लोकटक झील: पानी पर तैरते हैं गांव, जमीन की तरह चलते हैं ‘फुमदी’… जानिए मणिपुर की इस अनोखी झील के रहस्य
लोकटक प्रकृति की उस व्यवस्था में है जहां पानी पर वनस्पति, मिट्टी और जैविक पदार्थ से बने विशाल फुमदी तैरते हैं और उन्हीं के बीच इंसान, मछलियां, पक्षी और संगाई हिरण अपना जीवन जीते हैं।

मणिपुर की लोकटक झील सिर्फ एक झील नहीं, बल्कि पानी के बीच तैरती दुनिया है। यहां घास, मिट्टी और जैविक पदार्थ से बने ‘फुमदी’ पानी पर तैरते दिखाई देते हैं। इन्हीं पर स्थानीय लोग अपने घर और मछली पकड़ने के ठिकाने बनाते हैं। इसी झील में दुनिया का एकमात्र तैरता राष्ट्रीय उद्यान भी है, जहां दुर्लभ संगाई हिरण पाया जाता है। यही वजह है कि लोकटक को प्राकृतिक रहस्य, स्थानीय जीवन और जैव विविधता का अनोखा संगम माना जाता है।
1. आखिर क्यों खास है लोकटक झील?
लोकटक झील मणिपुर के बिष्णुपुर जिले में स्थित है और इंफाल से करीब 48 किलोमीटर दूर है। मणिपुर पर्यटन विभाग इसे पूर्वोत्तर भारत की सबसे बड़ी मीठे पानी की झील बताता है। झील का फैलाव इतना बड़ा है कि कई जगह यह छोटी अंतर्देशीय समुद्र जैसी दिखाई देती है।
लेकिन लोकटक की असली पहचान इसके पानी से ज्यादा पानी पर तैरती संरचनाओं से है।
2. पानी पर तैरते हैं ‘फुमदी’
लोकटक का सबसे बड़ा रहस्य और आकर्षण फुमदी हैं। ये वनस्पतियों, मिट्टी और जैविक पदार्थ से बने मोटे तैरते हुए समूह होते हैं। हवा और पानी के साथ इनके हिस्से अपनी स्थिति बदल सकते हैं।
रैमसर के रिकॉर्ड में भी फुमदी को लोकटक झील की विशिष्ट विशेषता बताया गया है।
दूर से देखने पर ऐसा लगता है जैसे झील में छोटे-छोटे द्वीप तैर रहे हों।
3. इन तैरते द्वीपों पर बसती है जिंदगी
लोकटक की खासियत केवल यह नहीं कि यहां फुमदी तैरते हैं। इन पर लोगों का जीवन भी जुड़ा हुआ है।
मणिपुर पर्यटन के अनुसार झील के मछुआरे फुमदी पर बने तैरते घरों, जिन्हें फुमसांग कहा जाता है, में रहते हैं। मछली पकड़ना और झील से जुड़े दूसरे काम स्थानीय अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।
यानी यहां पानी के बीच सिर्फ प्रकृति नहीं, बल्कि इंसानों की भी एक अलग दुनिया दिखाई देती है।
4. दुनिया का एकमात्र तैरता राष्ट्रीय उद्यान
लोकटक झील का सबसे बड़ा वैश्विक आकर्षण केइबुल लामजाओ राष्ट्रीय उद्यान है।
मणिपुर पर्यटन इसे दुनिया का एकमात्र तैरता राष्ट्रीय उद्यान बताता है। यह भी फुमदी से बने उस अनोखे आर्द्रभूमि तंत्र का हिस्सा है।
यहां जमीन और पानी की सीमाएं सामान्य जंगलों जैसी नहीं हैं। वनस्पति से बनी तैरती सतह ही कई जगह वन्यजीवों के लिए आधार तैयार करती है।
5. संगाई हिरण का आखिरी प्राकृतिक घर

केइबुल लामजाओ राष्ट्रीय उद्यान संगाई हिरण के लिए सबसे ज्यादा प्रसिद्ध है। इसे मणिपुर का ‘डांसिंग डियर’ भी कहा जाता है।
मणिपुर पर्यटन के अनुसार यह दुर्लभ हिरण इसी क्षेत्र में प्राकृतिक रूप से पाया जाता है। फुमदी वाला अनोखा पर्यावरण संगाई के जीवन से सीधे जुड़ा हुआ है।
यही वजह है कि लोकटक झील का संरक्षण केवल पानी और मछलियों के लिए ही नहीं, बल्कि संगाई के अस्तित्व के लिए भी महत्वपूर्ण है।
6. झील के बीच मछुआरों की अलग दुनिया
लोकटक में नावें सिर्फ घूमने के लिए इस्तेमाल नहीं होतीं। यहां कई परिवारों की रोजमर्रा की जिंदगी झील से जुड़ी है।
नावों से मछली पकड़ना, फुमदी के बीच रास्ता बनाकर आगे बढ़ना और पानी पर बने ठिकानों तक पहुंचना यहां के जीवन का हिस्सा है।
इसी वजह से लोकटक को केवल पर्यटन स्थल के रूप में देखना इसके वास्तविक महत्व को छोटा कर देता है।
7. झील का पानी मणिपुर के लिए कितना महत्वपूर्ण है?
