भारत की सबसे लंबी रेल, सड़क और समुद्री सुरंगें: कहीं पहाड़ों के नीचे दौड़ती है ट्रेन, तो कहीं समुद्र के भीतर बन रहा है रास्ता
जम्मू-कश्मीर की पहाड़ियों से लेकर कोलकाता में हुगली नदी के नीचे तक, भारत में बनीं सुरंगें इंजीनियरिंग की मिसाल हैं। जानिए देश की सबसे लंबी रेल और सड़क सुरंगों की खासियत, समुद्र के किनारे बनी मुंबई कोस्टल रोड और पानी के नीचे दौड़ती मेट्रो की पूरी कहानी।

भारत में यातायात को आसान बनाने के लिए इंजीनियर पहाड़ों, नदियों और समुद्र के नीचे तक रास्ते बना रहे हैं। कहीं कई किलोमीटर लंबी सुरंग से होकर ट्रेन गुजरती है, तो कहीं ऊंचे पहाड़ को काटकर सड़क बनाई गई है। मुंबई जैसे महानगर में समुद्र के नीचे से गुजरने वाली सुरंग ने भी लोगों का ध्यान खींचा है।
इन परियोजनाओं का मकसद केवल दूरी कम करना नहीं, बल्कि यात्रा का समय बचाना, दुर्गम इलाकों को जोड़ना और यातायात को अधिक सुविधाजनक बनाना भी है। भारत की सबसे लंबी रेल और सड़क सुरंगों के साथ समुद्र के नीचे बनी या बनाई जा रही सुरंगों की कहानी इंजीनियरिंग के विकास की दिलचस्प तस्वीर पेश करती है।
खास बात: समुद्र के नीचे बनी सुरंगों की तुलना पहाड़ों के नीचे बनी सुरंगों से करते समय उनके उद्देश्य और स्थिति को समझना जरूरी है। भारत में मुंबई की समुद्री सुरंग सड़क यातायात के लिए है, जबकि रेल सुरंगें और अन्य समुद्री परियोजनाएं अलग-अलग तकनीक और जरूरतों के आधार पर बनाई जाती हैं।
1. टनल टी-50: पहाड़ के भीतर 12.77 किलोमीटर लंबा रेल मार्ग
जम्मू-कश्मीर में बनी टनल टी-50 भारत की सबसे लंबी रेल सुरंगों में प्रमुख है। इसकी लंबाई 12.77 किलोमीटर है। यह खारी और सुंबर के बीच स्थित है और उधमपुर-श्रीनगर-बारामूला रेल लिंक परियोजना का हिस्सा है।
इस सुरंग का निर्माण कठिन पहाड़ी भूभाग में किया गया। रास्ते में कठोर चट्टानों, पानी के रिसाव और कमजोर जमीन जैसी चुनौतियां थीं। इंजीनियरों ने आधुनिक तकनीक से पहाड़ के भीतर रेल मार्ग तैयार किया। मुख्य सुरंग के साथ एक अलग निकासी सुरंग भी बनाई गई है, ताकि आपात स्थिति में यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाला जा सके।
इस परियोजना का उद्देश्य कश्मीर घाटी को देश के दूसरे हिस्सों से रेल मार्ग के जरिए बेहतर तरीके से जोड़ना है। यह सुरंग दिखाती है कि किस तरह आधुनिक तकनीक से पहाड़ों के भीतर भी लंबी रेल लाइन बनाई जा सकती है।
2. पीर पंजाल रेल सुरंग: पहाड़ के आर-पार ट्रेन का सफर
जम्मू-कश्मीर की पीर पंजाल रेल सुरंग लगभग 11.2 किलोमीटर लंबी है। इसे बनिहाल-काजीगुंड रेल सुरंग भी कहा जाता है। वर्ष 2013 में शुरू हुई इस सुरंग ने जम्मू क्षेत्र और कश्मीर घाटी के बीच रेल संपर्क को बेहतर बनाने में अहम भूमिका निभाई।
पहले इस इलाके में सर्दियों के दौरान भारी बर्फबारी और खराब मौसम के कारण यात्रा प्रभावित होती थी। सुरंग से होकर ट्रेन गुजरने के कारण पहाड़ी रास्तों पर निर्भरता कम हुई और यात्रियों को अपेक्षाकृत सुविधाजनक विकल्प मिला।
यहां की खासियत केवल इसकी लंबाई नहीं, बल्कि पहाड़ के भीतर रेल यातायात के लिए तैयार की गई सुरक्षा और वेंटिलेशन व्यवस्था भी है।
3. डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी सुरंग: सड़क यात्रा में बचते हैं दो घंटे
जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी सुरंग को पहले चेनानी-नाशरी सुरंग कहा जाता था। इसकी लंबाई लगभग 9 किलोमीटर है और इसे वर्ष 2017 में यातायात के लिए खोला गया था।
