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भारत की 20 क्षेत्रीय बिरयानियां: हर शहर में बदला स्वाद, चावल और पकाने का अंदाज

बिरयानी का सफर: भारत में कैसे बदला इसका स्वाद और अंदाज

भारत में बिरयानी सिर्फ एक डिश नहीं, बल्कि अलग-अलग शहरों और समुदायों की खानपान परंपरा का स्वाद है। हैदराबाद की मसालेदार बिरयानी से लेकर कोलकाता के आलू वाली बिरयानी और केरल की छोटे दाने वाले चावल की थलसेरी बिरयानी तक, देश के हर हिस्से ने इसे अपना अलग रंग दिया है।

बिरयानी का नाम सुनते ही ज्यादातर लोगों के मन में खुशबूदार चावल, मसाले और मांस की तस्वीर उभरती है। लेकिन भारत में बिरयानी की दुनिया इससे कहीं बड़ी है। अलग-अलग राज्यों में इसमें इस्तेमाल होने वाला चावल, मसाले, मांस, सब्जियां और पकाने का तरीका बदल जाता है।

कहीं बिरयानी की पहचान बड़ा आलू है तो कहीं छोटे दाने वाला सीरगा सांबा चावल। कहीं पुदीना और धनिया इसका रंग बदल देते हैं तो कहीं केसर और केवड़े की खुशबू इसे खास बनाती है।

1. हैदराबादी बिरयानी—निजामों के शहर का खास स्वाद

हैदराबादी बिरयानी भारत की सबसे चर्चित बिरयानी शैलियों में शामिल है। इसे दक्कन और हैदराबाद की खानपान परंपरा से जोड़ा जाता है।

इसकी खासियत दम पर पकाने की तकनीक है। कच्ची हैदराबादी बिरयानी में मैरिनेट किया हुआ मांस और चावल एक साथ पकते हैं। वहीं पक्की बिरयानी में मांस पहले पकाया जाता है और फिर चावल के साथ दम दिया जाता है।

2. लखनवी बिरयानी—नफासत और खुशबू का मेल

लखनऊ की अवधी बिरयानी का स्वाद अपेक्षाकृत संतुलित और खुशबूदार होता है। इसमें तेज मिर्च और मसालों के बजाय साबुत मसालों तथा सुगंध पर जोर दिया जाता है।

यखनी, केवड़ा, गुलाबजल और कभी-कभी केसर इसके स्वाद को अलग पहचान देते हैं। दम पकाने की परंपरा इसकी खास पहचान है।

3. कोलकाता बिरयानी—आलू ने बनाई अलग पहचान

कोलकाता बिरयानी को देखते ही सबसे पहले बड़ा आलू और कई बार उबला अंडा नजर आता है। यही इसकी सबसे अलग पहचान है।

इसकी पाक परंपरा को लखनऊ की अवधी शैली और बंगाल के स्थानीय स्वाद से जोड़ा जाता है। मसाले अपेक्षाकृत हल्के होते हैं और आलू चावल तथा मांस के मसालेदार रस को अपने अंदर सोख लेता है।

4. थलसेरी बिरयानी—बासमती की जगह खास स्थानीय चावल

केरल के मालाबार क्षेत्र की थलसेरी बिरयानी उत्तर भारत की बिरयानियों से काफी अलग है।

इसमें लंबे दाने वाले बासमती की जगह आमतौर पर कैमा या जीरकशाला चावल इस्तेमाल किया जाता है। घी, तली प्याज, काजू, किशमिश और स्थानीय मसालों से इसका स्वाद तैयार होता है।

5. मालाबार बिरयानी—समुद्री तट का स्वाद

केरल के मालाबार क्षेत्र में बिरयानी की कई स्थानीय शैलियां देखने को मिलती हैं। चिकन और मटन के अलावा कुछ जगहों पर मछली और अन्य समुद्री खाद्य पदार्थों से भी बिरयानी बनाई जाती है।

नारियल, स्थानीय मसालों और छोटे दाने वाले चावल का इस्तेमाल इसे दक्षिण भारतीय तटीय स्वाद देता है।

