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भारत के रहस्यमयी हनुमान मंदिर, कहीं उल्टी तो कहीं लेटी हुई है बजरंगबली की प्रतिमा

कहीं मूंछों वाले हनुमान तो कहीं बिना छत के विराजमान हैं बजरंगबली, हर मंदिर से जुड़ी है अनोखी मान्यता और रोचक कहानी

भारत में भगवान हनुमान के हजारों मंदिर हैं। इनमें कई मंदिर ऐसे भी हैं, जिनकी बनावट, प्रतिमा और उनसे जुड़ी मान्यताएं उन्हें खास बनाती हैं। कहीं हनुमान जी की प्रतिमा उल्टी दिखाई देती है, तो कहीं वे लेटी हुई मुद्रा में विराजमान हैं। किसी मंदिर में बजरंगबली की मूंछें उनकी पहचान हैं, तो किसी मंदिर की ऊंची पहाड़ी पर स्थापित विशाल प्रतिमा श्रद्धालुओं को आकर्षित करती है। इन मंदिरों से जुड़ी कई कहानियां रामायण, स्थानीय लोककथाओं और सदियों पुरानी धार्मिक मान्यताओं से जुड़ी हैं। आइए जानते हैं देश के सात ऐसे हनुमान मंदिरों के बारे में, जिनकी विशेषताएं इन्हें दूसरे मंदिरों से अलग बनाती हैं।

उल्टे हनुमान मंदिर, मध्य प्रदेश

मध्य प्रदेश के इंदौर के पास सांवेर में स्थित उल्टे हनुमान मंदिर अपनी अनोखी प्रतिमा के लिए प्रसिद्ध है। यहां हनुमान जी की प्रतिमा उल्टी मुद्रा में दिखाई देती है। इसी वजह से मंदिर को उल्टे हनुमान मंदिर के नाम से जाना जाता है।

स्थानीय मान्यता के अनुसार, इस मंदिर का संबंध रामायण की उस कथा से जोड़ा जाता है, जिसमें भगवान राम और लक्ष्मण को अहिरावण पाताल लोक ले गया था। मान्यता है कि हनुमान जी ने पाताल लोक में पहुंचकर भगवान राम और लक्ष्मण को मुक्त कराया था। मंदिर में स्थापित प्रतिमा को इसी प्रसंग से जोड़कर देखा जाता है।

श्रद्धालुओं का विश्वास है कि यहां पूजा करने से जीवन की परेशानियों से मुक्ति मिलती है। हालांकि, ये मान्यताएं धार्मिक परंपराओं पर आधारित हैं।

बड़े हनुमान मंदिर, प्रयागराज

उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में संगम के पास स्थित बड़े हनुमान मंदिर अपनी लेटी हुई प्रतिमा के कारण देशभर में प्रसिद्ध है। यहां बजरंगबली की लगभग 20 फीट लंबी प्रतिमा जमीन के नीचे बने गर्भगृह में विराजमान है। इसे लेटे हुए हनुमान जी के नाम से भी जाना जाता है।

इस मंदिर की खास बात यह है कि यहां हनुमान जी की पूजा खड़ी या बैठी हुई प्रतिमा के बजाय लेटी हुई मुद्रा में की जाती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, भगवान राम की सेवा करने के बाद हनुमान जी ने यहां विश्राम किया था। एक अन्य लोकमान्यता के अनुसार, गंगा का जल बढ़ने पर नदी हनुमान जी की प्रतिमा को स्पर्श करती है।

श्रद्धालु इसे आस्था का विशेष संकेत मानते हैं। हनुमान जयंती और अन्य धार्मिक अवसरों पर यहां बड़ी संख्या में भक्त पहुंचते हैं।

मेहंदीपुर बालाजी मंदिर, राजस्थान

राजस्थान के दौसा जिले में स्थित मेहंदीपुर बालाजी मंदिर देश के प्रसिद्ध हनुमान मंदिरों में गिना जाता है। यहां हनुमान जी को बालाजी के नाम से पूजा जाता है। मंदिर की पहचान विशेष धार्मिक अनुष्ठानों और पुरानी परंपराओं से जुड़ी है।

इस मंदिर में श्रद्धालु अपनी परेशानियों से मुक्ति की कामना लेकर आते हैं। यहां कुछ लोग बुरी शक्तियों से मुक्ति मिलने की धार्मिक मान्यता के कारण भी दर्शन करने पहुंचते हैं। मंदिर में पूजा-पाठ और अन्य धार्मिक परंपराओं का पालन किया जाता है।

मेहंदीपुर बालाजी मंदिर को लेकर कई तरह की कहानियां प्रचलित हैं। इन कहानियों और चमत्कारों से जुड़े दावों को धार्मिक विश्वास के रूप में ही देखना चाहिए। मंदिर की प्रसिद्धि का बड़ा कारण यहां की विशिष्ट पूजा पद्धति और लोगों की गहरी आस्था है।

सालासर बालाजी मंदिर, राजस्थान

राजस्थान के चूरू जिले में स्थित सालासर बालाजी मंदिर हनुमान भक्तों के प्रमुख तीर्थस्थलों में शामिल है। यहां हनुमान जी की प्रतिमा की खास पहचान उनकी दाढ़ी और मूंछों वाली आकृति है। यह स्वरूप सामान्य हनुमान प्रतिमाओं से अलग दिखाई देता है।

मंदिर से जुड़ी मान्यता के अनुसार, सालासर में बालाजी की प्रतिमा मिलने के बाद यहां पूजा की परंपरा शुरू हुई। समय के साथ यह स्थान बड़े धार्मिक केंद्र के रूप में विकसित हुआ। देश के अलग-अलग हिस्सों से श्रद्धालु यहां दर्शन करने आते हैं।

