गणपति बने थलपति विजय, कहीं तीन सूंड तो कहीं द्वारका नगरी: 2026 में इन अनोखी गणेश प्रतिमाओं ने खींचा लोगों का ध्यान
नासिक में इंस्टाग्राम और AI से बदल रहा गणपति का डिजाइन

गणेशोत्सव 2026: गणेश चतुर्थी इस बार 14 सितंबर को है, लेकिन देश के कई शहरों में गणपति प्रतिमाओं और पंडालों की तैयारियां पहले ही चर्चा में आ गई हैं। कहीं भगवान गणेश को फिल्मी सितारे के अंदाज में बनाया गया है तो कहीं उनकी प्रतिमा को बिल्कुल अलग रूप दिया गया है। मुंबई में तीन सूंड वाले गणपति आकर्षण का केंद्र बने हैं, जबकि पुणे में पंडालों में सामाजिक मुद्दों को जगह मिली है। तमिलनाडु में तो गणेश प्रतिमा को अभिनेता और मुख्यमंत्री थलपति विजय के चर्चित अंदाज में बनाया गया है।
तमिलनाडु में थलपति विजय स्टाइल में गणपति
इस बार तमिलनाडु की एक गणेश प्रतिमा सोशल मीडिया पर खूब चर्चा में है। इसमें भगवान गणेश को काले कोट में दिखाया गया है। प्रतिमा की मुद्रा भी थलपति विजय के चर्चित सिग्नेचर अंदाज से प्रेरित है। गणेश की सूंड और चेहरे के साथ उनके गले पर हाथ रखने वाली मुद्रा को खास तौर पर तैयार किया गया है।
यह प्रयोग बताता है कि दक्षिण भारत में फिल्मी सितारों की लोकप्रियता किस तरह धार्मिक उत्सव की रचनात्मकता का हिस्सा बन रही है। इसी ट्रेंड में गणेश की बाहुबली और आर्मी लुक वाली प्रतिमाएं भी चर्चा में हैं।
मुंबई में तीन सूंड वाले गणपति ने चौंकाया

मुंबई के मुंबई चा लंबोदर मंडल की 2026 की प्रतिमा सामान्य गणपति से बिल्कुल अलग है। इसमें भगवान गणेश की तीन सूंड दिखाई गई हैं। इस रूप को त्रिशुंड गणपति की अवधारणा से जोड़ा गया है।
प्रतिमा को मूर्तिकार अनिकेत शेवाले ने तैयार किया है। इसके पीछे तीन सूंड को अलग-अलग प्रतीकों से जोड़ने की कल्पना बताई गई है। यही वजह है कि प्रतिमा गणेशोत्सव शुरू होने से पहले ही चर्चा में आ गई।
पुणे में गणपति के दरबार में नजर आएगा प्रेम मंदिर
पुणे का गणेशोत्सव हर साल अपनी भव्य सजावट के लिए जाना जाता है। इस बार दगडूशेठ हलवाई गणपति मंडल की सजावट में वृंदावन के प्रेम मंदिर की झलक तैयार की गई है।
विशाल पंडाल को मंदिर की स्थापत्य शैली से सजाया गया है। यहां धार्मिक माहौल के साथ कृष्ण लीला और राधा-कृष्ण से जुड़े दृश्य भी देखने को मिलेंगे। यह थीम गणेशोत्सव को केवल प्रतिमा दर्शन तक सीमित नहीं रखती, बल्कि पूरे पंडाल को धार्मिक अनुभव में बदल देती है।
मुंबई में पंडाल में फिर दिखाई जाएगी द्वारका
मुंबई के एक गणेशोत्सव पंडाल में इस बार पौराणिक द्वारका नगरी को थीम बनाया गया है। भगवान कृष्ण से जुड़ी इस नगरी की कल्पना को पंडाल के माध्यम से जीवंत करने की तैयारी है।
यह इस साल के उन पंडालों में है जहां गणपति की प्रतिमा के साथ पूरी कहानी और एक ऐतिहासिक-पौराणिक परिवेश बनाने पर जोर दिया जा रहा है।
पुणे में गणपति बताएंगे छात्रों की परेशानी
गणेशोत्सव के पंडालों में इस बार सिर्फ देवी-देवताओं और पौराणिक कथाओं की झलक नहीं दिखेगी। पुणे के कुछ मंडलों ने छात्रों की समस्याओं को अपनी थीम बनाया है।
परीक्षा का तनाव, डिजिटल लत और करियर को लेकर असमंजस जैसे विषयों को सजावट के जरिए दिखाया जा रहा है। आयोजकों का मकसद है कि गणेशोत्सव युवाओं से जुड़े मुद्दों पर भी बातचीत का माध्यम बने।
