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कथा से विवाद तक: धीरेंद्र शास्त्री से प्रदीप मिश्रा तक, इन 10 कथावाचकों के बयान ने मचाया बवाल

कोई धार्मिक परंपरा पर बोला, किसी ने महिलाओं पर टिप्पणी की, तो किसी के बयान से संत समाज ही आमने-सामने आ गया

भारत में कथा और प्रवचन की परंपरा सदियों पुरानी है। रामकथा, भागवत कथा और शिव महापुराण सुनाने वाले संतों के कार्यक्रमों में हजारों-लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं। सोशल मीडिया ने इन कथावाचकों की पहुंच को देश ही नहीं, विदेशों तक बढ़ा दिया है।

लेकिन इसी लोकप्रियता का दूसरा पहलू भी सामने आया है। कथा मंच से दिया गया कोई बयान जब सोशल मीडिया पर वायरल होता है तो कुछ ही घंटों में राष्ट्रीय बहस शुरू हो जाती है। कई बार धार्मिक भावनाओं से जुड़े बयान विवाद का कारण बनते हैं तो कभी महिलाओं, जाति, खान-पान या दूसरी धार्मिक परंपराओं पर टिप्पणी को लेकर विरोध शुरू हो जाता है।

धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री का पश्चिम बंगाल में दुर्गा पूजा के दौरान मांस-मछली को लेकर दिया गया ताजा बयान इसका नया उदाहरण है। उन्होंने दुर्गा पूजा के दौरान मांसाहारी भोजन से बचने की अपील की और इसे लेकर बंगाल में राजनीतिक और सामाजिक विरोध शुरू हो गया। कांग्रेस ने शिकायत की, जबकि बंगाल भाजपा अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने भी कहा कि बंगाल के खान-पान और परंपराओं का फैसला कोई बाहरी व्यक्ति नहीं कर सकता।

आइए जानते हैं ऐसे 10 प्रमुख कथावाचकों के बारे में, जो लोकप्रियता के साथ अपने बयानों को लेकर भी चर्चा में आए।


1. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री: बंगाल में मांस-मछली के बयान से नया विवाद

कौन हैं?

बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री देश के सबसे चर्चित युवा कथावाचकों में शामिल हैं। उनके दिव्य दरबार और कथा कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं। सोशल मीडिया पर भी उनकी बड़ी लोकप्रियता है।

विवाद क्या है?

सितंबर 2026 में पश्चिम बंगाल में दुर्गा पूजा से पहले उन्होंने पूजा के दौरान मांस और मछली नहीं खाने की अपील की। उन्होंने मांसाहारी भोजन को लेकर आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल भी किया।

विरोध क्यों हुआ?

बंगाल में मछली और मांस खान-पान तथा कई धार्मिक-सांस्कृतिक परंपराओं का हिस्सा हैं। इसलिए बयान को स्थानीय संस्कृति में हस्तक्षेप के रूप में देखा गया।

कांग्रेस ने पुलिस में शिकायत की। बंगाल भाजपा अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने शास्त्री के बयान से पार्टी को अलग करते हुए कहा कि बंगाली लोग अपनी परंपरा के अनुसार क्या खाएंगे, यह वे खुद तय करेंगे।


2. प्रदीप मिश्रा: राधा रानी के बयान के बाद बरसाना पहुंचकर मांगी माफी

कौन हैं?

पंडित प्रदीप मिश्रा शिव महापुराण और धार्मिक कथाओं के लिए देशभर में प्रसिद्ध हैं। उनके कथा कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में श्रद्धालु जुटते हैं।

विवाद क्या था?

2024 में राधा रानी को लेकर उनके एक बयान ने ब्रज क्षेत्र में नाराजगी पैदा कर दी। उनके बयान को राधा रानी की धार्मिक मान्यता के विपरीत बताया गया।

विरोध

मथुरा-वृंदावन के संतों में नाराजगी हुई। प्रेमानंद महाराज ने भी उनके बयान पर कड़ी आपत्ति जताई। मामला इतना बढ़ा कि प्रदीप मिश्रा को बरसाना पहुंचना पड़ा।

माफी

29 जून 2024 को प्रदीप मिश्रा राधा रानी मंदिर पहुंचे। उन्होंने दंडवत होकर माफी मांगी और कहा कि उनके शब्दों से किसी को दुख पहुंचा है तो वह क्षमा चाहते हैं।

इसके बाद भी विवाद

राधा रानी प्रकरण के बाद ताप्ती नदी को लेकर उनकी कथित टिप्पणी भी चर्चा में आई।

यानी प्रदीप मिश्रा का मामला उन उदाहरणों में है, जहां विवाद के बाद सार्वजनिक रूप से माफी मांगने से मामला शांत हुआ।


3. अनिरुद्धाचार्य: महिलाओं पर टिप्पणी ने खड़ा किया बड़ा विवाद

कौन हैं?

