फ़ोर्ट सेंट जॉर्ज: वो किला जहाँ से ईस्ट इंडिया कंपनी ने भारत पर कसना शुरू किया था शिकंजा
चेन्नई की बंगाल की खाड़ी के किनारे खड़ी एक सफेद इमारत सिर्फ पत्थरों का ढांचा नहीं है—यह आधुनिक भारत के जन्म और दो सौ सालों की गुलामी की शुरुआती पटकथा की गवाह है।
व्यापार से राजकाज तक: 1639 की वो कहानी
17वीं शताब्दी की शुरुआत में जब ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी भारत में अपने पैर जमाने की कोशिश कर रही थी, तब उनका मुख्य ध्यान सूरत और पश्चिमी तट पर था। लेकिन कोरोमंडल तट (पूर्वी भारत) पर व्यापारिक नियंत्रण की जरूरत ने उन्हें मद्रासपट्टनम (आज का चेन्नई) पहुँचाया।
22 अगस्त 1639 को ईस्ट इंडिया कंपनी के प्रतिनिधि फ्रांसिस डे और उनके सहयोगी एंड्रयू कोगन ने स्थानीय नायक शासकों (विजयनगर साम्राज्य के सामंत) से जमीन का एक टुकड़ा पट्टे पर लिया। उद्देश्य साफ था—मसालों, सूती कपड़ों और नील के व्यापार के लिए एक सुरक्षित गोदाम बनाना। लेकिन सुरक्षा के नाम पर जो बनकर तैयार हुआ, उसने आगे चलकर पूरे भारतीय महाद्वीप की तकदीर बदल दी।
क्यों खास है ‘सेंट जॉर्ज’ नाम?
किले का निर्माण कार्य तेजी से शुरू हुआ और इसका पहला हिस्सा 23 अप्रैल 1640 को बनकर तैयार हुआ। चूँकि 23 अप्रैल इंग्लैंड के संरक्षक संत ‘सेंट जॉर्ज’ का पर्व दिवस (St. George’s Day) होता है, इसलिए इस किले का नाम फ़ोर्ट सेंट जॉर्ज रखा गया।
इस किले के निर्माण ने ही मद्रास शहर की नींव रखी। किले के भीतर का हिस्सा ‘व्हाइट टाउन’ कहलाया, जहाँ केवल यूरोपीय रहते थे, जबकि बाहर बसा इलाका ‘ब्लैक टाउन’ (आज का जॉर्ज टाउन) कहलाया, जहाँ स्थानीय भारतीय व्यापारी और कारीगर निवास करते थे।
किले के भीतर छिपे तीन अनमोल ऐतिहासिक रत्न
आज भी फ़ोर्ट सेंट जॉर्ज केवल एक ऐतिहासिक स्थल नहीं है, बल्कि तमिलनाडु सरकार और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) का एक महत्वपूर्ण केंद्र है। इसके भीतर तीन प्रमुख ऐतिहासिक स्थल आकर्षण का केंद्र हैं:
- सेंट मेरी चर्च (St. Mary’s Church):
- 1680 में बनकर तैयार हुआ यह चर्च भारत में अंग्रेजों द्वारा बनाया गया सबसे पुराना एंग्लिकन चर्च है।
- इसे ‘पूर्व का वेस्टमिंस्टर एब्बे’ भी कहा जाता है।
- रॉबर्ट क्लाइव (जिसने प्लासी के युद्ध में भारत में अंग्रेजी राज की नींव पक्की की) की शादी इसी चर्च में हुई थी।
- फ़ोर्ट म्यूज़ियम (Fort Museum):
- किले परिसर के भीतर स्थित यह संग्रहालय ईस्ट इंडिया कंपनी और ब्रिटिश शासन के दौर की यादों का खजाना है।
- यहाँ अंग्रेजों के ज़माने के सिक्के, हथियार, पदक, वर्दी और उस दौर की दुर्लभ तस्वीरें रखी हैं।
- सबसे खास बात: यहाँ भारत का पहला तिरंगा झंडा भी सुरक्षित रखा गया है, जिसे 15 अगस्त 1947 को लाल किले पर फहराए गए झंडों के साथ तैयार किया गया था।
- क्लाइव हाउस (Clive House):
- यह इमारत कभी रॉबर्ट क्लाइव का निवास स्थान हुआ करती थी। इसकी वास्तुकला उस दौर की भव्यता को दर्शाती है।
भारतीय राजनीति का आज भी दिल है यह किला
बहुत कम लोग जानते हैं कि यह 380 साल से भी ज्यादा पुराना किला आज भी एक जीवंत प्रशासनिक केंद्र है। वर्तमान में तमिलनाडु राज्य की विधानसभा और सचिवालय इसी फ़ोर्ट सेंट जॉर्ज परिसर से संचालित होते हैं।
जिस किले से कभी अंग्रेजों ने मद्रास प्रेसीडेंसी पर हुकूमत चलाई थी, आज उसी किले की दीवारों के बीच से तमिलनाडु के लोकतांत्रिक निर्णय लिए जाते हैं।



