भारत के हर कोने सेभारत दर्शन - Local यात्रा

भारत के 10 सबसे रहस्यमयी सूर्य मंदिर: वास्तुकला, इतिहास और अद्भुत कहानियों का बेजोड़ संगम

कुष्ठ और चर्म रोगों से मुक्ति की मान्यता से जुड़े हैं ये सूर्य मंदिर

भारत में सूर्य उपासना की परंपरा अनादि काल से चली आ रही है। देश के विभिन्न हिस्सों में स्थापित सूर्य मंदिर न केवल आस्था के केंद्र हैं, बल्कि वे प्राचीन भारतीय खगोल विज्ञान, वास्तुकला और इंजीनियरिंग के अद्भुत नमूने भी हैं। चुंबक से दिशा भटकाने वाले शिखरों से लेकर एक रात में बने पश्चिममुखी मंदिरों तक, आइए जानते हैं भारत के 10 प्रमुख सूर्य मंदिरों के रहस्य और उनकी ऐतिहासिक कहानियां।

1. कोणार्क सूर्य मंदिर, ओडिशा (Konark Sun Temple)

कोणार्क सूर्य मंदिर, ओडिशा चित्र साभार: वेब पोर्टल फोटो गैलरी

13वीं शताब्दी में पूर्वी गंगा राजवंश के राजा नरसिंहदेव प्रथम द्वारा निर्मित कोणार्क का सूर्य मंदिर स्थापत्य कला की पराकाष्ठा है। इस पूरे मंदिर को 12-जोड़ी विशाल नक्काशीदार पहियों वाले एक भव्य रथ के रूप में डिजाइन किया गया है, जिसे 7 शक्तिशाली घोड़े खींचते नजर आते हैं।

रहस्य और ऐतिहासिक कहानी: कहा जाता है कि इस मंदिर के मुख्य शिखर पर एक अत्यधिक शक्तिशाली चुंबकीय पत्थर (Magnet) लगा हुआ था। यह चुंबक इतना प्रभावी था कि समुद्र से गुजरने वाले पुर्तगाली और अन्य जहाजों के कम्पास दिशाहीन हो जाते थे, जिससे जहाज किनारे से टकरा जाते थे। बाद में इसे हटा दिया गया। इसके अलावा, मंदिर के पहिए केवल सजावट नहीं हैं; वे प्राचीन धूपघड़ी (Sun Dial) हैं, जो आज भी सूर्य की छाया देखकर सटीक समय बताते हैं।

2. मार्तंड सूर्य मंदिर, अनंतनाग (Martand Sun Temple, Kashmir)

मार्तंड सूर्य मंदिर, अनंतनाग

कश्मीर की हसीन वादियों में स्थित यह मंदिर 8वीं शताब्दी में कर्कोटा राजवंश के प्रतापी राजा ललितादित्य मुक्तापीड द्वारा बनवाया गया था। यह मंदिर कश्मीरी और ग्रीक (यूनानी) वास्तुकला के अनूठे मेल के लिए जाना जाता है।

रहस्य और ऐतिहासिक कहानी: एक ऊंची पहाड़ी की चोटी पर स्थित इस मंदिर से पूरी कश्मीर घाटी का विहंगम दृश्य दिखाई देता है। 15वीं शताब्दी में सिकंदर शाह सूरी द्वारा इसे नष्ट करने का प्रयास किया गया था। महीनों की तोड़फोड़ के बाद भी इस मंदिर के विशाल पत्थर और स्तंभ आज भी गर्व से खड़े हैं, जो इसके निर्माण में प्रयुक्त प्राचीन इंजीनियरिंग के रहस्य को दर्शाते हैं।

3. मोढेरा सूर्य मंदिर, गुजरात (Modhera Sun Temple, Gujarat)

मोढेरा सूर्य मंदिर, गुजरात

गुजरात के पाटन के पास स्थित मोढेरा सूर्य मंदिर का निर्माण 1026 ईस्वी में सोलंकी वंश के राजा भीमदेव प्रथम ने करवाया था। इस मंदिर के निर्माण में चूने या सीमेंट का बिल्कुल भी उपयोग नहीं किया गया है, बल्कि पत्थरों को आपस में इंटरलॉकिंग सिस्टम (Interlocking System) से जोड़ा गया है।

