आलू से चॉकलेट तक: भारत में समोसे के अनोखे रिकॉर्ड और बनाने वालों की कहानी
किसी ने एक साथ 406 तरह के समोसे बनाए, किसी ने 300 किस्मों से दुनिया का ध्यान खींचा और किसी ने 300 किलो से ज्यादा वजन का विशाल समोसा बनाने का दावा किया—भारत में समोसा अब सिर्फ नाश्ता नहीं, बल्कि रचनात्मकता और रिकॉर्ड की कहानी भी है।

भारत में समोसा सिर्फ एक लोकप्रिय नाश्ता नहीं है। चाय की दुकान से लेकर बड़े होटल तक इसकी मौजूदगी दिखाई देती है। सामान्य तौर पर आलू, मटर और मसालों से भरे त्रिकोणीय समोसे की पहचान भले ही सबसे ज्यादा हो, लेकिन देश के अलग-अलग हिस्सों में इसे लेकर इतने प्रयोग हुए हैं कि समोसे की दुनिया अब आलू और मटर से कहीं आगे निकल चुकी है।
कहीं समोसे में पनीर और मशरूम का स्वाद आया, कहीं चॉकलेट ने इसकी भरावन बदल दी और कहीं विदेशी व्यंजनों से प्रेरित होकर इसे नए रूप में पेश किया गया।
समोसे की इसी रचनात्मक दुनिया में कुछ संस्थानों और लोगों ने एक साथ सबसे ज्यादा किस्में बनाने से लेकर सबसे बड़ा समोसा तैयार करने तक के प्रयास किए हैं।
406 तरह के समोसे—जालंधर की GNA University का बड़ा प्रयास

समोसे की सबसे ज्यादा किस्में एक साथ तैयार करने के चर्चित भारतीय प्रयासों में जालंधर की GNA University का नाम सबसे पहले आता है।
नवंबर 2018 में विश्वविद्यालय के Faculty of Hospitality ने 406 अलग-अलग प्रकार के समोसे तैयार किए। The Tribune की रिपोर्ट के मुताबिक इसे Limca Book of Records के लिए अधिकतम समोसा किस्मों का रिकॉर्ड बनाने के प्रयास के रूप में किया गया था।
इस प्रयास में Chef Varinder Singh Rana के नेतृत्व में 10 फैकल्टी शेफ और 50 छात्र शेफ शामिल हुए। विश्वविद्यालय ने रिकॉर्ड को Limca Book of Records में दर्ज कराने के लिए दस्तावेज भी भेजे थे।
समोसे में आए नए स्वाद
इन प्रयोगों की खासियत यह थी कि समोसे की पारंपरिक पहचान को बनाए रखते हुए अलग-अलग सामग्री और व्यंजनों से प्रेरणा ली गई।
समोसे के प्रयोगों में पनीर, कीमा, टूना, ड्राई फ्रूट, चुकंदर, मटर-मशरूम और अंडे जैसी सामग्रियों का इस्तेमाल किए।
यानी एक ही त्रिकोणीय आकार में स्वाद की पूरी दुनिया समाने लगी।
300 तरह के समोसे और ‘द ग्रेट इंडियन समोत्सव’

