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भारत के सबसे साक्षर राज्य और उनके पढ़े-लिखे जिले

केरल से लेकर मणिपुर तक… इन राज्यों के जिलों ने शिक्षा के मामले में देश के सामने पेश की मिसाल

भारत में शिक्षा की तस्वीर सिर्फ महानगरों और बड़े विश्वविद्यालयों से नहीं बनती। देश के कई राज्य और उनके छोटे-बड़े जिले ऐसे हैं, जहां पढ़ाई सामाजिक जीवन का अहम हिस्सा बन चुकी है। 2011 की जनगणना के अनुसार केरल सबसे अधिक साक्षर राज्य था, लेकिन उसके बाद पूर्वोत्तर के कई राज्यों ने भी शानदार प्रदर्शन किया। मिजोरम का सेरछिप जिला तो करीब 99 प्रतिशत साक्षरता के साथ देश में सबसे आगे रहा।

शिक्षा में कौन-कौन से राज्य हैं सबसे आगे?

2011 की जनगणना के अनुसार राज्यों में साक्षरता के आधार पर शीर्ष दस में केरल, मिजोरम, गोवा, त्रिपुरा, हिमाचल प्रदेश, महाराष्ट्र, सिक्किम, तमिलनाडु, नागालैंड और मणिपुर शामिल हैं। इन राज्यों की साक्षरता दर राष्ट्रीय औसत 74.04 प्रतिशत से काफी अधिक थी।

क्रमराज्य2011 की साक्षरता दरसबसे अधिक साक्षर जिला
1केरल93.91%पठानमथिट्टा – 96.93%
2मिजोरम91.58%सेरछिप – 98.76%
3गोवा87.40%उत्तर गोवा – करीब 89.57%
4त्रिपुरा87.75%पश्चिम त्रिपुरा – 88.69%
5हिमाचल प्रदेश83.78%हमीरपुर – 88.15%
6महाराष्ट्र82.91%मुंबई उपनगर – 89.91%
7सिक्किम82.20%पूर्व सिक्किम – 84.67%
8तमिलनाडु80.33%कन्याकुमारी – 91.75%
9नागालैंड80.11%मोकोकचुंग – 91.62%
10मणिपुर79.85%इंफाल पश्चिम – करीब 86.1%

राज्यवार आंकड़े 2011 की जनगणना पर आधारित हैं।


1. केरल: जहां शिक्षा बनी सामाजिक आंदोलन

केरल के सरकारी स्कूल में पढ़ते बच्चे। फोटो स्रोत-इंटरनेट मीडिया

केरल का नाम भारत की साक्षरता की चर्चा में सबसे पहले आता है। 2011 में राज्य की साक्षरता दर 93.91 प्रतिशत थी। पुरुष साक्षरता 96.02 और महिला साक्षरता 91.98 प्रतिशत थी।

पठानमथिट्टा बना शिक्षा का सिरमौर

केरल के जिलों में पठानमथिट्टा 96.93 प्रतिशत साक्षरता के साथ सबसे आगे रहा। पुरुष साक्षरता 97.70 प्रतिशत और महिला साक्षरता 96.26 प्रतिशत थी।

इस जिले की खास बात यह है कि यहां महिला साक्षरता भी बेहद ऊंची रही। यही वजह है कि पठानमथिट्टा सिर्फ आंकड़ों में नहीं, बल्कि महिला शिक्षा के लिहाज से भी उल्लेखनीय उदाहरण बनता है।

रोचक तथ्य: पठानमथिट्टा उन जिलों में रहा जहां 2001-2011 के दौरान आबादी में गिरावट दर्ज हुई, फिर भी साक्षरता बेहद ऊंची रही।


2. मिजोरम: पहाड़ियों के बीच शिक्षा की सबसे चमकदार तस्वीर

मिजोरम की 2011 की साक्षरता दर करीब 91.6 प्रतिशत थी। राज्य की सबसे बड़ी उपलब्धि इसका जिला स्तर का प्रदर्शन है।

सेरछिप: देश का सबसे साक्षर जिला

सेरछिप जिले की साक्षरता दर 98.76 प्रतिशत दर्ज हुई थी। यह 2011 में भारत के सभी जिलों में सबसे ऊंची दर थी। पुरुष साक्षरता 99 प्रतिशत से अधिक और महिला साक्षरता भी 98 प्रतिशत से अधिक थी।