6. अंबूर बिरयानी—तमिलनाडु की मशहूर शैली

तमिलनाडु के अंबूर और आसपास के क्षेत्रों की बिरयानी की खास पहचान सीरगा सांबा चावल है।

इस चावल के छोटे दाने मसालों और मांस के स्वाद को अच्छी तरह सोख लेते हैं। अंबूर बिरयानी का स्वाद मसालेदार होने के साथ अपेक्षाकृत सरल और संतुलित भी माना जाता है।

7. डिंडीगुल बिरयानी—खट्टे स्वाद का अलग अंदाज

डिंडीगुल बिरयानी भी तमिलनाडु की प्रसिद्ध क्षेत्रीय बिरयानी है। इसमें सीरगा सांबा चावल का इस्तेमाल किया जाता है।

इसका स्वाद दूसरी बिरयानियों की तुलना में थोड़ा खट्टा और मसालेदार होता है। दही, नींबू, काली मिर्च और अन्य स्थानीय मसालों का असर इसके स्वाद में दिखाई देता है।

8. भटकल बिरयानी—कर्नाटक के तटीय क्षेत्र की पहचान

कर्नाटक के भटकल क्षेत्र की बिरयानी पर स्थानीय मुस्लिम खानपान परंपरा की छाप दिखाई देती है।

इसमें प्याज और मसालों का इस्तेमाल प्रमुखता से होता है। तटीय कर्नाटक के कारण इसके स्वाद में स्थानीय और समुद्री खानपान परंपराओं का प्रभाव भी देखा जा सकता है।

9. डोन्ने बिरयानी—हरे मसालों से बदल गया रंग

बेंगलुरु और कर्नाटक के कुछ हिस्सों में लोकप्रिय डोन्ने बिरयानी अपने हरे रंग और खास परोसने के तरीके के कारण अलग नजर आती है।

पुदीना, धनिया और हरी मिर्च से तैयार मसाले का इस्तेमाल इसमें किया जाता है। पारंपरिक रूप से इसे पत्ते से बने कटोरे यानी डोन्ने में परोसने की परंपरा है।

10. कल्याणी बिरयानी—दक्कन की आम लोगों वाली शैली

कल्याणी बिरयानी का संबंध दक्कन और बीदर की पाक परंपरा से जोड़ा जाता है। यह हैदराबादी बिरयानी की तुलना में सरल और आम लोगों के बीच लोकप्रिय शैली के रूप में जानी जाती है।

टमाटर, धनिया, पुदीना और मसालों से तैयार इसका मसाला चावल और मांस को खास स्वाद देता है।

11. सिंधी बिरयानी—खट्टे और तीखे स्वाद का मेल

सिंधी बिरयानी की जड़ें सिंध की खानपान परंपरा में हैं। भारत में सिंधी समुदाय के साथ इसकी लोकप्रियता भी बढ़ी।

टमाटर, दही, आलू, हरी मिर्च और मसालों के साथ तैयार होने वाली इस बिरयानी में खट्टापन और तीखापन प्रमुख रहता है। कई संस्करणों में सूखे बेर या आलूबुखारे का इस्तेमाल भी मिलता है।

12. मेमनी बिरयानी—तेज मसालों का स्वाद

मेमनी बिरयानी मेमन समुदाय की पाक परंपरा से जुड़ी मानी जाती है। गुजरात और सिंध से जुड़े समुदायों में इसकी विशेष पहचान है।

इसमें मांस, आलू, प्याज और तेज मसालों का इस्तेमाल होता है। इसका स्वाद आमतौर पर दूसरी हल्की बिरयानियों की तुलना में अधिक तीखा और गहरा होता है।

13. बॉम्बे बिरयानी—मुंबई की मिली-जुली खानपान संस्कृति

मुंबई की बॉम्बे बिरयानी में शहर की बहुसांस्कृतिक खानपान परंपरा की झलक मिलती है।

इसमें मसालेदार चावल के साथ कुछ संस्करणों में आलू और सूखे फल भी मिलाए जाते हैं। इसके स्वाद में तीखेपन के साथ हल्का मीठा-खट्टापन भी देखने को मिलता है।

