दाढ़ी-मूंछ सिर्फ शौक नहीं, शान और पहचान भी: भारत बियर्ड क्लब से लेकर पुष्कर की लंबी मूंछ प्रतियोगिता तक
बेंगलुरु के भारत बियर्ड क्लब ने दाढ़ी-मूंछ प्रेमियों को दिया आधुनिक मंच, वहीं राजस्थान के मेलों में सदियों पुरानी परंपरा आज भी प्रतियोगिता के रूप में जीवित

भारत में दाढ़ी और मूंछ सिर्फ चेहरे पर उगने वाले बाल नहीं हैं। कई इलाकों में यह शान, सम्मान, परंपरा, व्यक्तित्व और सामाजिक पहचान का हिस्सा रही है। खासकर राजस्थान में बड़ी और तावदार मूंछ को राजपूती आन-बान और स्वाभिमान से जोड़कर देखा जाता रहा है।
इसी सांस्कृतिक परंपरा का आधुनिक रूप आज दाढ़ी-मूंछ प्रतियोगिताओं में दिखाई देता है। एक तरफ बेंगलुरु से शुरू हुआ भारत बियर्ड क्लब दाढ़ी-मूंछ रखने वालों को राष्ट्रीय मंच देने की कोशिश करता रहा है, तो दूसरी तरफ राजस्थान के पुष्कर मेले, जैसलमेर डेजर्ट फेस्टिवल, जोधपुर के मारवाड़ महोत्सव और डीग महोत्सव जैसे आयोजनों में मूंछ प्रतियोगिताएं लोक संस्कृति और पर्यटन का आकर्षण बनी हुई हैं।
भारत बियर्ड क्लब ने दाढ़ी को बनाया प्रतियोगिता का हिस्सा

भारत बियर्ड क्लब की शुरुआत बेंगलुरु से हुई। इसके संस्थापक विशाल सिंह है। क्लब ने दाढ़ी और मूंछ को लेकर उत्साहित लोगों को एक समुदाय से जोड़ने का काम किया।
बाद में क्लब ने Beard & Moustache National Championship जैसे आयोजन शुरू किए। इन प्रतियोगिताओं में देश के अलग-अलग हिस्सों से प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया।
2019 में गुरुग्राम के DLF CyberHub में आयोजित राष्ट्रीय फाइनल में 150 से ज्यादा प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया था। प्रतियोगिता में केवल सबसे लंबी दाढ़ी या मूंछ ही नहीं, बल्कि अलग-अलग स्टाइल और लुक को भी महत्व दिया गया।
प्रतियोगिता में कई श्रेणियां
भारत बियर्ड क्लब से जुड़ी प्रतियोगिताओं में अलग-अलग श्रेणियों में प्रतिभागियों को मौका दिया गया, जिनमें प्रमुख रूप से—
- Longest Beard – सबसे लंबी दाढ़ी
- Funky Beard – अलग और आकर्षक स्टाइल
- Great Indian Moustache – शानदार भारतीय मूंछ
- Best Handlebar Moustache – दोनों तरफ घुमावदार मूंछ
- Black & Grey Beard – काली और ग्रे दाढ़ी
- Mr Beard – सर्वश्रेष्ठ दाढ़ी लुक
इस तरह दाढ़ी-मूंछ केवल लंबाई की प्रतियोगिता नहीं रही, बल्कि स्टाइल और ग्रूमिंग भी इसका हिस्सा बन गए।
राजस्थान में सदियों पुरानी मूंछ की परंपरा
भारत में दाढ़ी-मूंछ प्रतियोगिताओं की बात हो और राजस्थान का जिक्र न हो, ऐसा संभव नहीं।
राजस्थान की लोक संस्कृति में मूंछ को सम्मान और शौर्य से जोड़कर देखा जाता है। राजस्थान पर्यटन भी जैसलमेर के मरू महोत्सव के संदर्भ में मूंछ और पगड़ी को सम्मान तथा प्रतिष्ठा के प्रतीक के रूप में बताता है।
यही वजह है कि राजस्थान के कई बड़े मेलों और महोत्सवों में मूंछ प्रतियोगिता आज भी दर्शकों के आकर्षण का केंद्र रहती है।