सोचिए—एक पहाड़ी और सीमावर्ती राज्य का जिला देश के सबसे बड़े महानगरों से भी आगे निकल गया। यही सेरछिप की कहानी को खास बनाता है।

रोचक तथ्य: मिजोरम के कई जिलों में महिलाओं की शिक्षा का स्तर भी बेहद मजबूत रहा है, जिससे राज्य की कुल साक्षरता ऊंची बनी।


3. गोवा: पर्यटन के साथ शिक्षा में भी आगे

गोवा के सरकारी स्कूल में पढ़ते बच्चे। फोटो स्रोत-इंटरनेट मीडिया

गोवा की 2011 की साक्षरता दर करीब 87.40 प्रतिशत थी। यह देश के सबसे शिक्षित राज्यों में शामिल रहा।

उत्तर गोवा सबसे आगे

2011 के आंकड़ों में उत्तर गोवा की साक्षरता दर करीब 89.57 प्रतिशत दर्ज हुई।

गोवा को आमतौर पर समुद्र, पर्यटन और समुद्र तटों के लिए जाना जाता है, लेकिन इसकी शिक्षा व्यवस्था भी राज्य के सामाजिक विकास की बड़ी वजहों में शामिल है।

रोचक तथ्य: उत्तर गोवा में शहरी और ग्रामीण दोनों आबादी का बड़ा हिस्सा है, फिर भी जिले की साक्षरता राज्य के औसत से ऊपर रही।


4. त्रिपुरा: पूर्वोत्तर का शिक्षा मॉडल

त्रिपुरा की 2011 की साक्षरता दर 87.22 प्रतिशत थी। पुरुष साक्षरता 91.53 प्रतिशत और महिला साक्षरता 82.73 प्रतिशत रही।

पश्चिम त्रिपुरा सबसे आगे

पश्चिम त्रिपुरा जिले की साक्षरता दर 88.69 प्रतिशत थी। पुरुष साक्षरता 92.50 प्रतिशत और महिला साक्षरता 84.75 प्रतिशत रही।

अगरतला सहित यह इलाका राज्य का बड़ा शैक्षणिक और प्रशासनिक केंद्र भी रहा है। इसलिए यहां स्कूलों, कॉलेजों और अन्य शिक्षण संस्थानों का प्रभाव दिखाई देता है।

रोचक तथ्य: त्रिपुरा में 2001 से 2011 के बीच साक्षरता में बड़ा सुधार हुआ और राज्य पूर्वोत्तर के सबसे शिक्षित राज्यों में शामिल हो गया।


5. हिमाचल प्रदेश: पहाड़ों में पढ़ाई की मजबूत परंपरा

हिमाचल प्रदेश की 2011 की साक्षरता दर 83.78 प्रतिशत थी।

हमीरपुर सबसे आगे

हमीरपुर जिले की साक्षरता दर 88.15 प्रतिशत थी। पुरुष साक्षरता 94.36 प्रतिशत और महिला साक्षरता 82.62 प्रतिशत रही।

हिमाचल जैसे पहाड़ी राज्य में गांवों तक शिक्षा पहुंचाना आसान नहीं था। इसके बावजूद हमीरपुर ने राज्य के दूसरे जिलों को पीछे छोड़ा।

रोचक तथ्य: हमीरपुर की ग्रामीण साक्षरता भी 87.82 प्रतिशत थी, जबकि शहरी क्षेत्र में यह 92.51 प्रतिशत थी।


6. महाराष्ट्र: महानगरों के साथ शिक्षा की बड़ी ताकत

महाराष्ट्र की 2011 की साक्षरता दर 82.91 प्रतिशत थी। पुरुष साक्षरता 89.82 और महिला साक्षरता 75.48 प्रतिशत रही।

मुंबई उपनगर सबसे आगे

मुंबई उपनगर जिले की साक्षरता दर 89.91 प्रतिशत थी।

मुंबई उपनगर में बड़ी आबादी, तेजी से बढ़ते शहर और विविध सामाजिक पृष्ठभूमि के बावजूद शिक्षा का स्तर काफी ऊंचा रहा।

