भारत दर्शन - Local यात्रा

फतेहपुर सीकरी: 14 साल की राजधानी, जो सदियों से दुनिया को हैरान कर रही है

आगरा से करीब 40 किलोमीटर दूर लाल पत्थरों का एक पूरा शहर आज भी खड़ा है। यहाँ दरबार सजता था, बहसें होती थीं और बादशाह का सपना आकार लेता था। फिर एक दिन यह शहर खाली हो गया।

जब बादशाह ने रेगिस्तान जैसी पहाड़ी पर शहर बसा दिया

मुग़ल बादशाह अकबर के पास आगरा जैसी बड़ी राजधानी पहले से थी। फिर भी उन्होंने सीकरी की पथरीली पहाड़ी पर एक नया शहर बसाने का फ़ैसला किया। इसके पीछे आस्था की कहानी बताई जाती है। लोककथा के अनुसार संतानहीन अकबर सूफ़ी संत शेख़ सलीम चिश्ती के पास पहुँचे। संत के आशीर्वाद से 1569 में बेटे सलीम का जन्म हुआ, जो आगे चलकर बादशाह जहाँगीर बने। कृतज्ञता में अकबर ने इसी जगह को अपनी नई राजधानी बनाने की ठानी।

करीब 1571 में काम शुरू हुआ और देखते ही देखते लाल बलुआ पत्थर का भव्य नगर खड़ा हो गया। लगभग 1585 तक अकबर यहीं से शासन चलाते रहे।

एक खंभे पर टिका विचारों का दरबार

फतेहपुर सीकरी की सबसे अनोखी इमारतों में दीवान-ए-ख़ास गिनी जाती है। इसके भीतर एक विशाल केंद्रीय स्तंभ है, जिसके ऊपर गोल मंच बना है। कहा जाता है कि अकबर इसी मंच से अलग-अलग धर्मों के विद्वानों की बहसें सुना करते थे। चारों कोनों से पुल जैसे रास्ते इस मंच तक आते हैं, मानो अलग-अलग विचार एक ही बिंदु पर आकर मिल रहे हों। यह दृश्य अकबर की “सुलह-ए-कुल” यानी सबके साथ सद्भाव की सोच का प्रतीक माना जाता है।

बुलंद दरवाज़ा: जहाँ दरवाज़ा भी इतिहास सुनाता है

लगभग 54 मीटर ऊँचा बुलंद दरवाज़ा जामा मस्जिद परिसर का दक्षिणी प्रवेश द्वार है। इसे अकबर की गुजरात विजय की याद में बनवाया गया था और यह एशिया के सबसे ऊँचे दरवाज़ों में गिना जाता है। बताया जाता है कि इस पर फ़ारसी में ऐसे संदेश अंकित हैं जो सहिष्णुता और जीवन की क्षणभंगुरता की बात करते हैं। एक प्रसिद्ध पंक्ति कहती है कि दुनिया एक पुल है, इसे पार करो, पर इस पर घर मत बनाओ। इस शहर के भविष्य को देखते हुए यह पंक्ति और भी गहरी लगती है।

पंच महल: पाँच मंज़िलों की हवादार छत

पंच महल पाँच मंज़िलों वाली खुली इमारत है, जिसकी हर ऊपरी मंज़िल पिछली से छोटी होती गई है। इस पिरामिड जैसी बनावट के कारण यह दूर से ही पहचान में आ जाती है। माना जाता है कि यहाँ से पूरे नगर का नज़ारा दिखता था और राजपरिवार की स्त्रियाँ शाम की ठंडी हवा लेने यहाँ आती थीं। खंभों और जालियों के बीच से गुज़रती हवा इसे गर्मी में भी राहत देने वाली जगह बनाती थी।

सबसे बड़ा सवाल: शहर खाली क्यों हो गया?

फतेहपुर सीकरी मुश्किल से 14-15 साल ही मुग़ल राजधानी रहा। 1585 के आसपास अकबर ने राजधानी लाहौर स्थानांतरित कर दी और यह शहर वीरान होने लगा। इतिहासकार आमतौर पर दो कारण बताते हैं: पानी की कमी और उत्तर-पश्चिम सीमा की राजनीतिक परिस्थितियाँ। इसी अधूरी कहानी की वजह से इसे अक्सर “भूतिया शहर” कहा जाता है। यह नाम डराता नहीं, बल्कि एक ठहरे हुए समय का एहसास कराता है। कुछ लोग इसे “पत्थर में लिखी कविता” भी कहते हैं।

आज का फतेहपुर सीकरी

1986 में यूनेस्को ने इसे विश्व धरोहर स्थल घोषित किया। आज यहाँ देश-विदेश से सैलानी आते हैं और सलीम चिश्ती की दरगाह पर श्रद्धालु मन्नत के धागे बाँधते हैं। फ़ारसी, हिंदू और जैन स्थापत्य का मेल इसे दुनिया की अनोखी धरोहरों में शामिल करता है।

जमुना दयाल

जमुना दयाल वाराणसी के निवासी हैं और उन्हें हिंदी समाचार मीडिया में 10 से अधिक वर्षों का गहन रिपोर्टिंग अनुभव है। उन्होंने अमर उजाला और दैनिक जागरण जैसे देश के प्रतिष्ठित समाचार पत्रों में जिला रिपोर्टर के रूप में कार्य करते हुए खेल, शिक्षा, राजनीति, कृषि तथा सामाजिक मुद्दों को प्रमुखता से कवर किया है। शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो उन्होंने महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ से जनसंचार में परास्नातक (MJMC) की डिग्री प्राप्त की है और यूजीसी नेट (UGC NET) परीक्षा उत्तीर्ण की है।

Related Articles

Back to top button