पटना साहिब का गौरवशाली इतिहास – जहाँ जन्मे थे सिखों के 10वें गुरु, आज भी महक रही है गुरु गोबिंद सिंह के बचपन की यादें
तख्त श्री पटना साहिब के भीतर आज भी गुरु गोबिंद सिंह जी और उनके परिवार से जुड़े कई ऐतिहासिक अवशेष श्रद्धा के साथ संरक्षित

बिहार की राजधानी पटना का इतिहास केवल प्राचीन पाटलिपुत्र और मौर्य साम्राज्य तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सिख पंथ के इतिहास का एक अत्यंत पवित्र और केंद्रीय केंद्र भी रहा है। पटना सिटी (पुराना पटना) के संकरे बाजारों के बीच स्थित ‘तख्त श्री हरिमंदिर जी, पटना साहिब’ सिख धर्म के पांच सबसे पवित्र तख्तों में से एक है। यह वह पावन भूमि है जहाँ सिखों के दसवें और अंतिम गुरु, गुरु गोबिंद सिंह जी का जन्म हुआ था।
सिखों के तीन गुरुओं के चरणों से पवित्र हुई है यह भूमि
पटना साहिब का आध्यात्मिक महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि इसका संबंध सिख धर्म के तीन महान गुरुओं से रहा है:
- गुरु नानक देव जी की यात्रा (1506 ई.): सिख धर्म के संस्थापक गुरु नानक देव जी अपनी उदासियों (धार्मिक यात्राओं) के दौरान असम और बंगाल जाते समय यहाँ आए थे। वे यहाँ के प्रसिद्ध जौहरी सालिस राय जोहरी के निवास पर ठहरे थे, जो बाद में सिख संगत का प्रमुख केंद्र बना।
- गुरु तेग बहादुर जी का आगमन (1666 ई.): नौवें गुरु, गुरु तेग बहादुर जी असम जाने के दौरान अपने परिवार (माता गूजरी जी और पत्नी) के साथ पटना पधारे। उन्होंने अपनी गर्भवती पत्नी को सालिस राय जोहरी की इसी धर्मशाला में विश्राम के लिए छोड़ा और स्वयं आगे की यात्रा पर निकल पड़े।
- गुरु गोबिंद सिंह जी का जन्म (22 दिसंबर 1666): इसी पवित्र स्थल पर बाल ‘गोविंद राय’ (गुरु गोबिंद सिंह) का जन्म हुआ। उन्होंने अपने जीवन के शुरुआती पांच-छह वर्ष इसी पावन धरती पर बिताए, जहाँ उन्होंने घुड़सवारी, तीरंदाजी और प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त की।
महाराजा रणजीत सिंह ने बनवाया था भव्य स्वरूप
इतिहासकारों के अनुसार, इस ऐतिहासिक स्थल का वर्तमान भव्य रूप पंजाब के सिख साम्राज्य के महान शासक महाराजा रणजीत सिंह के प्रयासों से 1839 ई. में तैयार हुआ था। उन्होंने इसके निर्माण में सफेद संगमरमर और पारंपरिक वास्तुकला का भव्य इस्तेमाल किया।
1934 के विनाशकारी भूकंप में यह भवन क्षतिग्रस्त हो गया था, जिसके बाद 1948 में इसकी पुनर्स्थापना शुरू हुई और 1957 में यह आधुनिक, भव्य और कलात्मक रूप में बनकर तैयार हुआ।
आज भी सुरक्षित हैं गुरु साहिब से जुड़ी अमूल्य धरोहरें
तख्त श्री पटना साहिब के भीतर आज भी गुरु गोबिंद सिंह जी और उनके परिवार से जुड़े कई ऐतिहासिक अवशेष श्रद्धा के साथ संरक्षित किए गए हैं:
- गुरु गोबिंद सिंह जी के बचपन की छोटी कृपाण और गुलेल
- गुरु तेग बहादुर जी और गुरु गोबिंद सिंह जी की काष्ठ की खड़ाऊँ
- बाल गोविंद राय का ऐतिहासिक पंगुरा (झूला)
- गुरु साहिबानों द्वारा संगत को भेजे गए हस्तलिखित हुकुमनामे