रोचक तथ्य: मुंबई उपनगर पूरी तरह शहरी जिला है और 2011 में इसकी महिला साक्षरता 86.37 प्रतिशत दर्ज हुई थी।


7. सिक्किम: छोटे राज्य की बड़ी उपलब्धि

सिक्किम की 2011 की साक्षरता दर 82.20 प्रतिशत थी। राज्य के चार जिलों में पूर्व सिक्किम सबसे आगे रहा।

पूर्व सिक्किम: 84.67 प्रतिशत साक्षरता

पूर्व सिक्किम की साक्षरता दर 84.67 प्रतिशत थी। पुरुष साक्षरता 89.22 और महिला साक्षरता 79.41 प्रतिशत रही।

राजधानी गंगटोक इसी क्षेत्र में होने के कारण शिक्षा और प्रशासनिक सुविधाओं की बेहतर पहुंच भी इसकी एक खासियत रही।

रोचक तथ्य: सिक्किम की कुल साक्षरता 2001 के 68.81 प्रतिशत से बढ़कर 2011 में 82.20 प्रतिशत हो गई।


8. तमिलनाडु: कन्याकुमारी ने बनाया रिकॉर्ड

तमिलनाडु की 2011 की साक्षरता दर 80.33 प्रतिशत थी।

कन्याकुमारी सबसे आगे

तमिलनाडु में कन्याकुमारी जिला 91.75 प्रतिशत साक्षरता के साथ सबसे आगे रहा। पुरुष साक्षरता 93.65 और महिला साक्षरता 89.90 प्रतिशत थी।

देश के दक्षिणी छोर पर स्थित यह जिला धार्मिक, सांस्कृतिक और शैक्षणिक विविधता के लिए भी जाना जाता है।

रोचक तथ्य: कन्याकुमारी की साक्षरता राज्य की औसत साक्षरता से करीब 11 प्रतिशत अंक अधिक थी।


9. नागालैंड: मोकोकचुंग की शिक्षा वाली पहचान

नागालैंड की 2011 की साक्षरता दर 80.11 प्रतिशत थी।

मोकोकचुंग 91.62 प्रतिशत पर

नागालैंड के जिलों में मोकोकचुंग सबसे आगे रहा। 2011 में यहां साक्षरता दर 91.62 प्रतिशत थी। पुरुष साक्षरता 92.18 और महिला साक्षरता 91.01 प्रतिशत रही।

यह आंकड़ा खास इसलिए भी है क्योंकि पूरे राज्य की साक्षरता लगभग 80 प्रतिशत थी, जबकि मोकोकचुंग उससे 11 प्रतिशत से ज्यादा आगे था।

रोचक तथ्य: मोकोकचुंग जिले की महिला और पुरुष साक्षरता में अंतर बेहद कम रहा—करीब एक प्रतिशत अंक।


10. मणिपुर: इंफाल पश्चिम की शैक्षणिक ताकत

मणिपुर की 2011 की साक्षरता दर 79.85 प्रतिशत थी।

इंफाल पश्चिम सबसे आगे

मणिपुर में इंफाल पश्चिम सबसे अधिक साक्षर जिलों में शीर्ष पर रहा। जिला प्रशासन के अनुसार 2011 में इसकी साक्षरता दर 86.1 प्रतिशत थी, जो राज्य के औसत 76.9 प्रतिशत से काफी अधिक थी।

इंफाल पश्चिम में राज्य की राजधानी इंफाल स्थित होने के कारण शिक्षा और उच्च शिक्षण संस्थानों का बड़ा प्रभाव रहा है।

रोचक तथ्य: जिले में अनुसूचित जनजाति आबादी की साक्षरता भी 89.8 प्रतिशत दर्ज हुई थी।


इन आंकड़ों को सिर्फ प्रतिशत के रूप में देखना अधूरा होगा। इनकी असली कहानी यह है कि साक्षरता तब बढ़ती है जब शिक्षा सामाजिक प्राथमिकता बनती है।

