भारत के हर कोने सेभारत दर्शन - Local यात्रा

भारत के प्रमुख रेड-लाइट इलाके: इतिहास, कारोबार और बदलती तस्वीर

मुंबई के कमाठीपुरा से कोलकाता के सोनागाछी तक, इन इलाकों की कहानी सिर्फ देह व्यापार की नहीं बल्कि प्रवासन, गरीबी, तस्करी, सामाजिक बदलाव और पुनर्वास से भी जुड़ी है।

भारत के कई प्रमुख शहरों में ऐसे इलाके मौजूद हैं जिनकी पहचान दशकों से ‘रेड-लाइट एरिया’ मतलब देह व्यापार के अड्डे के के रूप में की जाती रही है। हालांकि, इन क्षेत्रों की हकीकत केवल देह व्यापार तक सीमित नहीं है। यह कहानी है औपनिवेशिक काल के प्रवासन, भीषण गरीबी, मानव तस्करी, सामाजिक बहिष्कार और अब धीरे-धीरे आ रहे पुनर्वास व कानूनी बदलावों की। आइए जानते हैं भारत के ऐसे ही प्रमुख इलाकों का इतिहास और उनकी बदलती सामाजिक तस्वीर।

1. सोनागाछी, कोलकाता—देश के सबसे चर्चित इलाकों में से एक

कोलकाता का सोनागाछी भारत के सबसे प्रसिद्ध और बड़े रेड-लाइट इलाकों में गिना जाता है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इसकी काफी चर्चा हुई है। हालांकि, इसे “एशिया का सबसे बड़ा रेड-लाइट इलाका” कहना एक आम प्रचलित दावा है, जिसका कोई एक समान आधिकारिक वर्तमान आंकड़ा उपलब्ध नहीं है।

सोनागाछी की चर्चा केवल सेक्स वर्क के कारण नहीं होती। यहां सेक्स वर्करों के अधिकार, स्वास्थ्य सुरक्षा, एचआईवी जागरूकता, श्रमिक संगठन (जैसे ‘दरबार महिला समन्वय समिति’) और मानव तस्करी रोकने के प्रयासों ने इसे सामाजिक शोध का महत्वपूर्ण केंद्र बनाया है। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) के रिकॉर्ड में भी सोनागाछी से जुड़े मानवाधिकार और तस्करी के मुद्दों का उल्लेख प्रमुखता से मिलता है।

2. कमाठीपुरा, मुंबई—200 साल से ज्यादा पुरानी कहानी

मुंबई का कमाठीपुरा देश के सबसे ऐतिहासिक और चर्चित क्षेत्रों में से एक है। बॉम्बे हाईकोर्ट में प्रस्तुत एक मामले के अनुसार, कमाठीपुरा का नाम 18वीं सदी के अंतिम वर्षों में आंध्र क्षेत्र से आए ‘कमाठी’ श्रमिकों से जुड़ा है। समय के साथ यह क्षेत्र रेड-लाइट जिले के रूप में विकसित हुआ।

हालांकि, आज पूरे कमाठीपुरा को केवल रेड-लाइट एरिया कहना गलत होगा। वर्ष 2022 में बॉम्बे हाईकोर्ट ने भी ध्यान दिलाया था कि किसी क्षेत्र की दशकों पुरानी पहचान को वर्तमान में पूरे इलाके पर लागू नहीं किया जा सकता।

गंगूबाई की कहानी से क्यों जुड़ा?

कमाठीपुरा का नाम हाल के वर्षों में फिल्म ‘गंगूबाई काठियावाड़ी’ के कारण फिर चर्चा में आया। लेकिन फिल्म और वास्तविक इतिहास में काफी अंतर है। अदालत में प्रस्तुत सामग्रियों में भी सिनेमाई रूपांतरण और वास्तविक घटनाओं के बीच के अंतर को स्पष्ट किया गया था।

3. जीबी रोड, दिल्ली—राजधानी का चर्चित क्षेत्र

दिल्ली का जीबी रोड (G.B. Road), जिसे अब आधिकारिक तौर पर स्वामी श्रद्धानंद मार्ग कहा जाता है, लंबे समय से वेश्यावृत्ति के लिए चर्चित रहा है।

