भारत की रंग बदलने वाली झीलें: कहीं नीला पानी हो जाता है गुलाबी, तो कहीं हरे रंग में दिखता है रहस्यमयी नजारा
कही दिन के उजाले में तो कही खनिज कारणों से बदल जाता है पानी का रंग, कही सूक्ष्म जीव दिखाते है अपना कमाल

भारत में झीलों की खूबसूरती केवल उनके शांत पानी और पहाड़ों के प्रतिबिंब तक सीमित नहीं है। देश में कुछ ऐसी झीलें और जलाशय भी हैं, जिनका पानी या उसका दृश्य मौसम, सूर्य की रोशनी, खनिज, लवणता, शैवाल और सूक्ष्मजीवों के कारण अलग-अलग रंगों में दिखाई दे सकता है। महाराष्ट्र की लोनार झील इसका सबसे चर्चित उदाहरण है, जहां पानी का रंग हरे से गुलाबी-लाल दिखाई देने की घटनाएं वैज्ञानिक संस्थानों ने दर्ज की हैं।
लद्दाख की पांगोंग त्सो में नीले रंग के कई शेड्स दिखाई देते हैं, जबकि राजस्थान की सांभर झील में लवणीय वातावरण और सूक्ष्मजीवों की मौजूदगी इसे अलग पहचान देते हैं। आइए जानते हैं भारत की ऐसी झीलों के बारे में, जिनके रंग और रूप में प्रकृति का अनोखा खेल देखने को मिलता है।
1. लोनार झील: हरे पानी से गुलाबी होने का रहस्य

महाराष्ट्र के बुलढाणा जिले में स्थित लोनार झील भारत की सबसे चर्चित रंग बदलने वाली झीलों में शामिल है। यह झील करीब 50 हजार वर्ष पहले उल्कापिंड के प्रभाव से बने क्रेटर में बनी मानी जाती है। यह बेसाल्ट चट्टान में बना प्राकृतिक इम्पैक्ट क्रेटर है और इसका पानी क्षारीय व लवणीय है।
2020 में झील का सामान्य हरा पानी अचानक गुलाबी रंग में दिखाई देने लगा था। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन के भारतीय सुदूर संवेदन संस्थान (IIRS) ने इसके अध्ययन में लवणता बढ़ने और रंग पैदा करने वाले सूक्ष्मजीवों की भूमिका बताई।
रहस्यमयी तथ्य
लोनार में रंग परिवर्तन को केवल एक नजर का भ्रम नहीं माना गया। उपग्रह चित्रों के अध्ययन में भी पानी के रंग में बदलाव दर्ज किया गया। IIRS के अनुसार शैवाल के प्रमुख पिगमेंट में बदलाव भी इस घटना से जुड़ा पाया गया।
2. पांगोंग त्सो: नीले रंग के बदलते शेड्स

लद्दाख की पांगोंग त्सो समुद्र तल से करीब 14,270 फीट की ऊंचाई पर स्थित है। इसका पानी अलग-अलग परिस्थितियों में नीले रंग के कई शेड्स में दिखाई देता है। भारत सरकार के पर्यटन पोर्टल के अनुसार झील के पानी में बदलते नीले और हरे रंगों का आकर्षक दृश्य देखा जा सकता है।
सूरज की स्थिति, बादल, पानी की गहराई और आसपास के पहाड़ों का प्रतिबिंब झील के दृश्य को काफी बदल देता है।
खासियत
पांगोंग त्सो का एक हिस्सा भारत में और दूसरा चीन में है। इसकी लंबाई करीब 134 किलोमीटर बताई जाती है।
3. त्सो मोरीरी: गहरे नीले पानी की हिमालयी झील
लद्दाख की त्सो मोरीरी ऊंचे हिमालयी क्षेत्र में स्थित खूबसूरत झील है। भारत सरकार के पर्यटन पोर्टल के अनुसार यह करीब 4,600 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है और इसका पानी गहरे नीले रंग में दिखाई देता है।
सुबह और शाम की रोशनी में झील का रंग और आसपास के पहाड़ों का प्रतिबिंब इसे अलग रूप देता है।
4. त्सो कार: सफेद नमक और नीले पानी का अनोखा मेल
लद्दाख की त्सो कार झील अपने आसपास मौजूद सफेद नमक और शुष्क पहाड़ी भू-दृश्य के कारण अलग दिखाई देती है। यहां पानी का रंग और आसपास की नमक की परतें मिलकर ऐसा दृश्य बनाती हैं, जिसमें झील कभी नीली तो कभी धूसर-सफेद पृष्ठभूमि में दिखाई देती है।
यहां का रंग परिवर्तन लोनार की तरह किसी एक अचानक जैविक घटना से जोड़ना सही नहीं होगा। प्रकाश, तलछट, खनिज और पानी की स्थिति दृश्य को प्रभावित करते हैं।
5. सांभर झील: नमक के बीच गुलाबी फ्लेमिंगो का संसार
राजस्थान की सांभर झील भारत की सबसे बड़ी अंतर्देशीय खारे पानी की झील है। यह एक महत्वपूर्ण रामसर आर्द्रभूमि भी है। सरकारी दस्तावेजों के अनुसार यहां लवणीय वातावरण में Dunaliella salina जैसी हरी शैवाल पाई जाती है। सर्दियों में बड़ी संख्या में प्रवासी पक्षी और फ्लेमिंगो भी यहां पहुंचते हैं।
सांभर को “रंग बदलने वाली झील” कहते समय सावधानी जरूरी है। यहां दिखाई देने वाला रंग पानी की लवणता, सूक्ष्मजीवों, तलछट और प्रकाश जैसी परिस्थितियों के अनुसार बदल सकता है, लेकिन इसे हमेशा गुलाबी झील कहना वैज्ञानिक रूप से सही नहीं होगा।
6. उदयपुर के पास अचानक लाल हुआ जलाशय
राजस्थान के उदयपुर में 2026 की शुरुआत में नागदा के पास एक जलाशय का पानी असामान्य रूप से क्रिमसन-पिंक दिखाई दिया। भारतीय सुदूर संवेदन संस्थान के विज्ञान पोर्टल ने इसकी जांच में पाया कि इस जलाशय में तैरता हुआ लाल Azolla (मच्छर फर्न) रंग परिवर्तन का प्रमुख कारण प्रतीत हुआ।
वैज्ञानिकों के अनुसार इस पौधे का हरा रंग कुछ परिस्थितियों में लाल हो सकता है। सूर्य की रोशनी, तापमान, लवणता और पोषक तत्वों में बदलाव इसके रंग को प्रभावित कर सकते हैं।
रहस्य से ज्यादा विज्ञान
यह घटना बताती है कि हर लाल या गुलाबी पानी वाली झील के पीछे एक ही कारण नहीं होता। कहीं सूक्ष्मजीव जिम्मेदार हो सकते हैं तो कहीं पानी पर तैरने वाले पौधे।
7. डल झील: मौसम के साथ बदलता कश्मीर का आईना
श्रीनगर की डल झील का पानी कभी गहरा नीला, कभी हरा और कभी धूसर दिखाई देता है। इसका बड़ा कारण मौसम, सूर्य की रोशनी, पानी में मौजूद वनस्पति और आसपास के पहाड़ों का प्रतिबिंब है।
यह लोनार जैसी रासायनिक रंग-परिवर्तन वाली झील का उदाहरण नहीं है। यहां रंग का बदलाव मुख्य रूप से दृश्य परिस्थितियों से जुड़ा है।
8. नैनी झील: रोशनी बदलते ही बदल जाता है रंग