1. पुष्कर मेले में ‘सबसे लंबी मूंछ’ की होड़
राजस्थान के अजमेर जिले में लगने वाला पुष्कर मेला दुनिया के चर्चित पशु एवं सांस्कृतिक मेलों में शामिल है। यहां पशुओं की खरीद-बिक्री और धार्मिक गतिविधियों के साथ कई पारंपरिक प्रतियोगिताएं भी होती हैं।
इनमें ‘Longest Moustache’ यानी सबसे लंबी मूंछ प्रतियोगिता खास आकर्षण है। राजस्थान पर्यटन की आधिकारिक वेबसाइट इसे पुष्कर मेले की प्रमुख प्रतियोगिताओं में शामिल करती है।
यहां बड़ी, घनी और आकर्षक मूंछ रखने वाले प्रतिभागी अपनी मूंछ का प्रदर्शन करते हैं। पुराने कार्यक्रमों में मेले के मैदान में मूंछ प्रतियोगिता के लिए बाकायदा समय निर्धारित किया गया है।
सिर्फ लंबाई नहीं, अंदाज भी महत्वपूर्ण
पुष्कर की मूंछ प्रतियोगिता की खासियत यह है कि यहां मूंछ सिर्फ नापने की चीज नहीं, बल्कि राजस्थानी व्यक्तित्व और पारंपरिक पहनावे का हिस्सा बन जाती है। पगड़ी, पारंपरिक पोशाक और तावदार मूंछ के साथ प्रतिभागी मंच पर आते हैं।
राजस्थान पर्यटन इसे पुरुषों के लिए होने वाली पारंपरिक और आकर्षक प्रतियोगिता के रूप में वर्णित करता है।
2. जैसलमेर डेजर्ट फेस्टिवल में लंबी मूंछों का मुकाबला
रेगिस्तान की सुनहरी रेत और जैसलमेर का किला जब पृष्ठभूमि में हो तो मूंछ प्रतियोगिता का अंदाज भी खास हो जाता है।
जैसलमेर डेजर्ट फेस्टिवल में लंबे समय से मूंछ प्रतियोगिता आयोजित होती रही है। राजस्थान पर्यटन के अनुसार इस उत्सव में ऊंट सजावट, लोक कार्यक्रम, पगड़ी बांधने की प्रतियोगिता और मूंछ प्रतियोगिता प्रमुख आकर्षण हैं।
भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय के Utsav पोर्टल के अनुसार 2026 के डेजर्ट फेस्टिवल में भी Longest Moustache Contest प्रमुख आकर्षणों में शामिल था और आयोजन राजस्थान पर्यटन द्वारा किया गया।
यहां मूंछ को केवल फैशन नहीं, बल्कि राजस्थान की पारंपरिक पहचान के रूप में प्रस्तुत किया जाता है।
3. जोधपुर के मारवाड़ महोत्सव में तावदार मूंछों का जलवा
जोधपुर का मारवाड़ महोत्सव राजस्थान के लोक जीवन, वीरगाथाओं और मारवाड़ी संस्कृति को सामने लाने वाला प्रमुख आयोजन है।
इस महोत्सव में मूंछ प्रतियोगिता के साथ पगड़ी बांधना, रस्साकशी, मटका दौड़ और पारंपरिक पोशाक जैसी प्रतियोगिताएं होती हैं।
भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय के Utsav पोर्टल पर दर्ज कार्यक्रम के अनुसार 2024 के मारवाड़ महोत्सव में जोधपुर के उम्मेद स्टेडियम में Moustache, Turban Tying, Marwar Shree, Tug of War और Matka Race जैसी प्रतियोगिताएं हुई थीं। आयोजन राजस्थान पर्यटन विभाग द्वारा किया गया था।
राजस्थान पर्यटन के विवरण में यहां होने वाली मूंछ प्रतियोगिता को लंबी, घनी और स्टाइलिश मूंछों की प्रतियोगिता बताया गया है।
यानी यहां सिर्फ मूंछ की लंबाई ही नहीं, बल्कि उसका घनापन और अंदाज भी आकर्षण का हिस्सा है।