लोकटक झील का महत्व पर्यावरण तक सीमित नहीं है। रैमसर के अनुसार यह झील सिंचाई, पेयजल और जलविद्युत उत्पादन से जुड़ी है तथा आसपास रहने वाले लोगों की आजीविका में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। यह मानसून के दौरान बाढ़ के प्रभाव को कम करने में भी योगदान देती है।
यानी लोकटक मणिपुर के प्राकृतिक और आर्थिक जीवन दोनों का अहम हिस्सा है।
8. लोकटक के सामने पर्यावरणीय चुनौती
लोकटक की खूबसूरती के पीछे एक गंभीर पर्यावरणीय चुनौती भी है। रैमसर के दस्तावेजों में जल-कुंभी, प्रदूषण, गाद जमने और जलग्रहण क्षेत्र में वनों की कमी जैसी समस्याओं का उल्लेख किया गया है। इनसे झील के पारिस्थितिकी तंत्र पर दबाव पड़ा है।
इसलिए लोकटक का रहस्य केवल इसके तैरते द्वीप नहीं हैं। असली सवाल यह भी है कि आने वाली पीढ़ियों के लिए इस अनोखी झील और उसके फुमदी तंत्र को कैसे बचाया जाए।
9. लोकटक और रैमसर साइट का दर्जा
लोकटक झील को 23 मार्च 1990 को अंतरराष्ट्रीय महत्व की आर्द्रभूमि यानी रैमसर साइट के रूप में शामिल किया गया। रैमसर रिकॉर्ड में इसका क्षेत्रफल 26,600 हेक्टेयर दर्ज है।
इस अंतरराष्ट्रीय पहचान ने लोकटक को भारत ही नहीं, बल्कि दुनिया की महत्वपूर्ण आर्द्रभूमियों में शामिल कर दिया।
10. यहां से दिखता है पानी पर तैरता पूरा संसार
लोकटक को देखने के लिए सेंद्रा प्रमुख स्थानों में है। मणिपुर पर्यटन के अनुसार यहां से झील का ऊंचाई से व्यापक दृश्य देखा जा सकता है। आसपास के तैरते फुमदी, नावें और झील के बीच बने छोटे-छोटे ठिकाने इसे बेहद अनोखा दृश्य देते हैं।
नाव की सवारी के जरिए झील को करीब से देखने का अनुभव भी लिया जा सकता है।
11. लोकटक के आसपास इतिहास भी सांस लेता है
लोकटक की यात्रा केवल प्राकृतिक सुंदरता तक सीमित नहीं है। पास के मोइरांग का भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण स्थान है।
मणिपुर पर्यटन के अनुसार 14 अप्रैल 1944 को मोइरांग में भारतीय राष्ट्रीय सेना का झंडा फहराया गया था। यहां INA संग्रहालय भी है, जहां स्वतंत्रता संग्राम से जुड़ी वस्तुएं रखी गई हैं।
इस तरह लोकटक क्षेत्र में प्रकृति के साथ इतिहास की एक दूसरी कहानी भी दिखाई देती है।
12. लोकटक का सबसे बड़ा रहस्य
लोकटक का रहस्य किसी भूत या अलौकिक घटना में नहीं, बल्कि प्रकृति की उस व्यवस्था में है जहां पानी पर वनस्पति, मिट्टी और जैविक पदार्थ से बने विशाल फुमदी तैरते हैं और उन्हीं के बीच इंसान, मछलियां, पक्षी और संगाई हिरण अपना जीवन जीते हैं।
दुनिया में तैरते हुए कई प्राकृतिक वनस्पति समूह मिलते हैं, लेकिन लोकटक का फुमदी तंत्र और उसके भीतर मौजूद तैरता राष्ट्रीय उद्यान इसे बेहद विशिष्ट बनाता है।
रहस्यमयी और रोचक तथ्य
- लोकटक पूर्वोत्तर भारत की सबसे बड़ी मीठे पानी की झील है।
- यहां के फुमदी मिट्टी, वनस्पति और जैविक पदार्थ से बने तैरते समूह हैं।
- झील पर फुमसांग नामक तैरते घरों में मछुआरे रहते हैं।
- इसी झील में केइबुल लामजाओ राष्ट्रीय उद्यान स्थित है, जिसे मणिपुर पर्यटन दुनिया का एकमात्र तैरता राष्ट्रीय उद्यान बताता है।
- दुर्लभ संगाई हिरण का प्राकृतिक आवास इसी क्षेत्र में है।
- लोकटक को 1990 में रैमसर साइट का दर्जा मिला।
- झील मछली, सिंचाई, पेयजल और जलविद्युत जैसे कई क्षेत्रों से जुड़ी है।



