कल्पना कीजिए, एक ऐसी जगह की, जहां हर मंदिर का आकार दूसरे से अलग हो। कहीं ऊंचे चबूतरे पर खड़ा…
Read More »भारत के हर कोने से
गोल्डन रंग, कुरकुरा टेक्सचर और चाशनी में डूबी हुई जलेबी का नाम सुनते ही किसके मुंह में पानी नहीं आता?…
Read More »व्यापार से राजकाज तक: 1639 की वो कहानी 17वीं शताब्दी की शुरुआत में जब ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी भारत में…
Read More »किसी मंदिर का नाम “घड़े” पर पड़ा हो, ऐसा कम ही सुना होगा। चित्तौड़गढ़ ज़िले के रावतभाटा के पास बाड़ोली…
Read More »पहाड़ की किसी दुकान के काँच में गहरे भूरे रंग की चौकोर बर्फ़ियाँ सजी हों, जिन पर सफ़ेद दाने जड़े…
Read More »प्रसाद, जिसके बिना यात्रा अधूरी मानी जाती है तिरुमला की पहाड़ियों पर विराजमान भगवान वेंकटेश्वर के दर्शन के बाद श्रद्धालुओं…
Read More »उत्तर प्रदेश के ललितपुर ज़िले में बेतवा नदी के किनारे, विंध्य की पहाड़ियों की तलहटी में एक ऐसा मंदिर खड़ा…
Read More »दिल्ली के कनॉट प्लेस की भागती-दौड़ती सड़कों से बस कुछ क़दम की दूरी पर हैली रोड की एक संकरी गली…
Read More »गलियों में घुलती खोये की महक मथुरा की तंग गलियों में सुबह-सुबह एक ख़ास महक फैलती है: कड़ाही में धीमी…
Read More »पहाड़ी पर एक गोल घेरा ग्वालियर से चंबल की ओर बढ़ते हुए जब मितावली गाँव की पहाड़ी पर नज़र जाती…
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