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ऑस्कर के मंच तक पहुंचा भारत: मराठी सिनेमा की चार फिल्मों से लेकर ‘नाटू-नाटू’ और ‘द एलिफेंट व्हिस्परर्स’ तक की पूरी कहानी

भारत की ऑस्कर यात्रा और मराठी सिनेमा का खास अध्याय

भारत और ऑस्कर का रिश्ता केवल पुरस्कार जीतने तक सीमित नहीं है। कभी किसी छोटे बजट की मराठी फिल्म ने देश की ओर से दुनिया के सबसे बड़े फिल्म मंच पर दस्तक दी, तो कभी भारतीय संगीत, ध्वनि और डॉक्यूमेंट्री ने ऑस्कर की ट्रॉफी अपने नाम की। 2026 में मराठी फिल्म ‘गोंधल’ के भारत की आधिकारिक एंट्री चुने जाने के बाद मराठी सिनेमा की चार फिल्में इस मुकाम तक पहुंच चुकी हैं। वहीं भारत से जुड़े फिल्मकारों और भारतीय सिनेमा की कृतियों ने अब तक कई ऑस्कर जीते हैं।

भारत की ऑस्कर यात्रा और मराठी सिनेमा का खास अध्याय

ऑस्कर में किसी फिल्म का भारत की आधिकारिक एंट्री चुना जाना और उसका ऑस्कर जीतना या अंतिम नामांकन हासिल करना अलग-अलग चरण हैं। भारत की ओर से चुनी गई फिल्म को पहले अकादमी की प्रक्रिया से गुजरना होता है। मराठी सिनेमा की चार फिल्मों—श्वास, हरिश्चंद्राची फैक्टरी, कोर्ट और अब गोंधल—ने भारत का प्रतिनिधित्व किया है।


1. ‘श्वास’: एक बच्चे की आंखों से शुरू हुआ सफर

फिल्म: Shwaas
भाषा: मराठी
निर्देशक: संदीप सावंत
भारत की आधिकारिक एंट्री: 2004, 77वें अकादमी पुरस्कार

श्वास की कहानी एक छोटे बच्चे पारश्या और उसके दादा के इर्द-गिर्द घूमती है। बच्चे की आंखों में गंभीर बीमारी का पता चलता है और डॉक्टरों के सामने उसे बचाने के लिए कठिन चिकित्सा प्रक्रिया का विकल्प होता है। इस प्रक्रिया के बाद बच्चे की आंखों की रोशनी जाने की आशंका रहती है।

दादा के सामने पोते की जिंदगी और उसकी आंखों की रोशनी के बीच बेहद भावनात्मक स्थिति पैदा होती है। फिल्म बीमारी से ज्यादा दादा-पोते के रिश्ते, जीवन के प्रति उम्मीद और बचपन की मासूमियत को सामने रखती है।

कम बजट में बनी इस फिल्म को राष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान मिली और 2004 में यह भारत की ऑस्कर एंट्री बनी। ऑस्कर की विदेशी भाषा फिल्म की दौड़ में यह छठे स्थान तक पहुंची, लेकिन अंतिम पांच नामांकित फिल्मों में जगह नहीं बना सकी।

यही वजह है कि श्वास मराठी सिनेमा के लिए एक महत्वपूर्ण पड़ाव बनी—हालांकि यह ऑस्कर जीत नहीं सकी।


2. ‘हरिश्चंद्राची फैक्टरी’: जब दादासाहेब फाल्के की कहानी ऑस्कर तक पहुंची

फिल्म: Harishchandrachi Factory
निर्देशक: परेश मोकाशी
भारत की आधिकारिक एंट्री: 2009, 82वें अकादमी पुरस्कार

भारतीय सिनेमा की शुरुआत की कहानी को पर्दे पर उतारना अपने आप में एक अलग प्रयोग था। परेश मोकाशी की यह फिल्म दादासाहेब फाल्के द्वारा 1913 में ‘राजा हरिश्चंद्र’ बनाने के संघर्ष पर आधारित है।

फिल्म में दिखाया गया है कि उस समय भारत में फिल्म निर्माण की तकनीक और संसाधन लगभग नहीं के बराबर थे। फाल्के फिल्म बनाने का सपना देखते हैं और इसके लिए कैमरे से लेकर कलाकारों तक की तलाश करते हैं। उनकी पत्नी सरस्वती फाल्के भी इस यात्रा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

महिलाओं का फिल्मों में अभिनय करना सामाजिक रूप से स्वीकार्य नहीं था। ऐसे में महिला किरदार के लिए कलाकार ढूंढना भी बड़ी चुनौती बन जाता है।

फिल्म ने भारत की ओर से ऑस्कर में जगह बनाई, लेकिन अंतिम नौ फिल्मों की शॉर्टलिस्ट में नहीं पहुंच सकी।


3. ‘कोर्ट’: अदालत के कटघरे से ऑस्कर तक

फिल्म: Court
निर्देशक: चैतन्य ताम्हणे
भारत की आधिकारिक एंट्री: 2015, 88वें अकादमी पुरस्कार