वृंदावन के अनिरुद्धाचार्य सोशल मीडिया के सबसे तेजी से लोकप्रिय हुए धार्मिक कथावाचकों में शामिल हैं। उनके प्रवचन, सवाल-जवाब और छोटे वीडियो युवाओं में भी काफी लोकप्रिय हैं।

विवाद क्या था?

2025 में महिलाओं की शादी की उम्र को लेकर उनकी टिप्पणी का वीडियो वायरल हुआ। उन्होंने 25 वर्ष की उम्र तक अविवाहित रहने वाली महिलाओं के चरित्र को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी की और कम उम्र में विवाह की बात कही।

विरोध

बयान के बाद महिलाओं और महिला संगठनों की ओर से विरोध हुआ। कई जगह प्रदर्शन भी हुए और उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग उठी।

माफी और सफाई

विवाद बढ़ने पर उन्होंने माफी मांगी। उन्होंने कहा कि उनकी बात सभी महिलाओं के लिए नहीं थी। बाद में उन्होंने अपने शब्दों को लेकर सफाई भी दी और कहा कि वह सामाजिक बुराइयों पर टिप्पणी कर रहे थे।

विवाद यहीं नहीं रुका

2025 में उनके लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर बयान पर भी सोशल मीडिया पर विवाद हुआ।


4. मोरारी बापू: पत्नी की मृत्यु के बाद कथा को लेकर विवाद

कौन हैं?

मोरारी बापू भारत के सबसे पुराने और प्रतिष्ठित रामकथा वाचकों में गिने जाते हैं। देश-विदेश में उनकी रामकथाएं आयोजित होती रही हैं।

विवाद

जून 2025 में उनकी पत्नी के निधन के कुछ ही समय बाद वाराणसी में रामकथा करने को लेकर विवाद हुआ। कुछ संतों और विद्वानों ने इसे मृत्यु के बाद माने जाने वाले ‘सूतक’ की परंपरा के विपरीत बताया।

विरोध

काशी के कुछ संतों और विद्वानों ने आपत्ति जताई। विरोध प्रदर्शन भी हुआ और उनका पुतला जलाने की खबर सामने आई।

बापू की सफाई

मोरारी बापू ने कहा कि वैष्णव परंपरा के अनुसार वह धार्मिक कर्तव्य से दूर रहने की परंपरा नहीं मानते। उन्होंने फिर भी उन लोगों से माफी मांगी जिन्हें उनकी वजह से ठेस पहुंची।

यह विवाद धार्मिक परंपराओं की अलग-अलग व्याख्या का उदाहरण बना।


5. प्रेमानंद महाराज: प्रदीप मिश्रा से विवाद के बाद चर्चा में आए

कौन हैं?

वृंदावन के प्रेमानंद महाराज सोशल मीडिया पर बेहद लोकप्रिय हैं। उनके रात्रिकालीन सत्संग और भक्तों के सवालों के जवाबों के वीडियो लाखों लोग देखते हैं।

विवाद

2024 में प्रदीप मिश्रा के राधा रानी संबंधी बयान पर प्रेमानंद महाराज ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने प्रदीप मिश्रा की आलोचना की और यह मामला संत समाज के भीतर बड़े विवाद में बदल गया।

खास बात

यह विवाद केवल कथावाचक बनाम श्रद्धालु नहीं था। इसमें एक लोकप्रिय संत ने दूसरे लोकप्रिय कथावाचक के बयान पर सार्वजनिक रूप से आपत्ति जताई।

बाद में प्रदीप मिश्रा ने बरसाना पहुंचकर माफी मांगी।

एक और विवाद

2025 में प्रेमानंद महाराज की युवक-युवतियों के रिश्तों और ब्रेकअप से संबंधित टिप्पणी भी चर्चा में आई और सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया हुई।


6. इंद्रेश महाराज: यादव समाज पर टिप्पणी के बाद मांगी माफी

कौन हैं?