14. दिल्ली की मुगलई बिरयानी—पुरानी दिल्ली की खुशबू

दिल्ली की बिरयानी पर मुगलई खानपान का प्रभाव दिखाई देता है। बासमती चावल, मांस और साबुत मसालों का इस्तेमाल इसकी प्रमुख विशेषताओं में है।

पुरानी दिल्ली के खानपान में बिरयानी की कई स्थानीय शैलियां विकसित हुई हैं, जिनमें मसालों की खुशबू और मांस का स्वाद प्रमुख रहता है।

15. गोअन फिश बिरयानी—समुद्र की खुशबू वाला स्वाद

गोवा में बिरयानी का एक अलग रूप मछली और समुद्री खाद्य पदार्थों के साथ देखने को मिलता है।

स्थानीय मसालों और तटीय खानपान के प्रभाव के कारण इसका स्वाद उत्तर भारतीय मांस वाली बिरयानी से काफी अलग हो जाता है।

16. कश्मीरी शैली की बिरयानी—मेवे और खुशबू का असर

कश्मीर की खानपान परंपरा में सूखे मेवे, केसर और सुगंधित मसालों का विशेष महत्व है। इसी कारण कश्मीरी शैली के चावल वाले व्यंजनों में भी इनका प्रभाव दिखाई देता है।

इसमें मेवे और सूखे फल स्वाद के साथ-साथ व्यंजन को खास खुशबू भी देते हैं।

17. तेहरी—बिरयानी की शाकाहारी दुनिया

उत्तर भारत में लोकप्रिय तेहरी को कई लोग बिरयानी की शाकाहारी शैली के रूप में देखते हैं, हालांकि तकनीकी रूप से दोनों व्यंजन अलग हैं।

आलू, मटर, फूलगोभी, गाजर और दूसरी सब्जियों के साथ इसे मसालेदार चावल के रूप में बनाया जाता है। उत्तर प्रदेश के घरों में इसकी खास जगह है।

18. वेजिटेबल बिरयानी—सब्जियों से बना नया रूप

भारत के अलग-अलग हिस्सों में शाकाहारी बिरयानी ने स्थानीय रूप ले लिया है। कहीं पनीर का इस्तेमाल होता है तो कहीं मौसमी सब्जियों का।

गाजर, मटर, बीन्स, फूलगोभी, आलू और मसालों के साथ इसे दम पर पकाया जाता है। यही वजह है कि वेज बिरयानी के भी कई क्षेत्रीय स्वाद मिलते हैं।

19. अंडा बिरयानी—कम सामग्री में खास स्वाद

अंडा बिरयानी किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं है। देश के कई हिस्सों में यह लोकप्रिय स्थानीय रूप ले चुकी है।

उबले अंडे को मसालेदार चावल के साथ पकाया या परोसा जाता है। कुछ जगह इसे चिकन या मटन के साथ भी तैयार किया जाता है।

20. कच्ची और पक्की बिरयानी—पकाने के दो अलग तरीके

बिरयानी को सिर्फ शहर या राज्य के आधार पर ही नहीं, बल्कि पकाने की तकनीक से भी समझा जा सकता है।

कच्ची बिरयानी में मैरिनेट किया हुआ कच्चा मांस और चावल एक साथ पकते हैं। वहीं पक्की बिरयानी में मांस पहले पकाया जाता है और बाद में चावल के साथ दम दिया जाता है।

जमुना दयाल

जमुना दयाल वाराणसी के निवासी हैं और उन्हें हिंदी समाचार मीडिया में 10 से अधिक वर्षों का गहन रिपोर्टिंग अनुभव है। उन्होंने अमर उजाला और दैनिक जागरण जैसे देश के प्रतिष्ठित समाचार पत्रों में जिला रिपोर्टर के रूप में कार्य करते हुए खेल, शिक्षा, राजनीति, कृषि तथा सामाजिक मुद्दों को प्रमुखता से कवर किया है। शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो उन्होंने महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ से जनसंचार में परास्नातक (MJMC) की डिग्री प्राप्त की है और यूजीसी नेट (UGC NET) परीक्षा उत्तीर्ण की है।

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