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एक रसगुल्ला, 20 स्वाद: बंगाल में चॉकलेट से लेकर हरी मिर्च तक

कभी नोलन गुड़ की मिठास, कभी स्ट्रॉबेरी की खुशबू तो कभी हरी मिर्च का तीखापन; बंगाल के रसगुल्ले ने पारंपरिक स्वाद से निकलकर बनाया फ्लेवर का नया संसार

कोलकाता। रसगुल्ला नाम सुनते ही आंखों के सामने चाशनी में डूबा सफेद, मुलायम और रस से भरा गोल आकार उभरता है। बंगाल का यह लोकप्रिय मिष्ठान अपनी पारंपरिक पहचान के लिए दुनिया भर में जाना जाता है। लेकिन कोलकाता की मिठाई की दुनिया में रसगुल्ला सिर्फ चीनी की चाशनी तक सीमित नहीं है। यहां इसके साथ आम, स्ट्रॉबेरी, ब्लूबेरी, चॉकलेट, कॉफी, नारियल, दालचीनी और यहां तक कि हरी मिर्च जैसे स्वाद भी हैं।

कुछ प्रयोगों में रसगुल्ले के 200 से अधिक फ्लेवर तक तैयार किए जाने की रिपोर्ट सामने आ चुकी है। इनमें फल, मसाले, जड़ी-बूटियां और बच्चों को पसंद आने वाले फ्यूजन स्वाद शामिल हैं।

सफेद रसगुल्ले से शुरू हुआ सफर

पारंपरिक बंगाली रसगुल्ला छेना से तैयार होता है। मुलायम छेना के गोलों को हल्की चाशनी में पकाया जाता है, जिससे वे चाशनी सोखकर फूल जाते हैं और खाने पर मुंह में रस छोड़ते हैं। बंगाल की पुरानी मिठाई परंपरा में इसका विशेष स्थान है।

रसगुल्ले के इतिहास को लेकर बंगाल और ओडिशा के बीच लंबे समय तक विवाद भी रहा है। 2017 में ‘Banglar Rosogolla’ को पश्चिम बंगाल के लिए जीआई पहचान मिली। बाद में ओडिशा के रसगुल्ले को भी अलग जीआई पहचान मिली। इसलिए दोनों राज्यों के रसगुल्ले को एक ही उत्पाद मानने के बजाय उनकी अलग क्षेत्रीय पहचान को समझना जरूरी है।

लेकिन स्वाद के मामले में बंगाल के मिठाई कारीगरों ने परंपरा के साथ प्रयोग करने में कोई कसर नहीं छोड़ी।


1. नोलन गुर रसगुल्ला

बंगाल की सर्दियों की पहचान नोलन गुर यानी खजूर के पेड़ से मिलने वाले ताजे गुड़ से भी रसगुल्ले का स्वाद बदला गया। चीनी की सामान्य चाशनी के बजाय गुड़ का इस्तेमाल इसे गहरा रंग और अलग सुगंध देता है। यह बंगाली मिठाई की परंपरा से जुड़ा फ्लेवर है और आज भी कई प्रतिष्ठित मिठाई विक्रेताओं के यहां मिलता है।

2. कमला भोग

कमला भोग रसगुल्ले का रंग और स्वाद दोनों सामान्य रसगुल्ले से अलग होते हैं। इसमें संतरे जैसी खट्टी-मीठी खुशबू का प्रयोग किया जाता है। बंगाल की मिठाई दुकानों में यह लंबे समय से पहचाना जाने वाला अलग रूप है।

3. केसर भोग

केसर की खुशबू और सुनहरा रंग रसगुल्ले को शाही अंदाज देता है। इसे खास तौर पर उन लोगों के लिए पसंद किया जाता है जिन्हें सामान्य चाशनी के बजाय सुगंधित और समृद्ध स्वाद पसंद है। केसर भोग भी बंगाल की मिठाई दुकानों में उपलब्ध प्रमुख वैरिएंट में शामिल है।

4. आम रसगुल्ला

गर्मी के मौसम में आम और रसगुल्ले का मेल भी देखने को मिलता है। पके आम के स्वाद वाला रसगुल्ला मीठे और फलों की खुशबू का मिश्रण देता है। कुछ दुकानों में इसे Ripe Mango Rosogolla के नाम से बेचा जा रहा है।

5. कच्चे आम का रसगुल्ला

पके आम के उलट कच्चे आम का फ्लेवर रसगुल्ले में हल्की खटास लाता है। इसे Green Mango Rosogolla के रूप में भी बेचा जा रहा है। यानी रसगुल्ले की चाशनी में अब सिर्फ मिठास ही नहीं, खट्टापन भी जगह बना चुका है।

6. स्ट्रॉबेरी रसगुल्ला

लाल रंग और स्ट्रॉबेरी की खुशबू वाला यह आधुनिक प्रयोग युवाओं को ध्यान में रखकर तैयार किए गए फ्लेवरों में शामिल है। बंगाल की कुछ मिठाई दुकानों में स्ट्रॉबेरी रसगुल्ला नियमित रूप से सूची में दिखाई देता है।

