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आयुर्वेदिक चारे से हर्बल अंडे, बदल रही अंडे की तस्वीर

भोपाल के ईंटखेड़ी गांव के आदित्य गुप्ता ने मुर्गियों के दाने में 250 से ज्यादा जड़ी-बूटियां मिलाकर तैयार किया खास फीड, पेटेंट के बाद हर्बल अंडों ने बनाई अलग पहचान

अंडा शाकाहारी है या मांसाहारी? भारत में यह सवाल लंबे समय से बहस का विषय रहा है। लेकिन भोपाल के एक पोल्ट्री उद्यमी ने इस बहस को एक अलग दिशा दे दी। कंप्यूटर साइंस की पढ़ाई करने वाले आदित्य किशोर गुप्ता ने मुर्गियों के लिए जड़ी-बूटियों से तैयार खास फीड विकसित किया। उनका दावा है कि इससे मिलने वाले अंडों में पोषण संबंधी कुछ गुण सामान्य अंडों से अलग होते हैं। उनकी फार्म की कहानी अब “हर्बल एग” के नए बाजार से जुड़ गई है।


किसान का नाम, गांव और राज्य

नाम: आदित्य किशोर गुप्ता
गांव: ईंटखेड़ी
जिला: भोपाल
राज्य: मध्य प्रदेश
ब्रांड: Eggs & Eggs / Aditya Poultry Farm

ईंटखेड़ी गांव भोपाल एयरपोर्ट से करीब 20 मिनट की दूरी पर है। यहां गुप्ता के पोल्ट्री फार्म में करीब 6,000 मुर्गियों का झुंड है।

लेकिन आदित्य की कहानी केवल एक किसान की कहानी नहीं है। वह कंप्यूटर इंजीनियर हैं और परिवार के पोल्ट्री कारोबार में आने से पहले उन्होंने इस क्षेत्र में प्रशिक्षण भी लिया था। बाद में उन्होंने मुर्गियों की बीमारी और मृत्यु दर को कम करने के लिए अलग तरह के फीड पर प्रयोग शुरू किए।


कैंसर की बीमारी बनी नई खोज की वजह

आदित्य गुप्ता के जीवन में 2018 एक बड़ा मोड़ लेकर आया। उन्हें कैंसर का पता चला। इलाज के दौरान उन्हें अपने खान-पान और स्वास्थ्य को लेकर गंभीरता से सोचने का मौका मिला।

इसी दौरान उन्होंने आयुर्वेद और जड़ी-बूटियों पर अध्ययन शुरू किया। दूसरी तरफ अपने पोल्ट्री फार्म में मुर्गियों की बीमारी और मृत्यु को लेकर भी वह प्रयोग कर रहे थे।

उनका कहना था कि जब कोई मुर्गी मरती थी तो उसका पोस्टमार्टम कराया जाता था ताकि बीमारी का कारण समझा जा सके। इसी प्रयोग के दौरान उन्होंने अलग-अलग बीमारियों और परिस्थितियों में अलग-अलग जड़ी-बूटियों को फीड में मिलाकर देखना शुरू किया।

करीब तीन साल के प्रयोगों के बाद उन्होंने अपने खास पोल्ट्री फीड के लिए पेटेंट आवेदन किया। जून 2024 में भारतीय पेटेंट कार्यालय से उनके हर्बल पोल्ट्री फीड कंपोजिशन को पेटेंट मिलने की जानकारी प्रकाशित हुई।


मुर्गियों को क्या खिलाते हैं?

आदित्य के मुताबिक उनके फीड में 250 से ज्यादा तरह की जड़ी-बूटियां इस्तेमाल होती हैं। हालांकि उन्होंने पूरी सामग्री सार्वजनिक नहीं की है, क्योंकि इसे अपने व्यवसाय का ट्रेड सीक्रेट बताते हैं।

रिपोर्टों में जिन प्रमुख चीजों के नाम सामने आए हैं, उनमें शामिल हैं—

  • तुलसी
  • हल्दी
  • अश्वगंधा
  • अजवायन जैसी जड़ी-बूटियां
  • पार्सले
  • थाइम
  • स्पिरुलिना
  • बेसिल
  • सेज
  • पुदीना

इनके अलावा कई अन्य वनस्पतियां और हर्बल सामग्री भी फीड में शामिल होने की बात कही गई है।


आखिर बनता कैसे है हर्बल अंडा?

