समुद्र से पहाड़ तक भारत के विशाल पुल: कहीं 21.8 किमी लंबा अटल सेतु, तो कहीं 359 मीटर ऊंचा चिनाब ब्रिज
अटल सेतु, चिनाब रेल ब्रिज और बोगीबील जैसे पुलों ने बदली देश की कनेक्टिविटी की तस्वीर, जानिए इनकी लंबाई, लागत और निर्माण की पूरी कहानी

भारत के सबसे लंबे, ऊंचे और महत्वपूर्ण पुलों की कहानी सिर्फ कंक्रीट और स्टील की नहीं, बल्कि कठिन भौगोलिक परिस्थितियों से जूझकर तैयार हुई इंजीनियरिंग की कहानी है। मुंबई के समुद्र में बना 21.8 किलोमीटर लंबा अटल सेतु हो या जम्मू-कश्मीर में चिनाब नदी से 359 मीटर ऊपर बना दुनिया का सबसे ऊंचा रेलवे पुल—इन परियोजनाओं ने भारत की निर्माण क्षमता को नई पहचान दी है। असम का बोगीबील रेल-सह-सड़क पुल और ढोला-सदिया पुल भी इसी कड़ी के महत्वपूर्ण अध्याय हैं।
21.8 किलोमीटर का अटल सेतु, समुद्र के ऊपर भारत का सबसे लंबा पुल

मुंबई में बना अटल सेतु भारत के सबसे चर्चित मेगा ब्रिजों में शामिल है। इसकी कुल लंबाई करीब 21.8 किलोमीटर है। यह छह लेन का पुल है, जिसमें लगभग 16.5 किलोमीटर हिस्सा समुद्र के ऊपर और 5.5 किलोमीटर हिस्सा जमीन पर है। इसकी आधारशिला दिसंबर 2016 में रखी गई और 12 जनवरी 2024 को इसका उद्घाटन हुआ। परियोजना पर 17,840 करोड़ रुपये से अधिक खर्च हुआ।
अटल सेतु मुंबई और नवी मुंबई के बीच दूरी तथा यात्रा समय कम करने के साथ मुंबई पोर्ट और जवाहरलाल नेहरू पोर्ट के बीच संपर्क को भी मजबूत करता है। मुंबई एयरपोर्ट और नवी मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट के बीच कनेक्टिविटी के लिहाज से भी यह महत्वपूर्ण है।
अटल सेतु की खासियत
- लंबाई : करीब 21.8 किमी
- लेन : छह
- समुद्र के ऊपर : करीब 16.5 किमी
- जमीन पर : करीब 5.5 किमी
- आधारशिला : दिसंबर 2016
- उद्घाटन : 12 जनवरी 2024
- लागत : 17,840 करोड़ रुपये से अधिक
359 मीटर की ऊंचाई पर चिनाब रेल ब्रिज
अगर बात ऊंचाई की हो तो जम्मू-कश्मीर का चिनाब रेल ब्रिज दुनिया में अपनी अलग पहचान रखता है। रियासी जिले में चिनाब नदी के ऊपर बना यह पुल नदी तल से करीब 359 मीटर ऊंचा है। इसकी कुल लंबाई करीब 1.315 किलोमीटर है और मुख्य आर्च की लंबाई 467 मीटर है।
इसकी ऊंचाई पेरिस के एफिल टावर से करीब 35 मीटर अधिक है। पुल को उधमपुर-श्रीनगर-बारामुला रेल लिंक परियोजना के हिस्से के रूप में तैयार किया गया। कठिन पहाड़ी भूगोल, तेज हवाओं और भूकंपीय परिस्थितियों को ध्यान में रखकर इसका डिजाइन तैयार किया गया। सरकारी विवरण के अनुसार पुल को 120 साल की डिजाइन लाइफ के लिए तैयार किया गया है और इसकी डिजाइन हवा की गति 266 किलोमीटर प्रति घंटे तक को ध्यान में रखती है।
इस पुल की अनुमानित लागत अकेले पुल के लिए करीब 1,486 करोड़ रुपये बताई गई है, जबकि पूरा उधमपुर-श्रीनगर-बारामुला रेल लिंक इससे कहीं बड़ी परियोजना है।
निर्माण में क्या खास था?
