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गोलगप्पा, पानीपूरी और पुचका: एक ही व्यंजन के इतने नाम क्यों? जानिए इसका दिलचस्प इतिहास और देशभर में मशहूर स्वाद

दिल्ली का गोलगप्पा हो, मुंबई की पानीपूरी या कोलकाता का पुचका, हर जगह इसका अंदाज अलग

भारत में खानपान की दुनिया बेहद रंगीन है। यहां हर शहर का अपना स्वाद है और हर इलाके की अपनी खास पहचान। लेकिन कुछ व्यंजन ऐसे हैं, जिन्होंने पूरे देश को एक सूत्र में बांध रखा है। गोलगप्पा भी ऐसा ही एक व्यंजन है। उत्तर भारत में गोलगप्पा, महाराष्ट्र में पानीपूरी, बंगाल में पुचका, ओडिशा में गुपचुप और कई दूसरे इलाकों में फुल्की या बताशा के नाम से पहचाने जाने वाला यह छोटा-सा नाश्ता करोड़ों लोगों की पसंद है।

सड़क किनारे खड़े ठेले पर जब दुकानदार एक के बाद एक कुरकुरी पूरियों में आलू-मसाला भरकर खट्टा-तीखा पानी डालता है तो लोगों के मुंह में पानी आ जाता है। कोई मीठा पानी पसंद करता है तो किसी को तीखा पानी चाहिए। कोई छह गोलगप्पे खाकर रुक जाता है तो कोई दर्जन भर खाने के बाद भी एक और मांगता है।

लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि गोलगप्पे का जन्म कहां हुआ? इसे सबसे पहले किसने बनाया? क्या इसका संबंध महाभारत काल से है? आखिर एक ही व्यंजन के अलग-अलग राज्यों में इतने नाम कैसे पड़ गए? आइए जानते हैं गोलगप्पे की पूरी कहानी।

गोलगप्पे का इतिहास: आखिर कहां से हुई शुरुआत?

गोलगप्पे की उत्पत्ति को लेकर आज भी इतिहासकारों और खानपान के जानकारों के बीच एक राय नहीं है। इसके आविष्कार की कोई प्रमाणित तारीख, निश्चित स्थान या किसी एक व्यक्ति का नाम ऐतिहासिक दस्तावेजों में दर्ज नहीं मिलता। इसलिए यह कहना मुश्किल है कि सबसे पहले गोलगप्पा किस शहर में बनाया गया था।

कुछ खाद्य इतिहास संबंधी विवरण इसके पुराने रूप को उत्तर भारत और प्राचीन मगध क्षेत्र की खानपान परंपरा से जोड़ते हैं। मगध वर्तमान बिहार का ऐतिहासिक क्षेत्र है। यहां से कई महत्वपूर्ण भारतीय खानपान परंपराओं का विकास हुआ।

एक प्रचलित मान्यता के अनुसार गोलगप्पे का पुराना रूप फुल्की हो सकता है। छोटी और कुरकुरी पूरियों को अलग-अलग मसालों के साथ खाने की परंपरा धीरे-धीरे विकसित हुई और बाद में इसमें आलू, चना, मटर तथा खट्टे-तीखे पानी का इस्तेमाल होने लगा।

खाद्य इतिहासकार पुष्पेश पंत के हवाले से प्रकाशित कुछ विवरणों में गोलगप्पे के आधुनिक रूप के उत्तर प्रदेश और बिहार में लगभग 100 से 125 वर्ष पहले लोकप्रिय होने की बात कही गई है। हालांकि, इसे गोलगप्पे के आविष्कार का प्रमाणित समय नहीं माना जा सकता।

महाभारत काल से जुड़ी है गोलगप्पे की कहानी, क्या है द्रौपदी वाला किस्सा

गोलगप्पे के इतिहास से जुड़ी एक बेहद रोचक कहानी महाभारत काल की भी सुनाई जाती है। इस कहानी का संबंध द्रौपदी और उनकी सास कुंती से जोड़ा जाता है।

लोककथा के अनुसार, जब द्रौपदी विवाह के बाद पांडवों के घर आईं तो उस समय परिवार कठिन परिस्थितियों से गुजर रहा था। कुंती ने द्रौपदी को थोड़े से आटे और बची हुई सब्जियों से पांचों पांडवों का पेट भरने के लिए भोजन तैयार करने को कहा।

द्रौपदी ने अपनी पाक कला और समझदारी से आटे की छोटी-छोटी पूरियां तैयार कीं और उनमें सब्जियों का मसाला भरकर एक नया व्यंजन बनाया। कुंती उनकी इस कला से प्रसन्न हुईं और उन्हें आशीर्वाद दिया।