केरल और तमिलनाडु में लंबे समय से शिक्षा का सामाजिक आधार मजबूत रहा। हिमाचल और सिक्किम ने कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद शिक्षा को गांवों तक पहुंचाया। मिजोरम, नागालैंड, त्रिपुरा और मणिपुर ने दिखाया कि पूर्वोत्तर के छोटे राज्य भी शिक्षा के मामले में देश को दिशा दे सकते हैं।

महाराष्ट्र और गोवा की कहानी दूसरी तरह की है—तेजी से शहरीकरण और आर्थिक गतिविधियों के बावजूद शिक्षा को विकास का महत्वपूर्ण आधार बनाया गया।


सबसे चौंकाने वाला आंकड़ा: राज्य से ज्यादा साक्षर जिला

इस पूरी सूची में सबसे दिलचस्प उदाहरण मिजोरम का सेरछिप है।

मिजोरम की कुल साक्षरता करीब 91.6 प्रतिशत थी, लेकिन सेरछिप जिले की साक्षरता 98.76 प्रतिशत पहुंच गई थी। यानी जिला अपने ही राज्य के औसत से लगभग सात प्रतिशत अंक आगे था।

दूसरी ओर तमिलनाडु का कन्याकुमारी जिला 91.75 प्रतिशत और नागालैंड का मोकोकचुंग 91.62 प्रतिशत पर पहुंचा।

इससे पता चलता है कि किसी राज्य की औसत साक्षरता के पीछे कुछ जिले असाधारण प्रदर्शन करते हैं।


क्या सिर्फ पढ़ना-लिखना ही साक्षरता है?

नहीं। जनगणना में साक्षरता का अर्थ व्यक्ति की पढ़ने-लिखने की क्षमता से है। लेकिन आज शिक्षा का अर्थ इससे कहीं व्यापक हो चुका है।

डिजिटल दुनिया में साक्षर व्यक्ति के लिए जरूरी है कि वह—

  • पढ़ और लिख सके,
  • जरूरी जानकारी समझ सके,
  • डिजिटल माध्यमों का सुरक्षित इस्तेमाल कर सके,
  • गलत सूचना और सही सूचना में अंतर कर सके,
  • आर्थिक और स्वास्थ्य संबंधी जरूरी जानकारी समझ सके।

इसलिए आने वाले वर्षों में डिजिटल साक्षरता भी उतनी ही महत्वपूर्ण होगी जितनी पारंपरिक साक्षरता।


निष्कर्ष: भारत की शिक्षा की असली तस्वीर

भारत की साक्षरता की कहानी सिर्फ केरल की कहानी नहीं है। मिजोरम का सेरछिप, केरल का पठानमथिट्टा, हिमाचल का हमीरपुर, तमिलनाडु का कन्याकुमारी और नागालैंड का मोकोकचुंग जैसे जिले बताते हैं कि देश के अलग-अलग हिस्सों में शिक्षा की अपनी-अपनी सफल कहानियां हैं।

2011 की जनगणना के आंकड़े भले पुराने हों, लेकिन वे यह समझने का महत्वपूर्ण आधार देते हैं कि किन राज्यों और जिलों ने शिक्षा को सामाजिक विकास का मजबूत आधार बनाया था।

नोट: ऊपर दिए गए राज्यवार आंकड़े 2011 की जनगणना पर आधारित हैं। अलग-अलग सरकारी प्रकाशनों में राउंडिंग अथवा अंतिम/प्रारंभिक तालिकाओं के कारण कुछ दरों में मामूली अंतर दिखाई दे सकता है। जिले के आंकड़े भी संबंधित जिला/जनगणना स्रोतों के अनुसार दिए गए हैं।

जमुना दयाल

जमुना दयाल वाराणसी के निवासी हैं और उन्हें हिंदी समाचार मीडिया में 10 से अधिक वर्षों का गहन रिपोर्टिंग अनुभव है। उन्होंने अमर उजाला और दैनिक जागरण जैसे देश के प्रतिष्ठित समाचार पत्रों में जिला रिपोर्टर के रूप में कार्य करते हुए खेल, शिक्षा, राजनीति, कृषि तथा सामाजिक मुद्दों को प्रमुखता से कवर किया है। शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो उन्होंने महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ से जनसंचार में परास्नातक (MJMC) की डिग्री प्राप्त की है और यूजीसी नेट (UGC NET) परीक्षा उत्तीर्ण की है।

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