साल 2020 में पंजाब के लुधियाना स्थित PCTE Institute of Hotel Management ने भी समोसे की किस्मों को लेकर बड़ा आयोजन किया।
‘The Great Indian Samotsav’ नाम के कार्यक्रम में संस्थान के 160 विद्यार्थियों ने 300 अलग-अलग प्रकार के समोसे तैयार किए और इसे विश्व रिकॉर्ड बनाने के प्रयास के तौर पर प्रस्तुत किया गया।
इस आयोजन की खासियत यह थी कि समोसे में सिर्फ भारतीय स्वाद ही नहीं, बल्कि दुनिया के अलग-अलग व्यंजनों से भी प्रेरणा ली गई। विद्यार्थियों ने तिरोपिता समोसा, वेज मुसाका समोसा, चिकन सॉसेज समोसा, एग बेनेडिक्ट समोसा, काप्रेसे इटालियानो जैसी किस्में तैयार कीं।
यह आयोजन यह दिखाता है कि होटल मैनेजमेंट के विद्यार्थी पारंपरिक भारतीय व्यंजन को अंतरराष्ट्रीय स्वाद के साथ किस तरह जोड़ सकते हैं।
जब समोसा बना 332 किलो का
अब कहानी आती है उस समोसे की, जिसने आकार के कारण सुर्खियां बटोरीं।
2016 में उत्तर प्रदेश के महराजगंज जिले में रितेश सोनी के नेतृत्व में एक समूह ने करीब 332 किलोग्राम वजन का विशाल समोसा बनाने का दावा किया था। Times of India की रिपोर्ट के मुताबिक करीब 10 लोगों के समूह ने यह समोसा तैयार किया। उस समय कुछ अन्य रिपोर्टों में इसका वजन 350 किलोग्राम तक बताया गया था। इसलिए इस घटना के संदर्भ में अलग-अलग रिपोर्टों में वजन को लेकर अंतर मिलता है।
समोसा बनाने वालों ने कैसे बदली इसकी पहचान?
समोसे की सबसे बड़ी ताकत उसकी लचीली रेसिपी है।
पारंपरिक समोसे में मुख्य रूप से मैदा या आटे की परत और मसालेदार भरावन होता है। लेकिन शेफ और होटल मैनेजमेंट के विद्यार्थियों ने इसी ढांचे को आधार बनाकर नए प्रयोग किए।
प्रयोगों की दुनिया
पारंपरिक:
आलू, मटर, मसाले और हरी मिर्च।
पनीर वाला:
पनीर, मसाले और सब्जियों की भरावन।
मशरूम समोसा:
मशरूम और मसालों का मिश्रण।
नॉन-वेज समोसा:
चिकन, कीमा, अंडे और समुद्री खाद्य पदार्थों तक के प्रयोग।
फ्यूजन समोसा:
पिज्जा, पास्ता और दूसरे अंतरराष्ट्रीय व्यंजनों से प्रेरित भरावन।
मीठा समोसा:
चॉकलेट और ड्राई फ्रूट जैसे प्रयोग।
इसी प्रयोगधर्मिता ने समोसे को पारंपरिक स्ट्रीट फूड से आगे बढ़ाकर फ्यूजन फूड की दुनिया में भी जगह दिलाई।
समोसे की लोकप्रियता का राज क्या है?
समोसे की लोकप्रियता का सबसे बड़ा कारण शायद इसकी सादगी और विविधता है।
एक ही बाहरी परत में आप अलग-अलग भरावन डाल सकते हैं और पूरा स्वाद बदल जाता है। यही वजह है कि उत्तर भारत में आलू-मटर का समोसा लोकप्रिय है, जबकि आधुनिक रेस्तरां और होटल मैनेजमेंट संस्थानों में पनीर, चिकन, चॉकलेट, पास्ता और दूसरे फ्यूजन प्रयोग सामने आते हैं।
समोसा इतना लोकप्रिय है कि भारतीय स्नैक के रूप में इसे देश के बाहर भी पहचान मिली है।
लेकिन रिकॉर्ड बनाने वालों ने इसकी लोकप्रियता को एक कदम आगे ले जाकर सवाल खड़ा किया।
दिल्ली में भी मिलते हैं दर्जनों तरह के समोसे
रिकॉर्ड से अलग, दिल्ली में कई दुकानों ने बड़ी संख्या में समोसे की किस्में पेश की हैं। उदाहरण के लिए, 2021 की एक रिपोर्ट में कुमार समोसे वाला, न्यू मोती नगर में करीब 28 प्रकार के समोसे मिलते है। इनमें पास्ता, पिज्जा, मंचूरियन, चाउमीन, मलाई चाप, पनीर कोरमा और चॉकलेट समोसा जैसी किस्में शामिल है।
छोटा समोसा, बड़ी कहानी
भारत में समोसा जितना आम है, उसके प्रयोग उतने ही असाधारण होते जा रहे हैं।
जालंधर में 406 तरह के समोसे बनाने का प्रयास हो या लुधियाना में 300 किस्मों की प्रस्तुति, इन आयोजनों ने यह साबित किया कि भारतीय स्नैक्स में प्रयोग की कोई सीमा नहीं।
महराजगंज में विशाल समोसा बनाने का दावा यह बताते हैं कि समोसा सिर्फ स्वाद की चीज नहीं रहा—अब यह रिकॉर्ड, रचनात्मकता, कौशल और सांस्कृतिक पहचान का भी हिस्सा बन चुका है।
और शायद यही समोसे की सबसे बड़ी खासियत है—आकार चाहे छोटा हो या सैकड़ों किलो का, कहानी हमेशा बड़ी होती है।