चिनाब पुल के निर्माण में करीब 28,660 टन स्टील, 66,000 घन मीटर कंक्रीट और बड़े पैमाने पर अर्थवर्क का इस्तेमाल हुआ। नदी के दोनों किनारों से स्टील आर्च को खड़ा करने के लिए ओवरहेड केबल क्रेन तकनीक का इस्तेमाल किया गया।
पुल के आर्च का निर्माण अपने आप में एक बड़ी चुनौती था। अप्रैल 2021 में आर्च के दोनों हिस्सों को जोड़ने का काम पूरा हुआ, जिसके बाद डेक और ट्रैक से जुड़े अन्य निर्माण कार्य आगे बढ़े।
ब्रह्मपुत्र पर बोगीबील: सड़क ऊपर, रेल नीचे
असम का बोगीबील पुल भारत के महत्वपूर्ण रेल-सह-सड़क पुलों में गिना जाता है। करीब 4.94 किलोमीटर लंबा यह डबल-डेकर पुल ब्रह्मपुत्र नदी के ऊपर डिब्रूगढ़ और धेमाजी को जोड़ता है। इसके ऊपरी हिस्से पर तीन लेन की सड़क और निचले हिस्से पर दो रेलवे लाइनें हैं।
इस परियोजना को 1997 में मंजूरी मिली थी और निर्माण कार्य अप्रैल 2002 में शुरू हुआ। लंबे समय तक भूमि अधिग्रहण, वन मंजूरी और धन की उपलब्धता जैसी समस्याओं के कारण काम की रफ्तार प्रभावित रही। बाद में परियोजना को तेज गति से पूरा किया गया और 25 दिसंबर 2018 को इसे राष्ट्र को समर्पित किया गया।
सरकारी दस्तावेजों में परियोजना की लागत अलग-अलग चरणों में संशोधित होती रही। बाद के आधिकारिक विवरणों में इसकी लागत करीब 5,900-5,920 करोड़ रुपये बताई गई है।
क्यों खास है बोगीबील?
पहले ब्रह्मपुत्र को पार करने के लिए लोगों को लंबा रास्ता तय करना पड़ता था। बोगीबील पुल ने असम और अरुणाचल प्रदेश के बीच सड़क और रेल संपर्क को काफी आसान बनाया। यह पुल आर्थिक गतिविधियों के साथ-साथ पूर्वोत्तर क्षेत्र में रणनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जाता है।
ढोला-सदिया: लोहित नदी पर 9.15 किलोमीटर का सफर
असम में बना ढोला-सदिया पुल, जिसे भूपेन हजारिका सेतु के नाम से भी जाना जाता है, लोहित नदी पर बना विशाल सड़क पुल है। पुल की लंबाई 9.15 किलोमीटर है। परियोजना में दोनों ओर के एप्रोच रोड को मिलाकर कुल लंबाई करीब 28.50 किलोमीटर है।
इस पुल का निर्माण नवंबर 2011 में शुरू हुआ और 26 मई 2017 को इसका उद्घाटन किया गया। असम सरकार के अनुसार परियोजना की लागत करीब 1,000 करोड़ रुपये रही, जबकि केंद्र सरकार के अन्य आधिकारिक दस्तावेज में पूरी परियोजना की लागत 2,056 करोड़ रुपये बताई गई है—यह अंतर परियोजना के अलग-अलग दायरे और एप्रोच रोड सहित लागत के कारण है।
पुल बनने से असम और अरुणाचल प्रदेश के बीच सड़क संपर्क में बड़ा बदलाव आया। सरकार के अनुसार इससे कुछ मार्गों पर यात्रा समय में कई घंटे की बचत हुई और सीमावर्ती क्षेत्रों तक पहुंच भी बेहतर हुई।
चार पुल, चार अलग पहचान
| पुल | स्थान | लंबाई/ऊंचाई | प्रमुख पहचान | निर्माण अवधि | प्रमुख लागत |
|---|---|---|---|---|---|
| अटल सेतु | मुंबई | 21.8 किमी | भारत का सबसे लंबा समुद्री पुल | 2016-2024 | 17,840 करोड़ रुपये + |
| चिनाब रेल ब्रिज | रियासी, जम्मू-कश्मीर | 1.315 किमी / 359 मीटर ऊंचा | दुनिया का सबसे ऊंचा रेलवे आर्च पुल | लंबी अवधि में चरणबद्ध निर्माण | पुल लागत करीब 1,486 करोड़ रुपये |
| बोगीबील पुल | असम | 4.94 किमी | रेल-सह-सड़क डबल-डेकर पुल | 2002-2018 | करीब 5,900-5,920 करोड़ रुपये |
| ढोला-सदिया पुल | असम | 9.15 किमी | लोहित नदी पर विशाल सड़क पुल | 2011-2017 | परियोजना दायरे के अनुसार अलग आंकड़े |
सिर्फ पुल नहीं, बदलती जिंदगी की राह
इन पुलों को केवल लंबाई, ऊंचाई और लागत के आंकड़ों से समझना अधूरा होगा। इनका असली महत्व उन इलाकों में दिखाई देता है जहां नदी, पहाड़ या समुद्र वर्षों तक आवागमन में बड़ी बाधा रहे।
मुंबई का अटल सेतु महानगर की यातायात व्यवस्था को नई कनेक्टिविटी देता है। चिनाब पुल कश्मीर घाटी को देश के व्यापक रेल नेटवर्क से जोड़ने वाली महत्वाकांक्षी परियोजना का हिस्सा है। बोगीबील ने ब्रह्मपुत्र के दोनों किनारों के बीच संपर्क मजबूत किया, जबकि ढोला-सदिया पुल ने असम और अरुणाचल प्रदेश के बीच सड़क संपर्क को आसान बनाया।
यानी इन पुलों की कहानी सिर्फ इंजीनियरिंग की ऊंचाई या लंबाई की नहीं है। यह उस भारत की कहानी है जो समुद्र के ऊपर सड़क बना रहा है, पहाड़ों के बीच रेलवे पहुंचा रहा है और विशाल नदियों के ऊपर सड़क-रेल के नए रास्ते तैयार कर रहा है।