भारत के अलग-अलग राज्यों में गोलगप्पे के अलग-अलग नाम

भारत की भाषाई और सांस्कृतिक विविधता गोलगप्पे के नामों में भी दिखाई देती है। एक ही व्यंजन अलग-अलग राज्यों में अलग पहचान रखता है।

राज्य/क्षेत्रप्रचलित नामखासियत
दिल्ली, हरियाणागोलगप्पातीखा और खट्टा पानी
महाराष्ट्रपानीपूरीरगड़ा, आलू और मीठी चटनी
पश्चिम बंगालपुचकामसालेदार आलू और इमली का पानी
ओडिशागुपचुपतीखा-खट्टा पानी
उत्तर प्रदेशबताशा, गोलगप्पा, फुल्कीपुदीना और इमली का पानी
बिहारफुल्की, पुचकाचना, आलू और मसाले
मध्य प्रदेशफुल्कीमसालेदार पानी और आलू
असमफुस्का, पुस्कास्थानीय मसालों वाला स्वाद

गोलगप्पे के पानी का भी है अपना विज्ञान

गोलगप्पे की असली पहचान उसकी पूरी के साथ-साथ उसके पानी में छिपी होती है। पानी का स्वाद ही तय करता है कि गोलगप्पा किस इलाके की पहचान बनेगा।

आमतौर पर गोलगप्पे का पानी तैयार करने के लिए पुदीना, धनिया, हरी मिर्च, अदरक, काला नमक, भुना जीरा, हींग, इमली और नींबू का इस्तेमाल किया जाता है।

कुछ दुकानदार इसमें जलजीरा और अमचूर भी मिलाते हैं। वहीं बंगाल के पुचका में इमली और मसालों का खट्टा स्वाद खास तौर पर पसंद किया जाता है।

आजकल बाजार में पांच से दस तरह के पानी वाले गोलगप्पे भी मिलते हैं। इनमें पुदीना पानी, हींग पानी, लहसुन पानी, नींबू पानी और मीठा इमली पानी प्रमुख हैं।

गोलगप्पे में आए नए प्रयोग, चॉकलेट से लेकर दही तक

समय के साथ गोलगप्पे का स्वाद भी बदलता गया। अब पारंपरिक गोलगप्पे के अलावा कई नए प्रयोग देखने को मिलते हैं।

  1. दही गोलगप्पा: इसमें दही, मीठी चटनी और मसाले डाले जाते हैं।
  2. चॉकलेट गोलगप्पा: इसमें चॉकलेट और मीठी फिलिंग का इस्तेमाल होता है।
  3. लहसुन गोलगप्पा: लहसुन के तीखे पानी के साथ परोसा जाता है।
  4. रगड़ा गोलगप्पा: इसमें सफेद मटर की मसालेदार सब्जी भरी जाती है।
  5. फ्रूट गोलगप्पा: इसमें फलों के छोटे टुकड़े और विशेष फ्लेवर का प्रयोग होता है।
  6. फ्लेवर्ड पानीपूरी: इसमें अलग-अलग स्वाद के पानी एक साथ परोसे जाते हैं।

इस तरह गोलगप्पा अब केवल सड़क किनारे मिलने वाला नाश्ता नहीं रहा, बल्कि बड़े रेस्तरां और फूड फेस्टिवल के मेन्यू का हिस्सा भी बन चुका है।

गोलगप्पा सिर्फ नाश्ता नहीं, भारतीय स्वाद की पहचान

गोलगप्पे की कहानी किसी एक शहर, राज्य या समुदाय तक सीमित नहीं है। इसके इतिहास में लोककथाएं हैं, क्षेत्रीय खानपान की परंपराएं हैं और बदलते समय के साथ विकसित होते स्वाद भी हैं।

दिल्ली का गोलगप्पा हो, मुंबई की पानीपूरी या कोलकाता का पुचका, हर जगह इसका अंदाज अलग है, लेकिन लोगों का प्यार एक जैसा है।

शायद यही भारतीय खानपान की सबसे बड़ी खूबी है कि एक छोटी-सी कुरकुरी पूरी भी देश की विविधता को अपने अंदर समेट सकती है।

जमुना दयाल

जमुना दयाल वाराणसी के निवासी हैं और उन्हें हिंदी समाचार मीडिया में 10 से अधिक वर्षों का गहन रिपोर्टिंग अनुभव है। उन्होंने अमर उजाला और दैनिक जागरण जैसे देश के प्रतिष्ठित समाचार पत्रों में जिला रिपोर्टर के रूप में कार्य करते हुए खेल, शिक्षा, राजनीति, कृषि तथा सामाजिक मुद्दों को प्रमुखता से कवर किया है। शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो उन्होंने महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ से जनसंचार में परास्नातक (MJMC) की डिग्री प्राप्त की है और यूजीसी नेट (UGC NET) परीक्षा उत्तीर्ण की है।

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