इसमें अंडे को बाद में किसी दवा या जड़ी-बूटी में डुबोया नहीं जाता।

पूरी प्रक्रिया मुर्गी के आहार से शुरू होती है।

पहला चरण—विशेष फीड

अनाज आधारित पोल्ट्री फीड में निर्धारित मात्रा में हर्बल सामग्री मिलाई जाती है।

दूसरा चरण—मुर्गियों को खिलाना

मुर्गियों को यही विशेष आहार नियमित रूप से दिया जाता है।

तीसरा चरण—अंडे का उत्पादन

मुर्गी के शरीर में पोषण संबंधी बदलावों के बाद अंडे की पोषण संरचना में भी कुछ परिवर्तन हो सकते हैं। यही सिद्धांत “डिजाइनर” या “वैल्यू-एडेड” अंडों के पीछे है।

चौथा चरण—अंडों की बिक्री

आदित्य का ब्रांड Eggs & Eggs भोपाल में हर्बल अंडों की बिक्री करता है। 2025 की रिपोर्ट के अनुसार इनके ग्राहक करीब 10,000 तक बताए गए थे और अंडे लगभग 9 रुपये प्रति अंडे की कीमत पर बेचे जा रहे थे।


अंडे में ओमेगा-3 और दूसरे पोषक तत्व

आदित्य गुप्ता का दावा है कि उनके फीड से तैयार अंडों में कम कोलेस्ट्रॉल और अधिक ओमेगा-3 तथा ओमेगा-7 जैसे गुण प्राप्त होते हैं। उनके फीड को इसी तरह के दावों के साथ पेटेंट भी मिला है।

पोषण विशेषज्ञों के अनुसार मुर्गियों के आहार में बदलाव से अंडे की पोषण संरचना में कुछ बदलाव संभव हैं। उदाहरण के लिए अलसी जैसे स्रोतों से अंडे में ओमेगा-3 बढ़ाया जा सकता है। लेकिन हर्बल अंडों के स्वास्थ्य लाभों पर बड़े स्तर के वैज्ञानिक अध्ययन अभी सीमित हैं।

इसलिए इसे “इलाज करने वाला अंडा” या “हर बीमारी से बचाने वाला अंडा” कहना उचित नहीं होगा।


क्या यह अंडा शाकाहारी है?

मुर्गी को शाकाहारी या हर्बल फीड खिलाने से अंडे की जैविक प्रकृति नहीं बदल जाती। “हर्बल अंडा” और “शाकाहारी अंडा” एक ही बात नहीं हैं।

अंडा निषेचित है या नहीं, यह उसकी जैविक स्थिति से जुड़ा प्रश्न है। वहीं किसी व्यक्ति के लिए अंडा शाकाहारी है या मांसाहारी, यह काफी हद तक उसकी धार्मिक, सांस्कृतिक और व्यक्तिगत आहार मान्यता पर निर्भर करता है।

राष्ट्रीय अंडा समन्वय समिति से जुड़े एक अधिकारी ने भी कहा है कि सामान्य टेबल एग निषेचित नहीं होता और उनके विचार में इसे शाकाहारी माना जा सकता है।


6,000 मुर्गियों से शुरू हुई अलग पहचान

ईंटखेड़ी स्थित फार्म में करीब 6,000 मुर्गियों का उल्लेख 2025 की रिपोर्ट में मिलता है। सुबह होते ही मुर्गियों के लिए विशेष फीड तैयार किया जाता है और सामान्य दाने के साथ हर्बल मिश्रण दिया जाता है।

यानी यहां खेती का पारंपरिक मॉडल थोड़ा बदल गया है।

जमीन पर फसल उगाने के बजाय किसान ने मुर्गियों के आहार को ही उत्पाद की पहचान बना दिया।


पत्नी ने संभाला कारोबार का दूसरा मोर्चा

आदित्य की पत्नी दिशा गुप्ता ने भी इस प्रयोग को कारोबार में बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