इस सुरंग ने पुराने पहाड़ी रास्ते के लगभग 30 से 40 किलोमीटर के हिस्से को बाईपास करने में मदद की और यात्रा का समय करीब दो घंटे तक कम करने की संभावना पैदा की। इसमें आधुनिक वेंटिलेशन, निगरानी कैमरे, आग से बचाव और आपातकालीन संचार की व्यवस्था है।
इसका महत्व खासतौर पर सर्दियों में बढ़ जाता है, जब बर्फबारी और भूस्खलन के कारण पहाड़ी रास्तों पर यातायात प्रभावित हो सकता है।
4. अटल सुरंग: 9.02 किलोमीटर लंबा रास्ता, जो बर्फीले पहाड़ों के नीचे से गुजरता है
हिमाचल प्रदेश में बनी अटल सुरंग मनाली को लाहौल घाटी से जोड़ती है। इसकी लंबाई 9.02 किलोमीटर है और यह समुद्र तल से लगभग 3,000 मीटर से अधिक ऊंचाई पर स्थित है। वर्ष 2020 में इसका उद्घाटन किया गया था।
इस सुरंग के बनने से रोहतांग दर्रे के ऊपर से गुजरने की मजबूरी काफी हद तक कम हुई। पहले भारी बर्फबारी के कारण लाहौल घाटी का संपर्क कई बार लंबे समय तक प्रभावित हो जाता था। अब सड़क मार्ग से आवाजाही पहले के मुकाबले अधिक सुविधाजनक हुई है।
अटल सुरंग में सुरक्षा के लिए आपातकालीन निकासी मार्ग, निगरानी और वेंटिलेशन जैसी व्यवस्थाएं की गई हैं। यह हिमालय में सड़क निर्माण की महत्वपूर्ण उपलब्धियों में गिनी जाती है।
5. कोलकाता की पानी के नीचे बनी मेट्रो सुरंग: हुगली नदी के नीचे से गुजरती है ट्रेन
भारत में पानी के नीचे से गुजरने वाली रेल सुरंग की बात हो, तो कोलकाता की हुगली नदी के नीचे बनी मेट्रो सुरंग का जिक्र सबसे पहले आता है। यह भारत की पहली नदी के नीचे बनी परिवहन सुरंग है। इसके जरिए मेट्रो ट्रेन हुगली नदी के नीचे से होकर हावड़ा और कोलकाता के बीच सफर करती है।
इस सुरंग का नदी के नीचे वाला हिस्सा लगभग 520 मीटर लंबा है और नदी तल से करीब 13 मीटर नीचे बनाया गया है। इसे बनाने के लिए विशेष टनल बोरिंग मशीनों का इस्तेमाल किया गया। 15 मार्च 2024 को इस मार्ग पर यात्रियों के साथ मेट्रो का परिचालन शुरू हुआ।
इस परियोजना की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यात्रियों को नदी पार करने के लिए पुल या सड़क पर निर्भर नहीं रहना पड़ता। मेट्रो सीधे नदी के नीचे से गुजरती है। इससे हावड़ा और कोलकाता के बीच यातायात को बेहतर बनाने में मदद मिली है।
हावड़ा मेट्रो स्टेशन भी अपनी गहराई के कारण खास है। यह जमीन से लगभग 30 मीटर नीचे बनाया गया है। इस तरह कोलकाता की यह परियोजना भारतीय शहरी परिवहन के इतिहास में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बन गई है।
6. मुंबई कोस्टल रोड की सुरंग: समुद्र के किनारे जमीन के भीतर बना रास्ता
मुंबई में समुद्र के किनारे यातायात को आसान बनाने के लिए मुंबई कोस्टल रोड परियोजना बनाई गई है। इस परियोजना में दो समानांतर सुरंगें भी शामिल हैं, जिनकी संयुक्त लंबाई नहीं, बल्कि प्रत्येक मार्ग की बनावट के हिसाब से कुल ट्विन टनल लंबाई लगभग 3.45 किलोमीटर बताई गई है। बृहन्मुंबई महानगरपालिका के परियोजना विवरण में इन सुरंगों का उल्लेख है।
इस परियोजना का उद्देश्य दक्षिण मुंबई में यातायात का दबाव कम करना और लोगों को अपेक्षाकृत तेज रास्ता उपलब्ध कराना है। समुद्र के पास बने इस मार्ग में सड़क, सुरंग, तटीय सुरक्षा दीवार और अन्य सुविधाएं शामिल हैं।
हालांकि, यहां एक जरूरी अंतर समझना चाहिए। मुंबई कोस्टल रोड की सुरंग को पूरी तरह समुद्र के नीचे बनी सुरंग कहना सही नहीं होगा। यह तटीय सड़क परियोजना का हिस्सा है, जिसमें सुरंग का मार्ग जमीन के भीतर से गुजरता है। इसके विपरीत, कोलकाता की मेट्रो सुरंग वास्तव में हुगली नदी के नीचे से गुजरती है।
7. क्या भारत में समुद्र के नीचे भी लंबी सुरंगें बनाई जा रही हैं?