गणपति उत्सव में आया ‘भजन क्लबिंग’ का नया अंदाज
पुणे में एक और नया प्रयोग चर्चा में है। पारंपरिक भजनों को युवाओं की पसंद वाले संगीत के अंदाज के साथ प्रस्तुत करने की कोशिश की जा रही है। इसे ‘भजन क्लबिंग’ नाम दिया गया है।
आयोजकों का मानना है कि इससे युवा पीढ़ी धार्मिक कार्यक्रमों से ज्यादा जुड़ सकती है। यानी परंपरा वही है, लेकिन उसे प्रस्तुत करने का तरीका बदल रहा है।
मुंबई का गणपति उत्सव इस बार 12 दिन का
मुंबई में इस बार कुछ आयोजनों में गणेशोत्सव को 12 दिनों तक मनाने की तैयारी है। इसी दौरान द्वारका की थीम और पालतू जानवरों के लिए अनुकूल पंडाल जैसी पहल भी सामने आई है।
यह बदलाव बताता है कि सार्वजनिक गणेशोत्सव अब केवल पूजा और विसर्जन तक सीमित नहीं है। इसमें कला, सामाजिक संदेश और अलग-अलग वर्गों की भागीदारी भी शामिल होती जा रही है।
नासिक में इंस्टाग्राम और AI से बदल रहा गणपति का डिजाइन
नासिक में इस साल गणेश प्रतिमाओं के डिजाइन पर इंस्टाग्राम रील्स और AI से बने डिजाइन का असर दिखाई दे रहा है। मूर्तिकार सोशल मीडिया पर लोकप्रिय हो रहे डिजाइन और डिजिटल तस्वीरों से प्रेरणा लेकर नई प्रतिमाएं तैयार कर रहे हैं।
वहीं शाडू मिट्टी और पर्यावरण अनुकूल प्रतिमाओं की मांग भी बढ़ रही है।
नोएडा में यमुना की मिट्टी से बन रहे गणपति
उत्तर प्रदेश के नोएडा में भी इस बार गणेश प्रतिमाओं को लेकर अलग प्रयोग देखने को मिल रहा है। स्थानीय मिट्टी की गुणवत्ता को लेकर परेशानी सामने आने के बाद कुछ मूर्तिकार मथुरा की यमुना नदी के किनारे की मिट्टी का इस्तेमाल कर प्रतिमाएं बना रहे हैं।
प्राकृतिक मिट्टी से बनी प्रतिमाओं को विसर्जन के लिहाज से भी बेहतर विकल्प माना जा रहा है।
सोशल मीडिया ने बदल दिया गणपति का चेहरा
गणेशोत्सव में अब सोशल मीडिया भी प्रतिमाओं के डिजाइन को प्रभावित कर रहा है। कोई फिल्मी किरदार से प्रेरणा ले रहा है तो कोई वायरल फोटो या AI डिजाइन को देखकर मूर्ति बनवा रहा है।
इससे गणेश प्रतिमाओं में हर साल नए प्रयोग देखने को मिल रहे हैं। हालांकि धार्मिक प्रतिमा बनाते समय कलाकारों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह होती है कि नयापन और श्रद्धा दोनों का संतुलन बना रहे।
सिर्फ खूबसूरती नहीं, संदेश भी बन रहा गणपति
2026 के गणेशोत्सव की खास बात यह है कि अनोखी प्रतिमाओं के साथ पंडालों की थीम में भी बदलाव दिखाई दे रहा है। कहीं पौराणिक नगरी बनाई जा रही है तो कहीं छात्रों की समस्याओं को मुद्दा बनाया जा रहा है।
यानी गणपति अब सिर्फ दर्शन और सजावट का केंद्र नहीं हैं। कई जगह वह कला, सामाजिक संदेश, तकनीक और स्थानीय संस्कृति को जोड़ने का माध्यम भी बन रहे हैं।
क्यों खास है इस बार का गणेशोत्सव?
इस बार की तस्वीरों को देखें तो गणेशोत्सव में तीन बड़े ट्रेंड साफ दिखाई देते हैं—
पहला—फिल्मी और लोकप्रिय संस्कृति का प्रभाव।
थलपति विजय, बाहुबली और दूसरे चर्चित लुक इसका उदाहरण हैं।
दूसरा—पौराणिक और ऐतिहासिक थीम।
द्वारका और प्रेम मंदिर जैसे विषय पंडालों को अलग पहचान दे रहे हैं।
तीसरा—सामाजिक और आधुनिक संदेश।
छात्रों की परेशानी, पर्यावरण और AI जैसे विषय गणेशोत्सव की रचनात्मकता में शामिल हो रहे हैं।
इस लिहाज से 2026 का गणेशोत्सव भक्ति के साथ कला, तकनीक, सिनेमा और सामाजिक सरोकारों के मेल दिखाई देगा।