जब आदित्य इलाज के दौर से गुजर रहे थे, तब दिशा ने कारोबार का बैकएंड संभाला। बाद में उन्होंने हर्बल अंडों की मार्केटिंग और वितरण पर ध्यान दिया। कोविड के दौरान जब कर्मचारियों की उपलब्धता कम थी, तब दोनों ने खुद अस्पतालों तक अंडे पहुंचाने का काम किया।

यही वह दौर था जब हर्बल अंडों की पहचान स्वास्थ्य और प्रोटीन से जुड़े उत्पाद के रूप में बनने लगी।


क्या हर्बल अंडे से एलर्जी खत्म हो जाती है?

आदित्य गुप्ता ने एलर्जी वाले लोगों के लिए अलग तरह के अंडे पर भी काम किया है। 2025 की रिपोर्ट के अनुसार उनके द्वारा विकसित बताए गए हाइपोएलर्जेनिक अंडों के मानव परीक्षण पूरे होने का दावा सामने आया था।

लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हर अंडा एलर्जी वाले व्यक्ति के लिए सुरक्षित है।

अंडे से एलर्जी वाले व्यक्ति को डॉक्टर की सलाह के बिना किसी नए “हर्बल” या “हाइपोएलर्जेनिक” अंडे को उपचार के विकल्प के रूप में नहीं अपनाना चाहिए।


हर्बल अंडे से आगे बढ़ी अंडे की दुनिया

हर्बल अंडे की चर्चा के बीच अंडे का बाजार भी तेजी से बदल रहा है। अब ग्राहक को सिर्फ सामान्य अंडा ही नहीं, बल्कि ओमेगा-3, सेलेनियम, विटामिन और दूसरे पोषक तत्वों से भरपूर “वैल्यू-एडेड” या “डिजाइनर अंडे” भी मिल रहे हैं।

इन अंडों की खासियत यह है कि अंडे को बाहर से कोई दवा या पाउडर लगाकर पौष्टिक नहीं बनाया जाता। आमतौर पर मुर्गी के आहार में खास पोषक तत्व या उनके स्रोत शामिल किए जाते हैं, जिससे अंडे की पोषण संरचना में बदलाव आता है। ICAR के अनुसार पोषण संबंधी हस्तक्षेप के जरिए अंडे की संरचना को बदलकर ऐसे “डिजाइनर एग” तैयार किए जा सकते हैं।


ओमेगा-3 अंडा: दिल की सेहत से जुड़ा प्रीमियम अंडा

वैल्यू-एडेड अंडों में ओमेगा-3 एग सबसे ज्यादा चर्चित श्रेणियों में से एक है।

सामान्य अंडे में भी कुछ ओमेगा-3 फैटी एसिड मौजूद होते हैं, लेकिन मुर्गी के आहार में अलसी, कुछ वनस्पति तेल, माइक्रोएल्गी या अन्य ओमेगा-3 स्रोत शामिल करने से अंडे में ओमेगा-3 की मात्रा बढ़ाई जा सकती है। शोध में मुर्गियों के आहार में अलसी और अन्य स्रोतों के इस्तेमाल से अंडे में ALA और DHA जैसे ओमेगा-3 फैटी एसिड बढ़ने की पुष्टि हुई है।

कैसे बनता है?

मुर्गियों के नियमित फीड में ओमेगा-3 से भरपूर सामग्री मिलाई जाती है। ICAR से जुड़े एक मॉडल में ओमेगा-3 समृद्ध फीड मिश्रण का इस्तेमाल करके प्रति अंडे में करीब 200±20 मिलीग्राम ओमेगा-3 (ALA+DHA) का लक्ष्य बताया गया है।

यानी किसान अंडे को बाद में बदलने के बजाय मुर्गी के आहार के स्तर पर ही उसकी पोषण संरचना में बदलाव करता है।

इसे कौन खरीदता है?