इंद्रेश उपाध्याय महाराज भी धार्मिक कथा और प्रवचन के लिए जाने जाते हैं।

विवाद

दिसंबर 2025 में उनका एक पुराना वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिसमें यादव समाज को लेकर विवादित टिप्पणी की गई थी। इस बयान को लेकर यादव समाज में नाराजगी फैल गई।

माफी

विवाद बढ़ने के बाद इंद्रेश महाराज ने माफी मांगी। उन्होंने बताया कि वीडियो करीब चार साल पुराना था और कहा कि उनका उद्देश्य किसी समाज को ठेस पहुंचाना नहीं था।

इस मामले की खासियत

यह मामला बताता है कि कई साल पुराना वीडियो भी सोशल मीडिया पर दोबारा वायरल होकर किसी कथावाचक को नए विवाद में डाल सकता है।


7. जया किशोरी: कथा के संदेश और महंगे बैग को लेकर बहस

कौन हैं?

जया किशोरी देश की लोकप्रिय महिला कथावाचकों में हैं। भागवत कथा, भजन और मोटिवेशनल कार्यक्रमों के कारण उनकी बड़ी युवा फैन फॉलोइंग है।

विवाद क्या था?

2024 में करीब दो लाख रुपये के लग्जरी बैग को लेकर सोशल मीडिया पर उनकी आलोचना हुई। सवाल उठाया गया कि धार्मिक प्रवचन देने वाली कथावाचक महंगा बैग क्यों इस्तेमाल करती हैं।

जया किशोरी की सफाई

उन्होंने कहा कि वह संत या साध्वी नहीं हैं। वह सामान्य गृहस्थ जीवन जीना चाहती हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनका बैग चमड़े का नहीं है और उन्होंने कभी यह दावा नहीं किया कि उन्होंने मोह-माया का पूरी तरह त्याग कर दिया है।

विवाद का असली मुद्दा

यह मामला किसी धार्मिक बयान से ज्यादा धार्मिक संदेश और आधुनिक जीवनशैली के बीच विरोधाभास को लेकर बहस बना।


8. देवकीनंदन ठाकुर: कथा से आगे धार्मिक-सामाजिक मुद्दों पर मुखर

कौन हैं?

देवकीनंदन ठाकुर देश के लोकप्रिय भागवत कथा वाचकों में शामिल हैं। उनकी कथाएं देश के साथ विदेशों में भी आयोजित होती हैं। उनकी सोशल मीडिया पर भी बड़ी संख्या में फॉलोइंग है।

विवादों की वजह

देवकीनंदन ठाकुर केवल कथा तक सीमित नहीं रहते। वह सनातन धर्म, धार्मिक पहचान, सामाजिक मुद्दों और राजनीतिक विषयों पर भी अपनी राय रखते हैं।

इसी कारण उनके कई बयान राजनीतिक बहस का हिस्सा बने हैं। अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय को लेकर उनका बयान भी विवाद में रहा।

खास बात

उनके मामले में विवाद किसी एक बयान तक सीमित नहीं रहा। उनकी सार्वजनिक भूमिका बढ़ने के साथ धार्मिक मंच और सामाजिक-राजनीतिक टिप्पणी के बीच की सीमा भी चर्चा का विषय बनी।


9. जगद्गुरु रामभद्राचार्य: धार्मिक विद्वान, लेकिन टिप्पणियां भी बहस में

कौन हैं?

जगद्गुरु रामभद्राचार्य देश के प्रसिद्ध धार्मिक विद्वान, रामकथा वाचक और संस्कृत के विद्वान हैं। उनकी पहचान केवल कथा वाचक के रूप में नहीं बल्कि धार्मिक साहित्य के विद्वान के रूप में भी है।

विवाद

महिलाओं, शिक्षा और दूसरे धर्मों से जुड़े विषयों पर उनकी कुछ टिप्पणियां सोशल मीडिया में बहस का कारण बनीं। 2025 में बेटियों और शिक्षा से जुड़ी उनकी टिप्पणी को लेकर भी आलोचना हुई।

खास बात

रामभद्राचार्य का मामला दूसरे कथावाचकों से थोड़ा अलग है। उनके बयान पर होने वाली बहस में धार्मिक व्याख्या के साथ-साथ सामाजिक और राजनीतिक दृष्टिकोण भी शामिल हो जाता है।


10. इंद्रदेव महाराज: राम-सीता की भूमिका को लेकर टिप्पणी

कौन हैं?

वृंदावन से जुड़े इंद्रदेव महाराज कथा और धार्मिक आयोजनों में प्रवचन करते हैं।

विवाद

2024 में रामलीला में भगवान राम और माता सीता की भूमिका निभाने वाले कलाकारों को लेकर उनकी टिप्पणी का वीडियो वायरल हुआ। इसके बाद उनकी आलोचना हुई।

माफी

विवाद बढ़ने पर उन्होंने अपनी टिप्पणी के लिए माफी मांगी।

क्या संदेश मिला?

