जर्मनी में गूंजेगी रामनगर की रामलीला, चंदौली के डॉ. धर्मेंद्र बताएंगे मंचन की कहानी
चंदौली के डॉ. धर्मेंद्र यादव वुर्जबर्ग विश्वविद्यालय में रामायण-महाभारत की मंचन परंपरा पर रखेंगे अपना शोध

10 सवाल-10 जवाब में जानिए कैसे गांव के स्कूल से जर्मनी के विश्वविद्यालय तक पहुंचा रामलीला पर शोध का सफर
उत्तर प्रदेश। चंदौली जिले के बरडीहा डिग्घी निवासी और जमानियां स्टेशन बाजार स्थित हिंदू स्नातकोत्तर महाविद्यालय के अंग्रेजी विभाग के सहायक आचार्य डॉ. धर्मेंद्र यादव अब जर्मनी में रामनगर की विश्व प्रसिद्ध रामलीला और भारतीय महाकाव्यों की मंचन परंपरा पर व्याख्यान देंगे। उन्हें अक्टूबर-नवंबर 2026 में दक्षिण-पूर्व एशियाई संस्थान, वुर्जबर्ग विश्वविद्यालय, जर्मनी से आमंत्रण मिला है। इससे पहले जून 2024 में वह जर्मनी के हैडलबर्ग विश्वविद्यालय में विजिटिंग प्रोफेसर के रूप में रामलीला पर व्याख्यान दे चुके हैं।
सवाल 1: जर्मनी से आपको किस विषय पर व्याख्यान का निमंत्रण मिला है?
जवाब: मुझे “रामायण एवं महाभारत की मंचन परंपरा” विषय पर व्याख्यान देने के लिए आमंत्रित किया गया है। इसमें भारतीय महाकाव्यों और उनसे जुड़ी मंचन परंपराओं के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा होगी।
सवाल 2: रामनगर की रामलीला आपके लिए शोध का विषय क्यों बनी?
जवाब: रामनगर की रामलीला भारतीय लोकनाट्य और सांस्कृतिक परंपरा का महत्वपूर्ण उदाहरण है। इसमें कथा, अभिनय, स्थान, समुदाय और परंपरा एक साथ दिखाई देते हैं। इसी वजह से मैंने इसके पाठ, संदर्भ और मंचन को अपने शोध का विषय बनाया।
सवाल 3: आपने रामनगर की रामलीला पर किस विषय में पीएचडी की है?
जवाब: मैंने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के अंग्रेजी विभाग से “द रामलीला ऑफ रामनगर : ए स्टडी इन टेक्स्ट, कॉन्टेक्स्ट एंड परफॉर्मेन्स” विषय पर पीएचडी की है। शोध में रामलीला के पाठ, सामाजिक-सांस्कृतिक संदर्भ और प्रदर्शन परंपरा का अध्ययन किया गया।
सवाल 4: रामनगर की रामलीला की सबसे खास बात क्या है?
जवाब: इसकी सबसे महत्वपूर्ण विशेषताओं में इसकी परंपरा और सामुदायिक भागीदारी शामिल है। यहां रामकथा का मंचन केवल एक मंच तक सीमित नहीं रहता, बल्कि अलग-अलग स्थानों और वातावरण के माध्यम से कथा आगे बढ़ती है। यही इसकी प्रदर्शन शैली को विशेष बनाता है।
सवाल 5: क्या रामलीला केवल धार्मिक आयोजन है?
जवाब: रामलीला का धार्मिक महत्व अपनी जगह है, लेकिन इसका सांस्कृतिक और नाट्य पक्ष भी महत्वपूर्ण है। इसमें अभिनय, संवाद, कथा, संगीत, स्थान और लोक भागीदारी जैसे कई तत्व जुड़े होते हैं। इसलिए इसे भारतीय प्रदर्शन परंपरा के संदर्भ में भी समझा जा सकता है।
सवाल 6: जर्मनी में भारतीय रामलीला को लेकर किस तरह की रुचि है?
जवाब: विदेशी विश्वविद्यालयों में भारतीय महाकाव्यों और उनकी प्रदर्शन परंपराओं पर अकादमिक अध्ययन होता रहा है। रामलीला इस दृष्टि से महत्वपूर्ण विषय है, क्योंकि इसमें साहित्य और प्रदर्शन के साथ सामाजिक-सांस्कृतिक पहलू भी जुड़े हैं।
सवाल 7: इससे पहले आपको विदेश में व्याख्यान देने का अवसर कब मिला?
जवाब: जून 2024 में जर्मनी के हैडलबर्ग विश्वविद्यालय में विजिटिंग प्रोफेसर के रूप में रामलीला के बारे में पढ़ाने का अवसर मिला। इसके अलावा शोध के दौरान अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ नॉर्थ कैरोलिना में “भारत में राम कथा” विषय पर ऑनलाइन व्याख्यान भी दिया।
सवाल 8: आपके शैक्षणिक सफर की शुरुआत कहां से हुई?
जवाब: मेरी प्राथमिक शिक्षा गांव के ही विद्यालय से हुई। हाईस्कूल अमड़ा से और इंटरमीडिएट किसान इंटर कॉलेज बरहनी, चंदौली से किया। इसके बाद बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से उच्च शिक्षा प्राप्त की और वहीं से रामनगर की रामलीला पर शोध किया।
सवाल 9: शोध के दौरान आपने किन कामों पर ध्यान दिया?
जवाब: शोध के दौरान रामलीला से जुड़े विभिन्न अकादमिक पहलुओं का अध्ययन किया। शोध विषय से संबंधित कई रिसर्च पेपर भी प्रकाशित किए। प्रयास रहा कि रामनगर की रामलीला को उसके साहित्यिक, सामाजिक और प्रदर्शन संबंधी संदर्भों के साथ समझा जाए।
सवाल 10: जर्मनी में व्याख्यान को लेकर आपकी क्या तैयारी है?
जवाब: मेरा प्रयास रहेगा कि रामायण और महाभारत की मंचन परंपरा को अकादमिक दृष्टि से सरल और स्पष्ट तरीके से प्रस्तुत किया जाए। रामनगर की रामलीला मेरे शोध का प्रमुख हिस्सा रही है, इसलिए उसके अनुभव और अध्ययन को भी इस चर्चा में सामने रखने का अवसर मिलेगा।
गांव से जर्मनी तक पहुंचा रामलीला पर शोध
डॉ. धर्मेंद्र यादव की शिक्षा की शुरुआत चंदौली के गांव से हुई। बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में अध्ययन के दौरान उन्होंने रामनगर की रामलीला को शोध का विषय बनाया। इसी शोध ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय अकादमिक मंचों तक पहुंचाया। अब अक्टूबर-नवंबर 2026 में वुर्जबर्ग विश्वविद्यालय में होने वाला व्याख्यान उनके इसी शोध सफर की अगली कड़ी है।
महाविद्यालय ने दी बधाई
डॉ. धर्मेंद्र यादव को जर्मनी से निमंत्रण मिलने की जानकारी पर हिंदू स्नातकोत्तर महाविद्यालय के प्रबंधक लच्छीराम यादव, उपप्रबंधक रविंद्र यादव और प्राचार्य प्रो. श्रीनिवास सिंह ने उन्हें बधाई दी। उनके भाई और सिविल बार एसोसिएशन के पूर्व महामंत्री एवं वरिष्ठ उपाध्यक्ष वीरेंद्र प्रताप सिंह यादव दाढ़ी ने भी इस उपलब्धि की जानकारी साझा की।


