्होंने इससे पहले मौजूद 43 नक्षत्रों के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ा।
आसमान में दिखाई देने वाले नक्षत्रों को पहचानना और उनका नाम इतनी तेजी से बताना उनकी खगोलीय रुचि और याददाश्त दोनों को दिखाता है।
9. धनंजेय चेल्वन: 87 देशों की मुद्राएं पहचानने का रिकॉर्ड
चेन्नई के धनंजेय चेल्वन ने भी अपनी स्मरण शक्ति के दम पर विश्व रिकॉर्ड बनाया।
छह मई 2023 को उन्होंने एक मिनट में 87 मुद्राओं को उनके प्रतीक से पहचानने का रिकॉर्ड बनाया। Guinness World Records के अनुसार उन्होंने दूसरे बच्चों के रिकॉर्ड बनाने के वीडियो देखकर खुद रिकॉर्ड बनाने का फैसला किया था।
यह उपलब्धि बताती है कि सामान्य ज्ञान और तेज याददाश्त को भी रिकॉर्ड की चुनौती में बदला जा सकता है।
10. रुत्वी गर्ग: 85 देशों को ग्रेट सील से पहचानना
चेन्नई की रुत्वी गर्ग ने देशों की पहचान का एक अनोखा तरीका चुना।
24 जून 2024 को उन्होंने एक मिनट में 85 देशों को उनके Great Seal यानी आधिकारिक मुहर के आधार पर पहचानने का रिकॉर्ड बनाया। Guinness World Records के अनुसार वह इस श्रेणी की पहली रिकॉर्डधारक बनीं।
यह उपलब्धि सामान्य झंडों की पहचान से अलग है और इसमें देशों के आधिकारिक प्रतीकों की जानकारी की जरूरत होती है।
11. मिशाल रुबिना एजे: किताबों के नाम पहचानने का हुनर
चेन्नई की मिशाल रुबिना एजे ने किताबों को उनके मुख्य पात्र के आधार पर पहचानने की क्षमता से रिकॉर्ड बनाया।
20 नवंबर 2021 को उन्होंने एक मिनट में 43 किताबों की पहचान उनके मुख्य पात्र के आधार पर की। Guinness World Records के अनुसार यह 2021 में इस रिकॉर्ड को तोड़ने का दूसरा सफल प्रयास था।
यह उपलब्धि बच्चों में पढ़ने की आदत और साहित्य के प्रति रुचि का भी शानदार उदाहरण है।
12. प्रत्याक्ष विजय: पांच साल की उम्र में योग शिक्षक
कोटा के प्रत्याक्ष विजय ने ऐसा रिकॉर्ड बनाया जो सिर्फ याददाश्त या पहचान क्षमता से नहीं, बल्कि प्रशिक्षण और शारीरिक अनुशासन से जुड़ा है।
24 नवंबर 2023 को वह 5 साल 337 दिन की उम्र में दुनिया के सबसे कम उम्र के पुरुष योग प्रशिक्षक के रूप में प्रमाणित हुए। इसके लिए उन्होंने 200 घंटे का Yoga Teacher Training Course पूरा किया था।
प्रत्याक्ष ने चार साल की उम्र से योग सीखना शुरू किया था। Guinness की रिपोर्ट के अनुसार उनका लक्ष्य योग को दुनिया तक पहुंचाना है।
13. अनायेशा बुधिराजा: 100 श्लोकों से किताब तक
पंजाब के लुधियाना की अनायेशा बुधिराजा ने संस्कृत श्लोकों की याददाश्त को लेखन और प्रकाशन से जोड़ा।
22 मार्च 2024 को उन्होंने सबसे कम उम्र में द्विभाषी पुस्तक श्रृंखला प्रकाशित करने वाली लड़की का Guinness World Records बनाया। उस समय उनकी उम्र 6 साल 82 दिन थी।
