SIR में VIPs पर गिरी गाज या अफवाह? प्रकाश राज से तेजस्वी यादव तक… जानिए वोटर लिस्ट का पूरा सच

भारत में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) को लेकर राजनीति और सोशल मीडिया का पारा चढ़ा हुआ है। जब मशहूर अभिनेता प्रकाश राज ने बेंगलुरु की वोटर लिस्ट से अपना नाम हटने का दावा किया, तो इस पर बहस छिड़ गई।
हालांकि, बाद में प्रशासनिक जांच में मामला कुछ और ही निकला। केवल प्रकाश राज ही नहीं, बल्कि तेजस्वी यादव, सोमनाथ भारती और विजय कुमार सिन्हा जैसे कई बड़े राजनेताओं के नाम भी SIR और मतदाता सूची पुनरीक्षण से जुड़े विवादों में आ चुके हैं। आइए समझते हैं कि प्रकाश राज के मामले की सच्चाई क्या है और SIR में किन-किन हस्तियों के नाम को लेकर विवाद खड़ा हुआ।
प्रकाश राज मामला: नाम काटा गया या सिर्फ पता बदला?
अभिनेता प्रकाश राज ने 11 अगस्त 2026 को सोशल मीडिया के जरिए दावा किया कि बेंगलुरु की मतदाता सूची से उनका नाम हटा दिया गया है। उन्होंने इसके लिए चल रही SIR प्रक्रिया पर सवाल उठाए।
जांच में सामने आई सच्चाई:
12 अगस्त 2026 को चुनाव अधिकारियों द्वारा की गई जांच में यह बात सामने आई कि बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) जब उनके पंजीकृत पते पर सत्यापन (Verification) के लिए गए, तो पाया गया कि वे वहां नहीं रह रहे हैं।
- अधिकारियों का कदम: इसके आधार पर उनका नाम “Shifted / Permanently Shifted” श्रेणी में डाला गया।
- क्या मताधिकार खत्म हो गया? बिल्कुल नहीं। इसका मतलब यह कतई नहीं है कि उनका वोट देने का अधिकार खत्म हो गया है। वे अपने नए पते के अनुसार फॉर्म-6 भरकर आसानी से नया मतदाता पहचान पत्र या नया पंजीकरण करा सकते हैं।
SIR विवाद में आए प्रमुख नेता और अभिनेता: किसकी क्या है स्थिति?
अक्सर “नाम हटने के दावे” और “आयोग द्वारा आधिकारिक तौर पर नाम हटाए जाने” के बीच अंतर होता है। नीचे दिए गए विवरण से स्थिति स्पष्ट होती है:
| नाम | पहचान | SIR / वोटर लिस्ट से जुड़ा मामला | आयोग/अधिकारियों का रुख एवं स्थिति |
| प्रकाश राज | अभिनेता | बेंगलुरु मतदाता सूची में नाम न मिलने का दावा | अधिकारियों के अनुसार पुराना पता बदलने से “Shifted” दर्ज किया गया। |
| तेजस्वी यादव | RJD नेता | बिहार SIR के दौरान मतदाता सूची से नाम गायब होने का आरोप | चुनाव आयोग ने जांच के बाद स्थिति पर स्पष्टीकरण जारी किया। |
| सोमनाथ भारती | पूर्व AAP विधायक | दिल्ली की 2002 की SIR सूची में नाम न मिलने पर सवाल | CEO ने स्पष्ट किया कि 2002 की सूची में नाम न होना मौजूदा सूची से नाम हटने का आधार नहीं है। |
| विजय कुमार सिन्हा | उपमुख्यमंत्री, बिहार | दो अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों में वोटर प्रविष्टि का विवाद | उन्होंने स्पष्ट किया कि एक क्षेत्र से नाम हटाने के लिए वे पहले ही आवेदन कर चुके हैं। |
दावों की हकीकत: नाम हटना बनाम नाम हटने का दावा
इस पूरे विवाद में एक बेहद महत्वपूर्ण बात समझने की जरूरत है। “SIR में नाम हटाए गए नेताओं की सूची” और “जिन नेताओं ने नाम हटने का दावा किया”—ये दोनों पूरी तरह अलग बातें हैं। हर मामले में यह कहना सही नहीं होगा कि चुनाव आयोग ने दुर्भावनापूर्ण तरीके से किसी का नाम काटा है।
चुनाव आयोग SIR के तहत नाम क्यों हटाता है?
- स्थान परिवर्तन (Shifted): मतदाता का उस पंजीकृत पते पर न मिलना जहां वह पहले रहता था।
- दोहरी प्रविष्टि (Duplicate Entry): एक ही व्यक्ति का एक से अधिक स्थानों पर नामांकित होना।
- मृत्यु (Deceased): मतदाता के निधन की पुष्टि होने पर।
- अनुपस्थिति (Absent): बीएलओ द्वारा बार-बार सत्यापन के बावजूद मतदाता का उपलब्ध न होना।
ध्यान दें: यदि किसी पात्र नागरिक का नाम गलती से या प्रक्रियात्मक कारणों से सूची से हट जाता है, तो चुनाव आयोग के दावों और आपत्तियों (Claims and Objections) के चरण में फॉर्म-6 या फॉर्म-8 भरकर नाम वापस बहाल कराया जा सकता है।