7. ब्लूबेरी रसगुल्ला

ब्लूबेरी जैसा विदेशी फल जब बंगाली छेना की मिठाई के साथ मिलता है तो स्वाद बिल्कुल अलग हो जाता है। यह उन फ्लेवरों में शामिल है जिन्हें प्रयोगात्मक रसगुल्लों की सूची में प्रमुखता से जगह मिली है।

8. रास्पबेरी रसगुल्ला

रास्पबेरी का हल्का खट्टा-मीठा स्वाद रसगुल्ले के पारंपरिक मीठेपन में नया रंग जोड़ता है। इसे भी फ्लेवर वाले रसगुल्लों की लोकप्रिय श्रेणी में गिना गया है।

9. बटरस्कॉच रसगुल्ला

बटरस्कॉच के कैरामेल जैसे स्वाद को रसगुल्ले के साथ जोड़ना पूरी तरह आधुनिक प्रयोग है। चाशनी में डूबे छेना के साथ यह स्वाद मिठाई को कैंडी और डेजर्ट जैसा अंदाज देता है।

10. नारियल-गुलाब रसगुल्ला

नारियल और गुलाब की खुशबू का मेल रसगुल्ले को पारंपरिक बंगाली मिठाई से अलग अनुभव देता है। इसमें फूलों की सुगंध के साथ नारियल का स्वाद मिलता है।

11. चॉकलेट रसगुल्ला

बच्चों और चॉकलेट पसंद करने वालों के लिए चॉकलेट फ्लेवर वाला रसगुल्ला तैयार किया गया। यह उन फ्यूजन प्रयोगों में शामिल है, जिनमें पारंपरिक मिठाई को आधुनिक डेजर्ट के स्वाद से जोड़ा गया। कुछ विक्रेताओं ने इसे बच्चों के बीच लोकप्रिय बताया है।

12. कैपुचीनो-कॉफी रसगुल्ला

कॉफी का कड़वापन और रसगुल्ले की मिठास—दोनों का मेल सुनने में अजीब लग सकता है, लेकिन कोलकाता के प्रयोगात्मक रसगुल्लों में कैपुचीनो भी शामिल रहा है। इसे बनाने वाले विक्रेताओं के अनुसार यह उनके पसंदीदा फ्लेवरों में रहा है।

13. कीवी रसगुल्ला

कीवी की हल्की खटास और अलग सुगंध को छेना के साथ जोड़कर तैयार किया गया यह रसगुल्ला भी फ्लेवर वाली सूची में शामिल है।

14. काला खट्टा रसगुल्ला

काला खट्टा आमतौर पर ठंडे पेय और बर्फ के गोले के स्वाद से जुड़ा है। लेकिन इसे रसगुल्ले के साथ मिलाकर खट्टा-मीठा प्रयोग किया गया। यह पारंपरिक मिठाई से बिल्कुल अलग स्वाद देने वाले फ्लेवरों में है।

15. नींबू रसगुल्ला

नींबू की खटास रसगुल्ले की चाशनी वाली मिठास को संतुलित करने का काम करती है। इसी वजह से खट्टे स्वाद पसंद करने वालों के लिए नींबू वाला फ्लेवर एक अलग विकल्प बन गया।

16. दालचीनी रसगुल्ला

दालचीनी जैसी मसालेदार खुशबू को भी रसगुल्ले में जगह मिली। यह प्रयोग इस बात का उदाहरण है कि फ्लेवर वाले रसगुल्लों में केवल फलों या मिठास का ही इस्तेमाल नहीं हुआ, बल्कि मसालों को भी शामिल किया गया।

17. पुदीना रसगुल्ला

पुदीने की ठंडी और ताजा खुशबू को रसगुल्ले के साथ जोड़ना खासा अनोखा प्रयोग है। यह उन फ्लेवरों में शामिल है जिन्हें मसालेदार और ताजगी वाले स्वाद पसंद करने वालों के लिए तैयार किया गया।

18. फुचका रसगुल्ला

बंगाल में फुचका बेहद लोकप्रिय है। इसी लोकप्रिय स्वाद को रसगुल्ले में उतारने का प्रयोग भी किया गया। यानी एक ही मिठाई में चाट जैसा खट्टा-चटपटा अनुभव देने की कोशिश। रिपोर्टों के अनुसार यह फ्लेवर बंगाली ग्राहकों के बीच खासा लोकप्रिय रहा।

19. हरी मिर्च रसगुल्ला

अब बारी उस स्वाद की, जिसे सुनकर सबसे ज्यादा हैरानी हो सकती है—हरी मिर्च रसगुल्ला। शुरुआत में मीठा स्वाद और बाद में मिर्च का हल्का तीखापन इसका खास आकर्षण बताया गया है। इसे बनाने वाली स्वाति सराफ ने इसे अपने पसंदीदा फ्लेवरों में शामिल किया था।

20. मैगी और करेले वाला रसगुल्ला

प्रयोग यहीं नहीं रुके। बच्चों को ध्यान में रखकर मैगी और बबलगम जैसे फ्लेवर भी तैयार किए गए। वहीं करेले का फ्लेवर उन प्रयोगों में शामिल है जो रसगुल्ले की पारंपरिक मिठास की सीमा को ही चुनौती देते हैं।