कोर्ट एक लोकगायक नारायण कांबले की कहानी है, जिस पर आरोप लगता है कि उसके गीत से प्रभावित होकर एक सीवर कर्मचारी ने आत्महत्या कर ली। इसके बाद कांबले के खिलाफ मुकदमा चलता है।

फिल्म अदालत की कार्रवाई के साथ-साथ न्याय व्यवस्था, सामाजिक असमानता और आम व्यक्ति के लिए कानूनी प्रक्रिया की जटिलताओं को सामने रखती है।

2015 में यह फिल्म भारत की आधिकारिक ऑस्कर एंट्री बनी। लेकिन ऑस्कर की अंतिम नौ फिल्मों वाली शॉर्टलिस्ट में यह जगह नहीं बना सकी। उस वर्ष 80 फिल्मों में से नौ फिल्मों को अगले चरण के लिए चुना गया था।

इससे एक बात स्पष्ट होती है—भारत की आधिकारिक एंट्री बनना अपने आप में ऑस्कर नामांकन नहीं है।


4. ‘गोंधल’: महाराष्ट्र की लोकपरंपरा से ऑस्कर की ओर

फिल्म: Gondhal
निर्देशक: संतोष दावखर
भारत की आधिकारिक एंट्री: 2026
ऑस्कर: 99वें अकादमी पुरस्कार, 2027

18 सितंबर 2026 को फिल्म फेडरेशन ऑफ इंडिया ने मराठी फिल्म ‘गोंधल’ को 33 फिल्मों में से चुनकर 2027 के ऑस्कर के लिए भारत की आधिकारिक एंट्री घोषित किया। यह अंतरराष्ट्रीय फीचर फिल्म श्रेणी में भारत का प्रतिनिधित्व करेगी।

फिल्म महाराष्ट्र की पारंपरिक गोंधल लोकपरंपरा और अनुष्ठान की पृष्ठभूमि में बुनी गई थ्रिलर है। इसकी कहानी रिश्तों, इच्छाओं, विश्वास, धोखे और मानवीय व्यवहार के इर्द-गिर्द आगे बढ़ती है। फिल्म में किशोर कदम, इशिता देशमुख और निषाद भोईर प्रमुख भूमिकाओं में हैं।

निर्देशक संतोष दावखर को 2025 के 56वें इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल ऑफ इंडिया में सर्वश्रेष्ठ निर्देशक का सिल्वर पीकॉक भी मिला था।

गोंधल की ऑस्कर यात्रा अभी शुरू हुई है। इसलिए इसे ऑस्कर विजेता या अंतिम पांच में पहुंची फिल्म कहना अभी सही नहीं होगा।


मराठी सिनेमा की चार फिल्में, लेकिन ऑस्कर ट्रॉफी अभी दूर

इन चारों फिल्मों की यात्रा को देखें तो एक महत्वपूर्ण तथ्य सामने आता है। श्वास, हरिश्चंद्राची फैक्टरी और कोर्ट भारत की आधिकारिक एंट्री बनीं, लेकिन इनमें से कोई भी अंतिम पांच नामांकित फिल्मों तक नहीं पहुंची।

गोंधल के मामले में प्रक्रिया अभी जारी है। इसलिए फिलहाल इसकी स्थिति भारत की आधिकारिक एंट्री की है।


भारत के नाम कितने ऑस्कर?

मराठी फिल्मों की ऑस्कर एंट्री से अलग भारत से जुड़े कई कलाकारों और फिल्मों ने ऑस्कर पुरस्कार जीते हैं। यहां यह अंतर समझना जरूरी है कि Gandhi और Slumdog Millionaire भारतीय निर्माण की फिल्में नहीं थीं, लेकिन भारतीय कलाकारों/तकनीशियनों ने उनमें ऑस्कर जीते।

भानु अथैया: भारत का पहला ऑस्कर

1983 में भानु अथैया ने Gandhi के लिए Costume Design का ऑस्कर जीता। वह ऑस्कर जीतने वाली पहली भारतीय बनीं। अकादमी के आधिकारिक रिकॉर्ड में उन्हें जॉन मोलो के साथ विजेता दर्ज किया गया है।


सत्यजीत रे को मिला मानद ऑस्कर

1992 में महान फिल्मकार सत्यजीत रे को Honorary Award दिया गया। यह किसी एक फिल्म की प्रतिस्पर्धात्मक श्रेणी में जीत नहीं थी, बल्कि उनके संपूर्ण सिनेमाई योगदान के सम्मान में दिया गया मानद पुरस्कार था।

इससे भारतीय सिनेमा के एक ऐसे फिल्मकार को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सम्मान मिला, जिन्होंने भारतीय कहानी कहने की शैली को विश्व सिनेमा तक पहुंचाया।


2009: जब ‘स्लमडॉग मिलियनेयर’ ने इतिहास रचा

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भारत से जुड़े ऑस्कर इतिहास में 2009 का समारोह बेहद महत्वपूर्ण रहा। Slumdog Millionaire को 10 नामांकन मिले और फिल्म ने 8 ऑस्कर जीते।