लेकिन इस इलाके की पहचान केवल इस कारोबार तक सीमित नहीं है। यहां बड़े पैमाने पर ऑटोमोबाइल, हार्डवेयर के व्यावसायिक प्रतिष्ठान, थोक बाजार और सामान्य आवासीय आबादी मौजूद है। इसलिए इस पूरे क्षेत्र को केवल “रेड-लाइट एरिया” कहना वहां रहने वाले सामान्य परिवारों और दुकानदारों की वास्तविकता को नजरअंदाज करना होगा।

4. बुधवार पेठ, पुणे

पुणे का बुधवार पेठ भी भारत के पुराने और चर्चित सेक्स-वर्क इलाकों में शामिल रहा है। दिलचस्प बात यह है कि यह क्षेत्र केवल सेक्स वर्क के लिए ही नहीं जाना जाता, बल्कि यह पुणे के सबसे पुराने और घनी आबादी वाले व्यापारिक केंद्रों में से एक है। यहां प्रसिद्ध मंदिर, ऐतिहासिक बाजार, पुराने मकान और व्यावसायिक गतिविधियां एक साथ मौजूद हैं।

5. फॉकलैंड रोड, मुंबई

मुंबई का फॉकलैंड रोड भी ऐतिहासिक रूप से देह व्यापार से जुड़े क्षेत्रों में गिना जाता रहा है। इसका संबंध कमाठीपुरा के आसपास के पुराने शहरी विस्तार से है। समय के साथ मुंबई में शहरी पुनर्विकास, पुलिस कार्रवाइयों और सामाजिक संस्थाओं के हस्तक्षेप के कारण इस इलाके का स्वरूप भी काफी बदला है।

6. चतुर्भुज स्थान, मुजफ्फरपुर

बिहार के मुजफ्फरपुर का चतुर्भुज स्थान भी लंबे समय से सेक्स वर्क और मानव तस्करी से संबंधित चर्चाओं में रहा है। इस इलाके की कहानी भारत के कई अन्य ग्रामीण व कस्बाई क्षेत्रों से अलग नहीं है, जहां गरीबी, रोजगार के सीमित अवसर, पलायन और मानव तस्करी जैसी समस्याएं आपस में जुड़ जाती हैं।

7. शिवदासपुर, वाराणसी

धर्म और संस्कृति की नगरी वाराणसी के बाहरी हिस्से में स्थित शिवदासपुर का नाम भी लंबे समय से सेक्स वर्क से जुड़े इलाके के रूप में लिया जाता रहा है। यहां की स्थिति को समझने के लिए केवल देह व्यापार को देखना पर्याप्त नहीं है। कई गैर-सरकारी व सामाजिक संस्थाओं ने यहां बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य और महिलाओं के लिए वैकल्पिक रोजगार के क्षेत्र में महत्वपूर्ण काम किया है।

8. बदलती पहचान और लुप्त होते पुराने क्षेत्र

भारत में ऐसे कई मोहल्ले और कड़कुआं जैसे क्षेत्र हैं, जिन्हें कभी रेड-लाइट क्षेत्र के रूप में जाना जाता था, लेकिन समय के साथ उनका स्वरूप पूरी तरह बदल गया। कहीं पुलिस कार्रवाई, कहीं शहरी पुनर्विकास और कहीं सेक्स वर्करों के अन्यत्र चले जाने के कारण ये क्षेत्र सामान्य बस्तियों में बदल गए। इसलिए पुरानी सूचियों को आज की स्थिति मान लेना तथ्यात्मक रूप से गलत होगा।

इन इलाकों का इतिहास इतना जटिल क्यों है?

रेड-लाइट इलाकों का विकास किसी एक कारण से नहीं हुआ, बल्कि इसके पीछे कई सामाजिक और आर्थिक परिस्थितियां रही हैं:

  1. औपनिवेशिक काल और प्रवासन: ब्रिटिश शासन के दौरान कोलकाता, मुंबई और दिल्ली जैसे शहर तेजी से व्यापारिक केंद्र बने। बड़ी संख्या में अकेले पुरुष और मजदूर शहरों में आए, जिसके परिणामस्वरूप मनोरंजन और देह व्यापार से जुड़े क्षेत्र विकसित हुए।
  2. गरीबी और रोजगार का अभाव: गरीबी और आजीविका के साधनों की कमी के कारण कई महिलाएं इस पेशे में आने को मजबूर हुईं।
  3. मानवाधिकार और मानव तस्करी: यह सबसे गंभीर पहलू है। स्वेच्छा से वयस्क व्यक्ति द्वारा किया जाने वाला काम और मानव तस्करी दो अलग बातें हैं। तस्करी में जबरदस्ती, धोखा, ब्लैकमेलिंग और शोषण शामिल होता है, जो कि एक संगीन अपराध है।