उत्तराखंड की नैनी झील पहाड़ों से घिरी हुई है। साफ मौसम में इसका पानी नीला या हरा दिखाई दे सकता है, जबकि बादल और आसपास की हरियाली इसके रंग को बदल देते हैं।
झील के पानी में पड़ने वाला आसमान और पहाड़ों का प्रतिबिंब भी इसके रंग को प्रभावित करता है।
9. भीमताल: पहाड़ों के बीच बदलता जलरंग
उत्तराखंड की भीमताल झील का रंग भी मौसम और प्रकाश के अनुसार अलग दिखाई दे सकता है। सुबह की धूप, बादलों की छाया और आसपास की हरियाली पानी को अलग-अलग शेड्स देती है।
इसलिए इसे “रंग बदलने वाली” झील कहने का अर्थ यहां मुख्यतः दृश्य परिवर्तन है, न कि पानी में अचानक रासायनिक रंग परिवर्तन।
10. चिलिका झील: समुद्र और मीठे पानी के बीच बदलता संसार
ओडिशा की चिलिका भारत की प्रमुख खारे-मीठे पानी की लैगून है। यहां समुद्री पानी, मीठे पानी, ज्वार-भाटा और जैविक गतिविधियों का प्रभाव दिखाई देता है।
मौसम और जल परिस्थितियों के साथ पानी का दृश्य बदल सकता है। झील का विशाल विस्तार और बदलती रोशनी भी इसके रंग को अलग रूप देती है।
11. आखिर झीलों का रंग क्यों बदलता है?
झील का रंग केवल पानी का अपना रंग नहीं होता। इसमें कई प्राकृतिक कारक शामिल होते हैं—
- सूर्य की रोशनी और उसका कोण
- पानी की गहराई
- पानी में मौजूद खनिज
- लवणता
- शैवाल और सूक्ष्मजीव
- पानी में तैरती वनस्पति
- तलछट
- बादल और आसपास के पहाड़ों का प्रतिबिंब
IIRS के अनुसार पानी का रंग इस बात पर निर्भर करता है कि प्रकाश की अलग-अलग तरंगदैर्ध्य पानी द्वारा कितनी अवशोषित, बिखेरी या परावर्तित होती हैं।
12. क्या रंग बदलना किसी चमत्कार का संकेत है?
दूर से देखने पर रंग बदलती झील किसी रहस्य से कम नहीं लगती, लेकिन इसके पीछे अक्सर प्राकृतिक और वैज्ञानिक कारण होते हैं।
लोनार में लवणता और सूक्ष्मजीवों से जुड़े पिगमेंट का प्रभाव वैज्ञानिक अध्ययन में सामने आया है। वहीं उदयपुर के पास लाल जलाशय में Azolla की भूमिका बताई गई।
इसलिए इन झीलों को “चमत्कारी” कहने के बजाय प्रकृति की अद्भुत वैज्ञानिक प्रक्रिया के रूप में देखना ज्यादा उचित है।
रहस्यमयी तथ्य
क्या आप जानते हैं?
महाराष्ट्र की लोनार झील में हरे से गुलाबी-लाल रंग का बदलाव उपग्रह चित्रों में भी दर्ज किया गया है। IIRS के अध्ययन के अनुसार लवणता बढ़ने पर कुछ सूक्ष्मजीव लाल या गुलाबी पिगमेंट पैदा कर सकते हैं।
भारत की झीलों में रंग बदलने का रहस्य एक जैसा नहीं है। कहीं सूक्ष्मजीव और शैवाल पानी का रंग बदलते हैं, कहीं लवणता और खनिज भूमिका निभाते हैं और कहीं केवल सूरज, बादल और पहाड़ों का प्रतिबिंब झील को नया रंग दे देता है।
यही विविधता भारत की झीलों को केवल पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि प्रकृति की खुली प्रयोगशाला भी बनाती है।
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