ऐसे अंडे आमतौर पर वे उपभोक्ता पसंद करते हैं जो अपने भोजन में ओमेगा-3 बढ़ाना चाहते हैं, खासकर वे लोग जो मछली या अन्य ओमेगा-3 स्रोत कम खाते हैं।

लेकिन ध्यान रहे: ओमेगा-3 अंडा कोई दवा नहीं है और इसे किसी बीमारी के इलाज के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।


सेलेनियम युक्त अंडा: छोटा पोषक तत्व, बड़ी भूमिका

दूसरी महत्वपूर्ण श्रेणी है सेलेनियम-फोर्टिफाइड एग

सेलेनियम शरीर के लिए आवश्यक सूक्ष्म पोषक तत्व है। यह कई एंटीऑक्सीडेंट एंजाइमों की कार्यप्रणाली में भूमिका निभाता है।

मुर्गी के आहार में सेलेनियम की मात्रा और उसका स्रोत बदलकर अंडे में सेलेनियम की मात्रा बढ़ाई जा सकती है। शोध में सेलेनियम, विटामिन ई और अन्य पोषक तत्वों के साथ अंडों को समृद्ध करने के प्रयोग किए गए हैं।

अंडे में पहुंचता कैसे है सेलेनियम?

मुर्गी जो आहार खाती है, उसमें मौजूद सेलेनियम उसके शरीर के माध्यम से अंडे तक पहुंच सकता है। इसलिए यहां भी मुख्य भूमिका फीड की संरचना की होती है।

यही कारण है कि वैल्यू-एडेड अंडों को “डिजाइनर एग” भी कहा जाता है—क्योंकि उत्पाद की विशेषता मुर्गी के पोषण को नियंत्रित करके तैयार की जाती है।


विटामिन-फोर्टिफाइड अंडे: एक अंडे में कई पोषक तत्व

अब बाजार में ऐसे अंडे भी उपलब्ध हैं जिनमें विटामिन और मिनरल्स की मात्रा बढ़ाने का दावा किया जाता है।

इनमें विटामिन D, विटामिन E, विटामिन A और कुछ अन्य सूक्ष्म पोषक तत्व शामिल हो सकते हैं।

भारत में कुछ कंपनियां ओमेगा-3, सेलेनियम, विटामिन और मिनरल से समृद्ध वैल्यू-एडेड अंडों की अलग-अलग श्रेणियां बेचती हैं। उदाहरण के लिए Suguna Foods अपनी वैल्यू-एडेड एग रेंज में ओमेगा-3, सेलेनियम, विटामिन और मिनरल से समृद्ध अंडों का उल्लेख करती है।

विटामिन D वाला अंडा कैसे बनता है?

मुर्गी के आहार में विटामिन D या उसके स्रोतों को नियंत्रित करके अंडे में इसकी मात्रा बढ़ाई जा सकती है। कुछ उत्पादन प्रणालियों में मुर्गियों के आहार और प्रकाश व्यवस्था दोनों का इस्तेमाल किया जाता है।

इसलिए “विटामिन D एग” का मतलब यह नहीं है कि अंडे के ऊपर विटामिन D डाल दिया गया है।


मल्टी-विटामिन अंडे: एक साथ कई पोषक तत्व

वैल्यू-एडेड अंडों की एक और श्रेणी में एक से ज्यादा पोषक तत्व बढ़ाने पर ध्यान दिया जाता है।

मसलन किसी उत्पाद में—

  • विटामिन D3
  • विटामिन E
  • विटामिन A
  • ओमेगा-3
  • सेलेनियम
  • जिंक

जैसे पोषक तत्वों को बढ़ाने का दावा किया जा सकता है।

भारत में कुछ प्रीमियम एग ब्रांड ऐसे मल्टी-न्यूट्रिएंट उत्पाद बेच रहे हैं। उदाहरण के तौर पर Abhi Eggs की एक प्रीमियम रेंज में विटामिन D3, ओमेगा DHA, सेलेनियम और विटामिन E जैसे पोषक तत्वों का उल्लेख है।

इसे समझें ऐसे

सामान्य अंडा = प्राकृतिक पोषण

वैल्यू-एडेड अंडा = प्राकृतिक अंडा + मुर्गी के आहार के जरिए किसी खास पोषक तत्व को बढ़ाने की कोशिश


