भारत दर्शन - Local यात्रा

धरती के भीतर छिपी रहस्यमयी दुनिया: बेलम गुफाओं में उतरते ही बदल जाता है रोमांच का अहसास

कल्पना कीजिए कि आप जमीन के ऊपर नहीं, बल्कि धीरे-धीरे धरती के भीतर उतर रहे हैं। रास्ता कभी संकरा होता है तो कभी अचानक विशाल कक्ष में बदल जाता है। चारों तरफ लाखों साल पुरानी चूना पत्थर की चट्टानें, कहीं प्राकृतिक आकृतियां तो कहीं अंधेरे में बहती भूमिगत जलधारा। यह किसी फिल्म का दृश्य नहीं, बल्कि आंध्र प्रदेश के नंदयाल जिले में स्थित बेलम गुफाओं की वास्तविक दुनिया है।

बेलम गुफाएं भारतीय उपमहाद्वीप की प्रमुख प्राकृतिक भूमिगत गुफा प्रणालियों में गिनी जाती हैं। इनकी दर्ज लंबाई करीब 3.22 किलोमीटर है और पर्यटकों के लिए लगभग 1.5 किलोमीटर हिस्सा विकसित कर खोला गया है। गुफा की सबसे गहरी जगह पाताल गंगा प्रवेश स्तर से करीब 46 मीटर नीचे है।

लाखों साल में तैयार हुई धरती के भीतर की भूलभुलैया

बेलम गुफाओं का निर्माण प्राकृतिक भूगर्भीय प्रक्रियाओं का परिणाम है। पानी के लगातार प्रवाह ने चूना पत्थर की चट्टानों को धीरे-धीरे काटा और समय के साथ सुरंगों, गलियारों तथा बड़े-बड़े कक्षों का निर्माण होता गया।

गुफा के भीतर स्टैलेक्टाइट और स्टैलेग्माइट जैसी चूना-पत्थर की संरचनाएं दिखाई देती हैं। पानी में घुले खनिजों के जमाव से बनी इन आकृतियों को देखकर ऐसा लगता है जैसे किसी कलाकार ने अंधेरे में बैठकर इन्हें तराशा हो।

कहीं चट्टानें सिंह के सिर जैसी नजर आती हैं तो कहीं प्राकृतिक आकृतियां धार्मिक प्रतीकों या पेड़ों का आभास कराती हैं। यही वजह है कि गुफा के अलग-अलग हिस्सों को स्थानीय नामों से पहचाना जाता है।

पाताल गंगा… जहां जमीन के नीचे बहता है पानी

स्रोत-इंटरनेट मीडिया

बेलम गुफाओं का सबसे रोमांचक हिस्सा पाताल गंगा है। यह गुफा का सबसे गहरा क्षेत्र माना जाता है और प्रवेश स्तर से लगभग 46 मीटर नीचे स्थित है। यहां भूमिगत जलधारा दिखाई देती है, जो कुछ दूरी तक बहने के बाद फिर धरती के भीतर गायब हो जाती है।

यही रहस्यमयी जलधारा बेलम गुफाओं को सामान्य चूना-पत्थर की गुफाओं से अलग अनुभव देती है। भूमिगत पानी के लंबे समय तक बहाव ने ही इस पूरे गुफा तंत्र के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

चट्टानों से निकलते हैं संगीत के सुर

बेलम गुफाओं की सबसे दिलचस्प विशेषताओं में सप्तस्वराला गुफा या म्यूजिकल चैंबर का नाम भी लिया जाता है। यहां कुछ चूना-पत्थर की संरचनाओं पर हल्की चोट करने से अलग-अलग तरह की ध्वनि सुनाई देती है।

अंधेरे और सन्नाटे के बीच चट्टानों से निकलती ध्वनि पर्यटकों के लिए इस यात्रा को और यादगार बना देती है। गुफा के भीतर ऐसे कई कक्ष और प्राकृतिक गलियारे हैं, जो इसके भूगर्भीय स्वरूप को समझने का मौका देते हैं।

सिर्फ प्रकृति नहीं, इतिहास भी समेटे है बेलम

स्रोत-Wikimedia Commons

बेलम गुफाओं की खासियत केवल इसकी प्राकृतिक बनावट तक सीमित नहीं है। यहां मिले पुरातात्विक अवशेष इस क्षेत्र में मानव गतिविधियों के पुराने इतिहास की ओर संकेत करते हैं। विभिन्न स्रोतों में गुफाओं से मिले प्राचीन बर्तनों और बौद्ध-जैन परंपरा से जुड़े अवशेषों का उल्लेख मिलता है।

कहा जाता है कि कई सदियों पहले बौद्ध और जैन साधकों ने गुफाओं के शांत और एकांत हिस्सों का उपयोग ध्यान तथा निवास के लिए किया। इससे बेलम की पहचान सिर्फ प्राकृतिक पर्यटन स्थल के रूप में नहीं, बल्कि ऐतिहासिक और सांस्कृतिक स्थल के रूप में भी बनती है।