दुनिया के कई देशों में समुद्र के नीचे से गुजरने वाली रेल और सड़क सुरंगें बनाई गई हैं। भारत में भी तटीय इलाकों में नई परियोजनाओं पर काम हो रहा है, लेकिन समुद्र के नीचे बनी सुरंग, नदी के नीचे बनी सुरंग और समुद्र के किनारे बनी सुरंग तीन अलग-अलग प्रकार की संरचनाएं हैं।
भारत में कोलकाता की हुगली नदी के नीचे बनी मेट्रो सुरंग पानी के नीचे परिवहन का सबसे उल्लेखनीय उदाहरण है। वहीं मुंबई की कोस्टल रोड परियोजना समुद्र के किनारे यातायात सुधारने का उदाहरण है।
समुद्र के नीचे सुरंग बनाने में पानी का भारी दबाव, मिट्टी और चट्टानों की बनावट, रिसाव रोकने की तकनीक तथा आपातकालीन निकासी जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। इसलिए ऐसी परियोजनाओं के लिए विस्तृत भूवैज्ञानिक जांच और विशेष निर्माण तकनीक जरूरी होती है।
भारत की प्रमुख लंबी सुरंगें एक नजर में
| सुरंग का नाम | लंबाई | किसलिए उपयोग होती है? |
|---|---|---|
| टनल टी-50, जम्मू-कश्मीर | 12.77 किमी | रेल |
| पीर पंजाल रेल सुरंग | लगभग 11.2 किमी | रेल |
| डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी सुरंग | लगभग 9 किमी | सड़क |
| अटल सुरंग, हिमाचल प्रदेश | 9.02 किमी | सड़क |
| बनिहाल-काजीगुंड सड़क सुरंग | 8.45 किमी | सड़क |
| कोलकाता हुगली नदी सुरंग | नदी के नीचे 520 मीटर | मेट्रो रेल |
| मुंबई कोस्टल रोड ट्विन टनल | लगभग 3.45 किमी | सड़क |
लंबाइयां उपलब्ध सरकारी परियोजना विवरणों पर आधारित हैं। टी-49 और टी-50 जैसी रेल सुरंगों की चालू स्थिति तथा रैंकिंग को प्रकाशित करने से पहले नवीनतम रेलवे जानकारी से सत्यापित करना उचित होगा।
पहाड़ से नदी तक, भारत में बदल रही है यातायात की तस्वीर
भारत की लंबी रेल, सड़क और पानी के नीचे बनी सुरंगें दिखाती हैं कि आधुनिक इंजीनियरिंग ने यात्रा के पुराने तरीकों को कितना बदल दिया है। जम्मू-कश्मीर में पहाड़ों के भीतर से गुजरती ट्रेनें, हिमाचल में बर्फीले पहाड़ के नीचे बनी अटल सुरंग और कोलकाता में हुगली नदी के नीचे दौड़ती मेट्रो—ये सभी अलग-अलग जरूरतों के लिए बनाई गई महत्वपूर्ण परियोजनाएं हैं।
इनसे यात्रा का समय बचाने, दुर्गम क्षेत्रों को जोड़ने और शहरों में यातायात का दबाव कम करने में मदद मिलती है। आने वाले वर्षों में नई सुरंग परियोजनाओं से भारत के परिवहन नेटवर्क में और बदलाव आने की उम्मीद है।