भारत में कानून और सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक रुख

भारत में इस विषय को अक्सर गलत तरीके से समझा जाता है। भारतीय कानून के तहत वयस्क सेक्स वर्क के हर पहलू को सीधे तौर पर अपराध नहीं माना गया है, लेकिन मानव तस्करी, दलाली (Pimping), वेश्यालय (Brothel) चलाना, जबरन वेश्यावृत्ति और नाबालिगों का यौन शोषण अत्यंत गंभीर और दंडनीय अपराध हैं।

सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला (2022)

वर्ष 2022 में बुद्धदेव कर्माकर बनाम पश्चिम बंगाल सरकार (Budhadev Karmaskar v. State of West Bengal) मामले में सुप्रीम कोर्ट ने ऐतिहासिक निर्देश दिए:

  • सेक्स वर्करों के साथ पुलिस व समाज को गरिमा और सम्मान से व्यवहार करना चाहिए।
  • पुलिस को उनके साथ किसी भी प्रकार के शारीरिक या मौखिक दुर्व्यवहार से बचने के निर्देश दिए गए।
  • अदालत ने स्पष्ट किया कि संविधान के अनुच्छेद 21 (Article 21) के तहत हर व्यक्ति को, चाहे उसका पेशा जो भी हो, गरिमापूर्ण जीवन जीने का मौलिक अधिकार प्राप्त है।

प्रमुख रेड-लाइट इलाकों का संक्षिप्त विवरण

क्षेत्रशहरप्रमुख पहचान व वर्तमान स्थिति
सोनागाछीकोलकातादेश का सबसे चर्चित सेक्स-वर्क क्षेत्र; स्वास्थ्य व अधिकारों के लिए सक्रिय
कमाठीपुरामुंबई200 साल पुराना ऐतिहासिक क्षेत्र; अब तेजी से पुनर्विकास की ओर
जीबी रोडदिल्लीव्यावसायिक हार्डवेयर बाजार और सेक्स-वर्क का मिश्रित क्षेत्र
बुधवार पेठपुणेऐतिहासिक व्यापारिक बाजार और सेक्स-वर्क क्षेत्र
फॉकलैंड रोडमुंबईपुराने शहरी विस्तार और रेड-लाइट क्षेत्र से जुड़ा
चतुर्भुज स्थानमुजफ्फरपुरतस्करी व गरीबी से जुड़ा कस्बाई क्षेत्र
शिवदासपुरवाराणसीएनजीओ व सामाजिक संस्थाओं के पुनर्वास कार्यों के लिए चर्चित

निष्कर्ष

इन इलाकों को केवल “अपराध के केंद्र” या “अय्याशी के अड्डे” के रूप में देखना अधूरा और अन्यायपूर्ण दृष्टिकोण होगा। इन बस्तियों में सेक्स वर्करों के अलावा उनके बच्चे, सामान्य परिवार, छोटे व्यापारी और दुकानदार भी रहते हैं। सुप्रीम कोर्ट के 2022 के फैसले ने यह साफ कर दिया है कि पुनर्वास, तस्करी पर रोक और मानवाधिकारों की रक्षा ही इस जटिल सामाजिक समस्या का स्थायी समाधान बन सकती है।

जमुना दयाल

जमुना दयाल वाराणसी के निवासी हैं और उन्हें हिंदी समाचार मीडिया में 10 से अधिक वर्षों का गहन रिपोर्टिंग अनुभव है। उन्होंने अमर उजाला और दैनिक जागरण जैसे देश के प्रतिष्ठित समाचार पत्रों में जिला रिपोर्टर के रूप में कार्य करते हुए खेल, शिक्षा, राजनीति, कृषि तथा सामाजिक मुद्दों को प्रमुखता से कवर किया है। शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो उन्होंने महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ से जनसंचार में परास्नातक (MJMC) की डिग्री प्राप्त की है और यूजीसी नेट (UGC NET) परीक्षा उत्तीर्ण की है।

Related Articles

Back to top button