हालांकि, प्राचीन अवशेषों की सटीक तिथि और उनसे जुड़े दावों को लेकर अलग-अलग स्रोतों में अंतर मिलता है, इसलिए इन्हें स्थानीय एवं प्रकाशित पुरातात्विक विवरणों के संदर्भ में देखना अधिक उचित है।

1884 में वैज्ञानिक रिकॉर्ड, फिर 1980 के दशक में हुआ विस्तृत सर्वेक्षण

स्थानीय लोगों को गुफाओं की जानकारी पहले से थी, लेकिन 1884 में ब्रिटिश भूविज्ञानी और सर्वेक्षक रॉबर्ट ब्रूस फूट के रिकॉर्ड के बाद बेलम गुफाएं वैज्ञानिक और खोजी दुनिया के सामने अधिक स्पष्ट रूप से आईं। इसके करीब एक सदी बाद 1980 के दशक में जर्मन गुफा विशेषज्ञों की टीम ने यहां विस्तृत खोज और मानचित्रण किया।

इसी खोज के बाद गुफाओं की वास्तविक लंबाई, आंतरिक कक्षों और भूमिगत रास्तों के बारे में दुनिया को अधिक जानकारी मिली।

जब गुफा बनी पर्यटन का बड़ा आकर्षण

आंध्र प्रदेश सरकार ने 1988 में इस क्षेत्र को संरक्षित घोषित किया था। बाद में आंध्र प्रदेश पर्यटन विकास निगम ने इसे पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया और 2002 में इसे पर्यटकों के लिए खोला गया। गुफा के अंदर रोशनी, रास्ते और हवा के आवागमन की व्यवस्था जैसी सुविधाएं विकसित की गईं।

आंध्र प्रदेश पर्यटन निगम आज भी राज्य में पर्यटन सुविधाओं और विरासत स्थलों के विकास पर काम करता है।

क्यों खास है बेलम गुफाओं का सफर?

गुफा का एक अन्य आंतरिक/भूमिगत दृश्य — स्रोत- डेनियल रोमैनसन / विकिमीडिया कॉमन्स CC0

बेलम गुफाओं की खासियत यह है कि यहां पर्यटन का अनुभव सिर्फ किसी स्मारक को देखने तक सीमित नहीं रहता। यहां पर्यटक धरती के भीतर उतरकर भूगर्भीय इतिहास को करीब से महसूस करता है।

  • करीब 3.22 किलोमीटर लंबा ज्ञात गुफा तंत्र।
  • लगभग 46 मीटर गहराई पर पाताल गंगा।
  • चूना-पत्थर से बनी प्राकृतिक आकृतियां।
  • लंबे भूमिगत गलियारे और विशाल कक्ष।
  • सप्तस्वराला क्षेत्र की अनोखी ध्वनियां।
  • प्राचीन मानव गतिविधियों और बौद्ध-जैन परंपरा से जुड़े पुरातात्विक संकेत।
  • पर्यटन के लिए विकसित रोशनी और रास्ते।

एक ऐसी यात्रा, जहां हर मोड़ पर नया रहस्य

बेलम गुफाओं से बाहर निकलते समय शायद सबसे ज्यादा याद रह जाता है वह एहसास, जब इंसान कुछ देर के लिए धरती की सतह से पूरी तरह अलग दुनिया में था। ऊपर सामान्य जीवन चलता रहता है, जबकि कुछ मीटर नीचे चट्टानों के बीच हजारों-लाखों साल पुरानी प्राकृतिक कहानी आज भी मौजूद है।

इसी भूगर्भीय संरचना, इतिहास और रहस्यमय वातावरण का मेल बेलम गुफाओं को आंध्र प्रदेश के सबसे अलग पर्यटन अनुभवों में शामिल करता है। अगर भारत के ऐसे पर्यटन स्थलों की तलाश है जहां रोमांच के साथ इतिहास और प्रकृति भी एक साथ मिलें, तो बेलम गुफाएं निश्चित रूप से उस सूची में जगह बनाती हैं।

डिस्क्लेमर: बेलम गुफाओं की लंबाई, प्राचीन अवशेषों की तिथि और ऐतिहासिक उपयोग से संबंधित आंकड़े विभिन्न स्रोतों में थोड़ा अलग मिलते हैं। प्रकाशित सामग्री में यहां उपलब्ध अपेक्षाकृत स्थिर और व्यापक रूप से उद्धृत आंकड़ों को प्राथमिकता दी गई है।

जमुना दयाल

जमुना दयाल वाराणसी के निवासी हैं और उन्हें हिंदी समाचार मीडिया में 10 से अधिक वर्षों का गहन रिपोर्टिंग अनुभव है। उन्होंने अमर उजाला और दैनिक जागरण जैसे देश के प्रतिष्ठित समाचार पत्रों में जिला रिपोर्टर के रूप में कार्य करते हुए खेल, शिक्षा, राजनीति, कृषि तथा सामाजिक मुद्दों को प्रमुखता से कवर किया है। शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो उन्होंने महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ से जनसंचार में परास्नातक (MJMC) की डिग्री प्राप्त की है और यूजीसी नेट (UGC NET) परीक्षा उत्तीर्ण की है।

Related Articles

Back to top button