फ्री-रेंज अंडा: पोषण से ज्यादा पालन-पद्धति की कहानी

अब आते हैं फ्री-रेंज एग पर।

यह बाकी वैल्यू-एडेड अंडों से थोड़ा अलग है।

ओमेगा-3 या सेलेनियम अंडे में मुख्य जोर पोषण संरचना पर होता है, जबकि फ्री-रेंज शब्द मुख्य रूप से मुर्गियों को रखने और पालने की व्यवस्था से जुड़ा है।

फ्री-रेंज सिस्टम में मुर्गियों को सीमित बंद जगह के बजाय बाहर घूमने-फिरने और प्राकृतिक व्यवहार करने के लिए अधिक अवसर देने की कोशिश की जाती है।

क्या फ्री-रेंज अंडा अपने आप ज्यादा पौष्टिक होता है?

जरूरी नहीं।

यही वह जगह है जहां उपभोक्ताओं को सावधान रहना चाहिए।

मुर्गी का भोजन, नस्ल, पालन-पद्धति और पर्यावरण—सभी अंडे की संरचना को प्रभावित कर सकते हैं। केवल “फ्री-रेंज” लिखे होने से यह साबित नहीं होता कि अंडे में हर विटामिन या प्रोटीन सामान्य अंडे से बहुत ज्यादा होगा। हालिया स्वास्थ्य विश्लेषण भी बताता है कि फ्री-रेंज या ब्राउन शेल अपने आप किसी अंडे को अधिक पौष्टिक साबित नहीं करते।


ब्राउन एग और देसी अंडा भी समझिए

बाजार में “ब्राउन एग” और “देसी एग” भी प्रीमियम उत्पाद के तौर पर बेचे जाते हैं।

लेकिन भूरे छिलके का मतलब यह नहीं कि अंडा अपने आप ज्यादा पौष्टिक है।

छिलके का रंग मुख्यतः मुर्गी की नस्ल से संबंधित होता है। अंडे की वास्तविक पोषण संरचना पर मुर्गी के आहार और उत्पादन व्यवस्था का प्रभाव ज्यादा महत्वपूर्ण हो सकता है।

इसी तरह “देसी” नाम भी अपने आप किसी खास पोषण स्तर की गारंटी नहीं देता। इसके लिए उत्पाद की वास्तविक पोषण जानकारी देखना जरूरी है।


एक अंडा, कई पहचान

आज बाजार में ग्राहक को मोटे तौर पर ये विकल्प मिल रहे हैं—

अंडे का प्रकारखासियतमुख्य अंतर
सामान्य अंडाप्राकृतिक प्रोटीन, विटामिन और मिनरलसामान्य फीड
ओमेगा-3 अंडाओमेगा-3 बढ़ाने पर जोरविशेष फीड
सेलेनियम अंडासेलेनियम की मात्रा बढ़ाई जाती हैसेलेनियम युक्त फीड
विटामिन-फोर्टिफाइडखास विटामिन बढ़ाने का दावाविटामिन युक्त फीड
मल्टी-विटामिन अंडाकई पोषक तत्वों का संयोजनफोर्टिफाइड फीड
हर्बल अंडाहर्बल/पौधों वाली सामग्री वाला फीडजड़ी-बूटी आधारित फीड
फ्री-रेंज अंडाअलग पालन-पद्धतिमुर्गियों को बाहर घूमने की अधिक सुविधा
ब्राउन एगभूरे रंग का छिलकामुख्यतः नस्ल से संबंधित
देसी एगस्थानीय/देशी मुर्गियों से जुड़ा उत्पादनस्ल और पालन पद्धति

जमुना दयाल

जमुना दयाल वाराणसी के निवासी हैं और उन्हें हिंदी समाचार मीडिया में 10 से अधिक वर्षों का गहन रिपोर्टिंग अनुभव है। उन्होंने अमर उजाला और दैनिक जागरण जैसे देश के प्रतिष्ठित समाचार पत्रों में जिला रिपोर्टर के रूप में कार्य करते हुए खेल, शिक्षा, राजनीति, कृषि तथा सामाजिक मुद्दों को प्रमुखता से कवर किया है। शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो उन्होंने महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ से जनसंचार में परास्नातक (MJMC) की डिग्री प्राप्त की है और यूजीसी नेट (UGC NET) परीक्षा उत्तीर्ण की है।

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