4. डीग महोत्सव में भी मूंछ प्रतियोगिता
राजस्थान के भरतपुर क्षेत्र का डीग महोत्सव भी इस सूची में शामिल है।
भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय के Utsav पोर्टल पर 2024 और 2025 के डीग महोत्सव के कार्यक्रम में Mustache Competition का स्पष्ट उल्लेख है। इसके साथ कबड्डी, रस्साकशी, पारंपरिक पोशाक और पगड़ी बांधने की प्रतियोगिताएं भी आयोजित की गईं।
डीग महोत्सव का आयोजन राजस्थान पर्यटन विभाग द्वारा किया जाता है। इसका उद्देश्य क्षेत्र की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को पर्यटन से जोड़ना भी है।
आधुनिक क्लब और पारंपरिक मेले में फर्क
भारत बियर्ड क्लब और राजस्थान के पारंपरिक मेलों में होने वाली प्रतियोगिताओं का उद्देश्य कुछ हद तक समान दिखाई देता है, लेकिन दोनों की प्रकृति अलग है।
| आधुनिक दाढ़ी प्रतियोगिता | पारंपरिक मूंछ प्रतियोगिता |
|---|---|
| भारत बियर्ड क्लब जैसे संगठन | पुष्कर, जैसलमेर, जोधपुर जैसे मेले |
| दाढ़ी और मूंछ की विभिन्न स्टाइल | पारंपरिक राजस्थानी मूंछ |
| ग्रूमिंग और फैशन पर जोर | संस्कृति और परंपरा पर जोर |
| Longest Beard, Funky Beard आदि | सबसे लंबी/लंबी-घनी-स्टाइलिश मूंछ |
| राष्ट्रीय स्तर के प्रतिभागी | स्थानीय लोगों के साथ पर्यटक आकर्षण |
| आधुनिक मंच और सोशल मीडिया | लोक उत्सव और सांस्कृतिक आयोजन |
मूंछ बनी पर्यटन की पहचान
इन प्रतियोगिताओं ने एक दिलचस्प बदलाव किया है। जो मूंछ कभी केवल स्थानीय पहनावे और सामाजिक पहचान का हिस्सा थी, वह अब पर्यटन आकर्षण बन गई है।
पुष्कर में विदेशी पर्यटक भी मेले की पारंपरिक प्रतियोगिताओं और गतिविधियों का हिस्सा बनते हैं। जैसलमेर में मूंछ प्रतियोगिता रेगिस्तानी संस्कृति के साथ प्रस्तुत की जाती है, जबकि जोधपुर में इसे मारवाड़ की वीर और लोक परंपराओं के साथ जोड़ा जाता है।
इस तरह मूंछ प्रतियोगिता सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि स्थानीय संस्कृति को पर्यटकों तक पहुंचाने का माध्यम भी बन गई है।
तावदार मूंछ से बियर्ड चैंपियनशिप तक
भारत में दाढ़ी-मूंछ की कहानी दरअसल दो अलग धाराओं को जोड़ती है।
एक तरफ राजस्थान की पारंपरिक मूंछ संस्कृति है, जहां तावदार मूंछ शान और सम्मान से जुड़ी है। दूसरी तरफ भारत बियर्ड क्लब जैसे आधुनिक मंच हैं, जहां दाढ़ी-मूंछ को फैशन, ग्रूमिंग, व्यक्तित्व और प्रतियोगिता का रूप दिया गया है।
पुष्कर के मेले में सबसे लंबी मूंछ की तलाश हो, जैसलमेर के रेगिस्तान में मूंछों का मुकाबला, जोधपुर के मारवाड़ महोत्सव में स्टाइलिश मूंछों की प्रतियोगिता या डीग महोत्सव में मूंछ का प्रदर्शन—हर जगह एक बात समान है।
मूंछ यहां सिर्फ चेहरे पर नहीं, बल्कि पहचान के तौर पर दिखाई देती है।
और शायद यही वजह है कि बदलते फैशन के दौर में भी भारत की पारंपरिक मूंछ अपनी अलग पहचान बनाए हुए है।