Guinness के अनुसार वह पांच साल की उम्र से 100 संस्कृत श्लोक सुना सकती थीं। उन्होंने अंग्रेजी और हिंदी में श्लोक सीखने पर आधारित दो किताबें लिखीं और उनके चित्र भी खुद बनाए।
14. अन्वी विशेष अग्रवाल: चार साल की उम्र में किताब लिखी
भुवनेश्वर की अन्वी विशेष अग्रवाल ने भावनाओं और रचनात्मकता को लेखन से जोड़ा।
Guinness World Records के अनुसार वह 4 साल 254 दिन की उम्र में द्विभाषी पुस्तक प्रकाशित करने वाली सबसे कम उम्र की लड़की बनीं। उनकी किताब ‘Little Girl, Big Emotions’ अंग्रेजी और स्पेनिश में प्रकाशित हुई। बाद में पांच साल 96 दिन की उम्र में उन्होंने सबसे कम उम्र की महिला TEDx स्पीकर का रिकॉर्ड भी बनाया।
उनकी कहानी यह बताती है कि रिकॉर्ड सिर्फ गणित या खेल में ही नहीं बनते। लेखन और रचनात्मकता भी बच्चों को विश्व स्तर पर पहचान दिला सकती है।
15. सम्युक्ता नारायणन: सात साल में ताइक्वांडो प्रशिक्षक
मदुरै की सम्युक्ता नारायणन ने मार्शल आर्ट में कम उम्र का रिकॉर्ड बनाया।
14 अगस्त 2024 को सात साल 270 दिन की उम्र में वह दुनिया की सबसे कम उम्र की ताइक्वांडो प्रशिक्षक बनीं। उनके माता-पिता खुद मार्शल आर्ट से जुड़े हैं और मदुरै ताइक्वांडो अकादमी चलाते हैं।
सम्युक्ता की उपलब्धि में प्रशिक्षण के साथ पारिवारिक माहौल की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही।
16. चेन्नई के हुला-हूप बच्चे: एक नहीं, कई रिकॉर्ड
चेन्नई में बच्चों के एक समूह ने हुला-हूप जैसी कला को भी विश्व रिकॉर्ड तक पहुंचाया है। Guinness World Records के अनुसार Chennai Hoopers के बच्चों ने अलग-अलग श्रेणियों में रिकॉर्ड बनाए हैं।
इनमें घुटनों के चारों ओर हुला-हूप घुमाने और कंधों के चारों ओर तेजी से रोटेशन जैसे रिकॉर्ड शामिल हैं। 2023 में आठ वर्षीय मामथी विनोथ, 13 वर्षीय बालासरनिथा बालाजी और 12 वर्षीय जननी सरवाना ने भी कई रिकॉर्ड प्रयास किए।
इससे साफ है कि बच्चों की प्रतिभा केवल पढ़ाई या स्मरण शक्ति तक सीमित नहीं है।
अव्युक्त से आर्यन तक, बदल रही है रिकॉर्ड की दुनिया
अव्युक्त सिंह की कहानी इस बदलती दुनिया का नया उदाहरण है। छह साल का बच्चा क्रिकेटरों के चेहरे पहचान रहा है, उससे पहले डायनासोर के वैज्ञानिक नाम याद कर चुका है। वहीं आर्यन शुक्ला ने गणित को दिमाग की रफ्तार का खेल बना दिया।
दूसरी ओर निथन्या पक्षियों को पहचानती हैं, अल्फी नक्षत्रों को, तानुज वैज्ञानिक नामों वाले जानवरों को और नियाति संगीत वाद्ययंत्रों को।
इन कहानियों का सबसे बड़ा संदेश यही है कि बच्चों की प्रतिभा एक जैसी नहीं होती। किसी बच्चे को नंबर पसंद हैं, किसी को प्रकृति, किसी को संगीत तो किसी को खेल। जरूरत सिर्फ इस बात की है कि उस रुचि को पहचाना जाए और उसे सही दिशा दी जाए।
रिकॉर्ड उनका नतीजा है, असली कहानी उस प्रतिभा की है जिसे बचपन में पहचान लिया गया।