200 से 250 फ्लेवर तक पहुंचा प्रयोग

कोलकाता की उद्यमी स्वाति सराफ के फ्लेवर वाले रसगुल्लों की चर्चा देशभर में हुई। अलग-अलग रिपोर्टों में उनके यहां 200 से लेकर करीब 250 तरह के रसगुल्ले तैयार किए जाने का उल्लेख मिलता है। इनमें फल, मसाले, जड़ी-बूटियां, चॉकलेट और यहां तक कि चटपटे स्वाद भी शामिल थे।

उनके प्रयोगों में लिची, तरबूज, अनानास, ग्रीन एप्पल, अनार, अदरक, जीरा, करी पत्ता, धनिया, कैप्सिकम और टमाटर जैसे स्वादों का भी उल्लेख मिलता है। यानी रसगुल्ले की दुनिया में प्रयोग की कोई छोटी सूची नहीं, बल्कि पूरा स्वाद संसार तैयार हो चुका है।

कोलकाता में कहां मिलते हैं फ्लेवर वाले रसगुल्ले

● गोकुल श्री रसगुल्ला शॉप
कोलकाता के लैंसडाउन मार्केट के पास स्थित इस दुकान में 20 से अधिक तरह के फ्लेवर वाले रसगुल्ले मिलते हैं। इनमें पुदीना, अनार, अदरक, केसर-इलायची और हरी मिर्च जैसे अनोखे स्वाद शामिल हैं।

● बालाराम मल्लिक एंड राधारमण मल्लिक
Balaram Mullick & Radharaman Mullick की कोलकाता में कई शाखाएं हैं। दुकान अपने बेक्ड रसगुल्ले और नोलन गुर से जुड़े प्रयोगों के लिए जानी जाती है।

● केसी दास
K.C. Das रसगुल्ले के लिए कोलकाता की चर्चित पुरानी दुकानों में है। यहां पारंपरिक रसगुल्ले के साथ शुगर-फ्री रसगुल्ला भी मिलते है।

● चित्तरंजन मिष्ठान्न भंडार
श्यामबाजार की इस पुरानी दुकान का नोलन गुड़ रसगुल्ला खास तौर पर चर्चित है। सर्दियों में मिलने वाला यह संस्करण खजूर के गुड़ की अलग खुशबू और स्वाद देता है।

● पुटीराम
कॉलेज स्क्वायर इलाके में स्थित पुटीराम का नोलन गुर रसगुल्ला भी कोलकाता के चर्चित विकल्पों में गिना जाता है।

● नलिन चंद्र दास एंड संस
Nalin Chandra Das and Sons की कालिघाट स्थित दुकान पुरानी बंगाली मिठाई परंपरा से जुड़ी है। यहां नोलन गुर आधारित मिठाइयां और पारंपरिक रसगुल्ला मिलते हैं।

● गंगूराम स्वीट्स
Ganguram Sweets की कोलकाता में कई शाखाएं हैं। ब्रांड की मिठाई सूची में रसगुल्ले के साथ कई आधुनिक और मौसमी स्वाद वाले विकल्प भी शामिल हैं।

मिठाई से आगे, प्रयोग की कहानी

रसगुल्ले के इन फ्लेवरों की कहानी सिर्फ नई मिठाई बनाने की कहानी नहीं है। यह उस बदलाव को भी दिखाती है जिसमें पारंपरिक भारतीय मिठाइयां नई पीढ़ी की पसंद के मुताबिक खुद को बदल रही हैं। किसी को आम चाहिए, किसी को स्ट्रॉबेरी; कोई चॉकलेट चाहता है तो कोई हरी मिर्च का स्वाद चखना चाहता है।

और यही वजह है कि बंगाल का रसगुल्ला आज एक सवाल भी पूछता है—क्या रसगुल्ला सिर्फ मिठाई है या एक ऐसा स्वाद है, जिसे हर नई पीढ़ी अपने तरीके से फिर से गढ़ सकती है?

शायद इसका जवाब चाशनी में नहीं, बल्कि उन सैकड़ों प्रयोगों में छिपा है, जिन्होंने एक साधारण सफेद रसगुल्ले को चॉकलेट से लेकर हरी मिर्च तक पहुंचा दिया।

जमुना दयाल

जमुना दयाल वाराणसी के निवासी हैं और उन्हें हिंदी समाचार मीडिया में 10 से अधिक वर्षों का गहन रिपोर्टिंग अनुभव है। उन्होंने अमर उजाला और दैनिक जागरण जैसे देश के प्रतिष्ठित समाचार पत्रों में जिला रिपोर्टर के रूप में कार्य करते हुए खेल, शिक्षा, राजनीति, कृषि तथा सामाजिक मुद्दों को प्रमुखता से कवर किया है। शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो उन्होंने महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ से जनसंचार में परास्नातक (MJMC) की डिग्री प्राप्त की है और यूजीसी नेट (UGC NET) परीक्षा उत्तीर्ण की है।

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