इनमें भारतीय नाम भी शामिल थे।

ए.आर. रहमान—दो ऑस्कर

ए.आर. रहमान ने फिल्म के लिए:

  • Original Score
  • Original Song – “Jai Ho”

दोनों पुरस्कार जीते। “Jai Ho” के बोल गुलजार ने लिखे थे।

गुलजार—‘जय हो’ के लिए ऑस्कर

गुलजार को Original Song श्रेणी में “Jai Ho” के गीतकार के रूप में ए.आर. रहमान के साथ ऑस्कर मिला।

रेसुल पुकुट्टी—ध्वनि के लिए सम्मान

रेसुल पुकुट्टी ने इयान टैप और रिचर्ड प्राइके के साथ Sound Mixing का ऑस्कर जीता।

इस तरह Slumdog Millionaire से जुड़े भारतीयों ने उस एक समारोह में चार ऑस्कर जीतों में योगदान दिया।


2023: ‘द एलिफेंट व्हिस्परर्स’ और ‘नाटू-नाटू’ ने बदला अध्याय

2023 में भारत को एक ही समारोह में दो अलग-अलग कृतियों के लिए ऑस्कर मिला।

द एलिफेंट व्हिस्परर्स

कार्तिकी गोंजाल्विस की डॉक्यूमेंट्री The Elephant Whisperers ने Documentary Short Film का ऑस्कर जीता।

फिल्म तमिलनाडु के मुदुमलाई क्षेत्र में हाथियों के बच्चों की देखभाल करने वाले बोम्मन और बेल्ली तथा उनके साथ हाथियों के रिश्ते पर आधारित है। 95वें अकादमी पुरस्कार में कार्तिकी गोंजाल्विस और गुनीत मोंगा विजेता रहे।


‘नाटू-नाटू’: भारतीय गीत की ऐतिहासिक जीत

एस.एस. राजामौली की RRR के गीत “Naatu Naatu” ने Original Song का ऑस्कर जीता।

इस पुरस्कार के विजेता:

संगीत: एम.एम. कीरवाणी
गीत: चंद्रबोस

थे। यह भारतीय सिनेमा के लिए खास उपलब्धि थी, क्योंकि RRR का गीत पहली बार किसी भारतीय फिल्म के गीत के रूप में इस श्रेणी में ऑस्कर विजेता बना।


भारत से जुड़े ऑस्कर: एक नजर में

वर्षफिल्म/कृतिभारतीय विजेताश्रेणी
1983Gandhiभानु अथैयाCostume Design
1992सत्यजीत रेHonorary Award
2009Slumdog Millionaireए.आर. रहमानOriginal Score
2009Slumdog Millionaireए.आर. रहमान, गुलजारOriginal Song
2009Slumdog Millionaireरेसुल पुकुट्टीSound Mixing
2023The Elephant Whisperersकार्तिकी गोंजाल्विस, गुनीत मोंगाDocumentary Short Film
2023RRRएम.एम. कीरवाणी, चंद्रबोसOriginal Song

अकादमी के आधिकारिक रिकॉर्ड में Slumdog Millionaire के लिए 2009 में आठ पुरस्कार दर्ज हैं, जिनमें भारतीय कलाकारों की ये जीतें शामिल हैं।


ऑस्कर की कहानी में मराठी सिनेमा का बढ़ता सफर

श्वास से शुरू हुआ मराठी सिनेमा का ऑस्कर सफर अब गोंधल तक पहुंच गया है। चार फिल्मों के चयन के बीच करीब दो दशक का अंतर है, लेकिन इन फिल्मों की विषय-वस्तु एक-दूसरे से बिल्कुल अलग रही है।

‘श्वास’ ने बीमारी और रिश्ते की कहानी सुनाई।
‘हरिश्चंद्राची फैक्टरी’ ने भारतीय सिनेमा के जन्म को पर्दे पर उतारा।
‘कोर्ट’ ने न्याय व्यवस्था के भीतर एक आम आदमी की कहानी दिखाई।
और ‘गोंधल’ महाराष्ट्र की लोकपरंपरा को थ्रिलर के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय मंच तक ले जाने की कोशिश कर रही है।

यानी मराठी सिनेमा की ऑस्कर यात्रा केवल पुरस्कार की तलाश नहीं, बल्कि स्थानीय कहानियों को अंतरराष्ट्रीय दर्शकों तक पहुंचाने की यात्रा भी है।

जमुना दयाल

जमुना दयाल वाराणसी के निवासी हैं और उन्हें हिंदी समाचार मीडिया में 10 से अधिक वर्षों का गहन रिपोर्टिंग अनुभव है। उन्होंने अमर उजाला और दैनिक जागरण जैसे देश के प्रतिष्ठित समाचार पत्रों में जिला रिपोर्टर के रूप में कार्य करते हुए खेल, शिक्षा, राजनीति, कृषि तथा सामाजिक मुद्दों को प्रमुखता से कवर किया है। शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो उन्होंने महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ से जनसंचार में परास्नातक (MJMC) की डिग्री प्राप्त की है और यूजीसी नेट (UGC NET) परीक्षा उत्तीर्ण की है।

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