रहस्य और ऐतिहासिक कहानी: इस मंदिर की डिजाइन में खगोलीय सटीकता का अद्भुत ध्यान रखा गया है। विषुव (Equinox – जब दिन और रात बराबर होते हैं) के दिन सुबह सूर्य की पहली किरण सीधे मंदिर के गर्भगृह में स्थापित सूर्य देव की मूर्ति के मस्तक पर लगे हीरे पर पड़ती थी, जिससे पूरा गर्भगृह जगमगा उठता था।

4. मुल्तान सूर्य मंदिर, पाकिस्तान (Multan Sun Temple)

वर्तमान पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में स्थित मुल्तान का सूर्य मंदिर प्राचीन काल में ‘आदित्य मंदिर’ के नाम से जाना जाता था। यह मध्य एशिया और भारत के बीच व्यापारिक व धार्मिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र था। इसका उल्लेख चीनी यात्री ह्वेनत्सांग और प्रसिद्ध अरब विद्वान अल-बरूनी के यात्रा वृतांतों में विस्तार से मिलता है।

रहस्य और ऐतिहासिक कहानी: पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण के पुत्र सांब को दुर्वासा ऋषि के श्राप के कारण कुष्ठ रोग हो गया था। सांब ने चंद्रभागा नदी के तट पर 12 वर्षों तक सूर्य देव की कठोर तपस्या की और रोगमुक्त होने के बाद इस भव्य मंदिर की स्थापना की।

5. कटारमल सूर्य मंदिर, अल्मोड़ा (Katarmal Sun Temple, Uttarakhand)

कटारमल सूर्य मंदिर, अल्मोड़ा: स्रोत-विकिपीडिया

उत्तराखंड के कुमाऊं क्षेत्र में समुद्र तल से लगभग 2,116 मीटर की ऊंचाई पर स्थित कटारमल सूर्य मंदिर का निर्माण 9वीं शताब्दी में कत्युरी राजा कटारमल द्वारा करवाया गया था। कोणार्क के बाद इसे भारत का दूसरा सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण सूर्य मंदिर माना जाता है।

रहस्य और ऐतिहासिक कहानी: यह मंदिर परिसर मुख्य मंदिर के अलावा 44 छोटे-छोटे मंदिरों के समूह से घिरा हुआ है। मंदिर का स्थापत्य इस प्रकार है कि वर्ष के कुछ विशेष दिनों में सूर्योदय की पहली किरण सीधे मंदिर के मुख्य काष्ठ शिवलिंग/मूर्ति को स्पर्श करती है।

6. देव सूर्य मंदिर, औरंगाबाद (Deo Sun Temple, Bihar)

देव सूर्य मंदिर, औरंगाबाद: स्रोत-विकिपीडिया

बिहार के औरंगाबाद जिले में स्थित देव सूर्य मंदिर अपनी अनोखी वास्तुशिल्प दिशा के लिए पूरे भारत में प्रसिद्ध है। माना जाता है कि इस मंदिर का निर्माण त्रेतायुग में हुआ था।

रहस्य और ऐतिहासिक कहानी: भारत में लगभग सभी हिंदू मंदिरों के मुख्य द्वार पूर्व दिशा की ओर खुलते हैं ताकि सूर्य देव का स्वागत हो सके, लेकिन देव सूर्य मंदिर का मुख्य द्वार पश्चिम दिशा की ओर है। लोकमान्यता है कि भगवान विश्वकर्मा ने स्वयं एक ही रात में इस मंदिर का निर्माण किया था और जब स्थानीय लोगों ने विरोध किया तो मंदिर का मुख रातों-रात पूर्व से पश्चिम की ओर घूम गया।

7. झालरापाटन सूर्य मंदिर, राजस्थान (Jhalrapatan Sun Temple)

झालरापाटन सूर्य मंदिर, राजस्थान

राजस्थान के झालावाड़ में स्थित इस 10वीं शताब्दी के सूर्य मंदिर को परमार राजाओं द्वारा बनवाया गया था। स्थानीय रूप से इसे ‘सात सहेलियों का मंदिर’ भी कहा जाता है।