धार्मिक मंच पर कही गई बात और निजी राय के बीच अंतर को लेकर यह मामला भी चर्चा में रहा। खासतौर पर तब, जब किसी देवी-देवता या धार्मिक पात्र से जुड़ी बात सार्वजनिक मंच पर कही जाए।


इन मामलों में एक बात समान है—सोशल मीडिया ने बदला पूरा खेल

कुछ दशक पहले कथा वाचक का विवाद मुख्य रूप से उसी शहर या धार्मिक समुदाय तक सीमित रह जाता था। आज स्थिति बिल्कुल अलग है।

कथा के दौरान कही गई 30 सेकंड की बात मोबाइल कैमरे में रिकॉर्ड होती है। फिर वह वीडियो सोशल मीडिया पर जाता है।

इसके बाद घटनाक्रम अक्सर ऐसा होता है—

कथा में बयान

वीडियो वायरल

सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया

संत समाज या धार्मिक संगठन की आपत्ति

राजनीतिक दलों की प्रतिक्रिया

मीडिया कवरेज

सफाई या माफी

धीरेंद्र शास्त्री का बंगाल विवाद इसी नए दौर का उदाहरण है। उनके बयान के बाद स्थानीय सांस्कृतिक परंपरा, खान-पान, धार्मिक स्वतंत्रता और राजनीतिक पहचान तक की बहस शुरू हो गई।


क्या विवाद से कथावाचकों की लोकप्रियता कम होती है?

हर मामले में ऐसा नहीं होता।

कई बार विवाद के बाद कथावाचक और ज्यादा चर्चा में आ जाते हैं। उनका वीडियो पहले से ज्यादा लोगों तक पहुंचता है। सोशल मीडिया पर आलोचक और समर्थक दोनों सक्रिय हो जाते हैं।

प्रदीप मिश्रा के मामले में विवाद के बाद बरसाना जाकर माफी मांगने की तस्वीरें और वीडियो देशभर में वायरल हुए।

अनिरुद्धाचार्य के मामले में भी विवादित बयान के बाद उनकी सफाई और माफी खुद एक नया समाचार बन गई।

जया किशोरी के मामले में भी विवाद के बाद उनके स्पष्टीकरण ने उनके निजी जीवन और कथावाचन शैली को लेकर नई चर्चा शुरू कर दी।

इसलिए आज के दौर में कथावाचक के लिए लोकप्रियता और विवाद कई बार एक-दूसरे से जुड़े दिखाई देते हैं।


एक नजर में: किस कथावाचक का विवाद किस वजह से?

कथावाचकविवाद का मुख्य विषयबाद की स्थिति
धीरेंद्र कृष्ण शास्त्रीबंगाल में दुर्गा पूजा के दौरान मांस-मछलीविवाद जारी
प्रदीप मिश्राराधा रानी पर टिप्पणीबरसाना में माफी
अनिरुद्धाचार्यमहिलाओं और विवाह पर टिप्पणीमाफी व सफाई
मोरारी बापूसूतक के दौरान रामकथामाफी, साथ में अपनी धार्मिक व्याख्या
प्रेमानंद महाराजधार्मिक मान्यताओं/सामाजिक रिश्तों पर टिप्पणीसफाई और बहस
इंद्रेश महाराजयादव समाज पर टिप्पणीमाफी
जया किशोरीमहंगे बैग और जीवनशैलीसफाई
देवकीनंदन ठाकुरधार्मिक-सामाजिक मुद्दों पर बयानबहस जारी
रामभद्राचार्यमहिलाओं/शिक्षा आदि पर टिप्पणियांआलोचना और बहस
इंद्रदेव महाराजरामलीला कलाकारों पर टिप्पणीमाफी

इस पूरी कहानी का सबसे बड़ा बदलाव यही है—
पहले कथा खत्म होने पर चर्चा खत्म हो जाती थी, अब कथा खत्म होने के बाद सोशल मीडिया पर असली बहस शुरू होती है।

(फोटो स्रोत- इंटरनेट मीडिया)

जमुना दयाल

जमुना दयाल वाराणसी के निवासी हैं और उन्हें हिंदी समाचार मीडिया में 10 से अधिक वर्षों का गहन रिपोर्टिंग अनुभव है। उन्होंने अमर उजाला और दैनिक जागरण जैसे देश के प्रतिष्ठित समाचार पत्रों में जिला रिपोर्टर के रूप में कार्य करते हुए खेल, शिक्षा, राजनीति, कृषि तथा सामाजिक मुद्दों को प्रमुखता से कवर किया है। शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो उन्होंने महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ से जनसंचार में परास्नातक (MJMC) की डिग्री प्राप्त की है और यूजीसी नेट (UGC NET) परीक्षा उत्तीर्ण की है।

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