हनुमान जयंती और अन्य धार्मिक अवसरों पर मंदिर में विशेष आयोजन होते हैं। भक्त अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए यहां अर्जी लगाते हैं। दाढ़ी-मूंछों वाले बालाजी का स्वरूप इस मंदिर को देश के अन्य हनुमान मंदिरों से अलग पहचान देता है।

जाखू मंदिर, हिमाचल प्रदेश

हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में जाखू पहाड़ी पर स्थित जाखू मंदिर भगवान हनुमान को समर्पित है। ऊंचाई पर स्थित यह मंदिर धार्मिक आस्था के साथ-साथ प्राकृतिक सुंदरता के लिए भी जाना जाता है।

रामायण की प्रचलित कथा के अनुसार, लक्ष्मण जी के लिए संजीवनी बूटी लाने जाते समय हनुमान जी का संबंध इस पहाड़ी से जोड़ा जाता है। इसी मान्यता के कारण यहां हनुमान मंदिर की विशेष प्रतिष्ठा है।

मंदिर परिसर के पास स्थापित हनुमान जी की विशाल प्रतिमा दूर से ही दिखाई देती है। पहाड़ी पर पहुंचने वाले श्रद्धालुओं को शिमला और आसपास के पहाड़ी इलाकों का सुंदर दृश्य भी देखने को मिलता है। यहां धार्मिक यात्रा के साथ पर्यटन का अनुभव भी मिलता है।

संकटमोचन हनुमान मंदिर, वाराणसी

उत्तर प्रदेश के वाराणसी में स्थित संकटमोचन हनुमान मंदिर देश के प्रमुख हनुमान मंदिरों में शामिल है। इस मंदिर को गोस्वामी तुलसीदास से जुड़ी परंपराओं के लिए भी जाना जाता है। मान्यता है कि तुलसीदास जी को इसी स्थान पर हनुमान जी के दर्शन हुए थे और बाद में यहां मंदिर की स्थापना हुई।

संकटमोचन मंदिर में हनुमान जी के दर्शन के लिए हर दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। भक्त यहां सिंदूर और लड्डू चढ़ाते हैं तथा जीवन के संकट दूर होने की प्रार्थना करते हैं।

मंदिर में हनुमान जयंती के अवसर पर विशेष आयोजन होते हैं। वाराणसी की धार्मिक पहचान में इस मंदिर का खास स्थान है। यहां आने वाले श्रद्धालुओं के लिए यह केवल पूजा का स्थान नहीं, बल्कि आस्था और विश्वास का प्रमुख केंद्र भी है।

नमक्कल अंजनेयार मंदिर, तमिलनाडु

तमिलनाडु के नमक्कल में स्थित अंजनेयार मंदिर भगवान हनुमान की विशाल प्रतिमा के लिए प्रसिद्ध है। यहां हनुमान जी की लगभग 18 फीट ऊंची प्रतिमा स्थापित है। प्रतिमा खुले स्थान में स्थित है और इसके ऊपर सामान्य मंदिरों की तरह छत नहीं है।

दक्षिण भारत में हनुमान जी को अंजनेयार के नाम से भी जाना जाता है। इस मंदिर में उनकी विशाल प्रतिमा श्रद्धालुओं के आकर्षण का प्रमुख केंद्र है। भक्त यहां पूजा-अर्चना कर सुख, शांति और संकटों से मुक्ति की कामना करते हैं।

मंदिर की खुली संरचना और विशाल प्रतिमा इसे विशेष पहचान देती है। यहां दर्शन करने के लिए तमिलनाडु के अलावा दूसरे राज्यों से भी श्रद्धालु पहुंचते हैं।

क्यों खास हैं ये हनुमान मंदिर?

भारत के इन मंदिरों की विशेषता केवल इनकी प्रतिमाओं की बनावट नहीं है। हर मंदिर के साथ कोई न कोई स्थानीय कथा, धार्मिक परंपरा या ऐतिहासिक मान्यता जुड़ी हुई है। कहीं उल्टी प्रतिमा लोगों को आकर्षित करती है, तो कहीं लेटी हुई मुद्रा और विशाल आकार श्रद्धालुओं के लिए कौतूहल का विषय बनता है।

इन मंदिरों से जुड़ी कहानियां पीढ़ियों से सुनाई जाती रही हैं। यही वजह है कि ये धार्मिक स्थलों के साथ-साथ भारत की सांस्कृतिक विरासत का भी हिस्सा हैं। हालांकि, चमत्कारों से जुड़े दावों को प्रमाणित तथ्य के बजाय आस्था और लोकमान्यता के रूप में समझना जरूरी है।

आस्था, परंपरा और अनोखी बनावट का संगम इन हनुमान मंदिरों को खास बनाता है। यही कारण है कि देश के अलग-अलग हिस्सों में स्थित इन मंदिरों को देखने और बजरंगबली के दर्शन करने के लिए श्रद्धालु दूर-दूर से पहुंचते हैं।

जमुना दयाल

जमुना दयाल वाराणसी के निवासी हैं और उन्हें हिंदी समाचार मीडिया में 10 से अधिक वर्षों का गहन रिपोर्टिंग अनुभव है। उन्होंने अमर उजाला और दैनिक जागरण जैसे देश के प्रतिष्ठित समाचार पत्रों में जिला रिपोर्टर के रूप में कार्य करते हुए खेल, शिक्षा, राजनीति, कृषि तथा सामाजिक मुद्दों को प्रमुखता से कवर किया है। शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो उन्होंने महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ से जनसंचार में परास्नातक (MJMC) की डिग्री प्राप्त की है और यूजीसी नेट (UGC NET) परीक्षा उत्तीर्ण की है।

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