रहस्य और ऐतिहासिक कहानी: यह मंदिर अपनी बारीक नक्काशी और शिखरों के लिए जाना जाता है। इतिहासकारों का मानना है कि इस मंदिर का रथ-शैली निर्माण ओडिशा के कोणार्क मंदिर से भी पुराना है। मंदिर की दीवारों पर उड़ीसा शैली और उत्तर भारतीय (नागर) शैली की मूर्तिकला का अद्भुत संगम दिखता है।

8. सूर्य पहार मंदिर, असम (Surya Pahar, Assam)

सूर्य पहार मंदिर, असम

असम के गोलपारा जिले में स्थित ‘श्री सूर्य पहार’ एक अत्यंत महत्वपूर्ण पुरातात्विक स्थल है। यह स्थल प्राकृतिक पहाड़ियों पर तराशी गई प्राचीन मूर्तियों और अवशेषों के लिए प्रसिद्ध है।

रहस्य और ऐतिहासिक कहानी: स्थानीय लोककथाओं और पुरातात्विक मान्यताओं के अनुसार, प्राचीन काल में इस पहाड़ी पर 99,999 शिवलिंग और सैकड़ों सूर्य नक्काशी चट्टानों पर उकेरी गई थीं। यह स्थान प्राचीन भारत में पूर्वोत्तर का सबसे बड़ा खगोलीय और धार्मिक अध्ययन केंद्र हुआ करता था।

9. उनाव सूर्य मंदिर, मध्य प्रदेश (Unao Sun Temple, Datia)

उनाव सूर्य मंदिर, मध्य प्रदेश  स्रोत-विकिपीडिया

मध्य प्रदेश के दतिया जिले में पहुज नदी के तट पर स्थित उनाव सूर्य मंदिर को ‘बालाजी सूर्य मंदिर’ के नाम से भी जाना जाता है। यह स्थान सदियों से श्रद्धालुओं की आस्था का बड़ा केंद्र रहा है।

रहस्य और ऐतिहासिक कहानी: इस मंदिर के साथ एक चमत्कारी लोकविश्वास जुड़ा हुआ है। मंदिर के पास स्थित पवित्र कुंड (पहुज नदी का तट) के जल में स्नान करके सूर्य देव के दर्शन करने से असाध्य त्वचा रोग, कुष्ठ रोग और अंधेपन से राहत मिलती है।

10. दक्षिणार्क सूर्य मंदिर, गया (Dakshinarka Sun Temple, Gaya)

बिहार के मोक्षधाम गया में स्थित दक्षिणार्क सूर्य मंदिर पितृपक्ष मेले और पिंडदान तर्पण के लिए अत्यंत पवित्र माना जाता है।

रहस्य और ऐतिहासिक कहानी: इस मंदिर के समीप स्थित ‘सूर्य कुंड’ का उल्लेख अग्नि पुराण और वायु पुराण जैसे प्राचीन ग्रंथों में मिलता है। मान्यता है कि यहां भगवान सूर्य की विधि-विधान से पूजा करने और कुंड में स्नान करने से पूर्वजों (पितरों) को मोक्ष प्राप्त होता है तथा साधक का परिवार चर्म रोगों से मुक्त रहता है।

जमुना दयाल

जमुना दयाल वाराणसी के निवासी हैं और उन्हें हिंदी समाचार मीडिया में 10 से अधिक वर्षों का गहन रिपोर्टिंग अनुभव है। उन्होंने अमर उजाला और दैनिक जागरण जैसे देश के प्रतिष्ठित समाचार पत्रों में जिला रिपोर्टर के रूप में कार्य करते हुए खेल, शिक्षा, राजनीति, कृषि तथा सामाजिक मुद्दों को प्रमुखता से कवर किया है। शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो उन्होंने महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ से जनसंचार में परास्नातक (MJMC) की डिग्री प्राप्त की है और यूजीसी नेट (UGC NET) परीक्षा उत्तीर्ण की है।

Related Articles

Back to top button