भारत दर्शन - Local यात्रा

कुंडलधाम: भगवान स्वामीनारायण की 7,090 प्रतिमाओं वाला मंदिर, जहां आस्था ने बनाया विश्व रिकॉर्ड

गुजरात के इस धार्मिक स्थल की पहचान सिर्फ भव्य मंदिर से नहीं, बल्कि हजारों अनोखी प्रतिमाओं, धार्मिक ग्रंथों के संरक्षण और समाज सेवा के कार्यों से भी है

भारत में ऐसे कई मंदिर हैं, जिनकी पहचान उनकी प्राचीनता, भव्यता और अनोखी परंपराओं से होती है। लेकिन गुजरात का कुंडलधाम अपनी एक खास उपलब्धि के कारण दुनिया भर में चर्चा में आया। यहां भगवान स्वामीनारायण की 7,090 धार्मिक प्रतिमाओं का ऐसा संग्रह तैयार किया गया, जिसने गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में जगह बनाई। यह उपलब्धि केवल धार्मिक आस्था का उदाहरण नहीं है, बल्कि मूर्तिकला, मेहनत और सामूहिक प्रयास की कहानी भी है।

गुजरात के बोटाद जिले के कुंडल गांव में स्थित श्री स्वामीनारायण मंदिर को कुंडलधाम के नाम से जाना जाता है। यहां श्रद्धालु भगवान स्वामीनारायण के दर्शन करने आते हैं। मंदिर में पूजा-पाठ, प्रवचन और धार्मिक आयोजनों के साथ शिक्षा, सामाजिक सेवा और धार्मिक साहित्य को सुरक्षित रखने से जुड़े काम भी किए जाते हैं।

7,090 प्रतिमाओं ने बनाया विश्व रिकॉर्ड

कुंडलधाम की सबसे बड़ी पहचान भगवान स्वामीनारायण की हजारों प्रतिमाओं का संग्रह है। गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स के अनुसार, 18 दिसंबर 2021 को ज्ञानजीवनदासजी स्वामी के नेतृत्व में कुंडलधाम ने धार्मिक प्रतिमाओं के सबसे बड़े संग्रह का रिकॉर्ड बनाया। इस संग्रह में कुल 7,090 प्रतिमाएं शामिल थीं।

इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम का नाम ‘स्वामीनारायण्स अक्षरधाम इन कुंडलधाम’ रखा गया था। प्रतिमाओं को देखने के लिए पांच हजार से अधिक लोग पहुंचे थे। इतनी बड़ी संख्या में धार्मिक प्रतिमाओं का एक स्थान पर संग्रह अपने आप में खास उपलब्धि थी।

इसके अगले दिन, 19 दिसंबर 2021 को कुंडलधाम में 7,070 अनोखी प्रतिमाओं को एक साथ प्रदर्शित करने का एक अलग विश्व रिकॉर्ड भी दर्ज हुआ। इस आयोजन का नाम ‘अनेकरूपे स्वामीनारायण’ था, जिसका अर्थ है स्वामीनारायण के अनेक रूप।

दोनों उपलब्धियां अलग-अलग रिकॉर्ड श्रेणियों में दर्ज की गईं। पहली उपलब्धि प्रतिमाओं के संग्रह से जुड़ी थी, जबकि दूसरी एक साथ प्रतिमाओं को प्रदर्शित करने से संबंधित थी। इन रिकॉर्डों ने कुंडलधाम को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई।

एक जैसे नहीं, अलग-अलग स्वरूपों में दिखती हैं प्रतिमाएं

कुंडलधाम में रखी गई प्रतिमाओं की खासियत उनकी विविधता है। यहां भगवान स्वामीनारायण के विभिन्न स्वरूपों को अलग-अलग कलात्मक रूपों में दिखाया गया है। गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स के अनुसार, 7,070 प्रतिमाओं के प्रदर्शन में शामिल सभी प्रतिमाएं अलग थीं और पूजा के उद्देश्य से तैयार की गई थीं।

धार्मिक प्रतिमाएं बनाना केवल आकार देने का काम नहीं है। इसमें चेहरे के भाव, वस्त्रों की बनावट, आभूषणों की बारीकी और धार्मिक परंपरा से जुड़ी बातों का ध्यान रखना पड़ता है। इसलिए इस तरह के विशाल संग्रह के पीछे कारीगरों की कला और लंबे समय तक किए गए काम की अहम भूमिका रही होगी।

श्रद्धालुओं के लिए यह संग्रह भगवान के अलग-अलग स्वरूपों को देखने और धार्मिक परंपरा से जुड़ने का अवसर है। वहीं कला में रुचि रखने वाले लोगों के लिए यह प्रतिमाओं की विविधता को समझने का खास माध्यम भी बनता है।

ज्ञानजीवनदासजी स्वामी की भूमिका

कुंडलधाम की धार्मिक और सामाजिक गतिविधियों का मार्गदर्शन सद्गुरु ज्ञानजीवनदासजी स्वामी करते हैं। वे स्वामीनारायण संप्रदाय के प्रमुख आध्यात्मिक मार्गदर्शकों में शामिल हैं। उन्होंने भगवान स्वामीनारायण की शिक्षाओं को लोगों तक पहुंचाने, धार्मिक ग्रंथों के प्रचार और नई पीढ़ी को भारतीय आध्यात्मिक परंपरा से जोड़ने पर जोर दिया है।

उनके मार्गदर्शन में कुंडलधाम में धार्मिक प्रवचन, पुस्तक प्रकाशन और सांस्कृतिक गतिविधियां आयोजित की जाती हैं। धार्मिक साहित्य को डिजिटल माध्यमों से लोगों तक पहुंचाने का प्रयास भी किया गया है। इसके तहत 3डी एनिमेशन जैसी तकनीक का इस्तेमाल कर धार्मिक प्रसंगों को सरल और रोचक रूप में प्रस्तुत किया जाता है।

इस तरह कुंडलधाम में पारंपरिक धार्मिक शिक्षा के साथ आधुनिक तकनीक को भी जगह दी गई है, ताकि युवा पीढ़ी अपनी सांस्कृतिक विरासत को आसानी से समझ सके।

धार्मिक ग्रंथों को सुरक्षित रखने की पहल

कुंडलधाम की उपलब्धियां केवल प्रतिमाओं तक सीमित नहीं हैं। धार्मिक ग्रंथों और पांडुलिपियों को सुरक्षित रखने तथा लोगों तक पहुंचाने के लिए भी यहां काम किया गया है।

गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में कुंडलधाम से जुड़ी एक और उपलब्धि दर्ज है। 6 मई 2022 को यहां भगवान स्वामीनारायण की शिक्षाओं से जुड़े ‘वचनामृत’ ग्रंथ की एक विशाल प्रति को सबसे बड़े हिंदू स्मृति ग्रंथ के रूप में दर्ज किया गया। इसका आकार 3.22 मीटर लंबा और 2.23 मीटर चौड़ा था।

वचनामृत स्वामीनारायण संप्रदाय का महत्वपूर्ण धार्मिक ग्रंथ है। इसमें भगवान स्वामीनारायण के प्रवचनों और आध्यात्मिक विचारों का संकलन है। इस विशाल प्रति को तैयार करने का उद्देश्य धार्मिक ग्रंथ के महत्व को खास रूप में सामने लाना था।

गोसेवा और समाज सेवा भी है खास पहचान

कुंडलधाम में धार्मिक गतिविधियों के साथ सेवा कार्यों को भी महत्व दिया जाता है। मंदिर से जुड़ी गोशाला में गायों, बैलों और बछड़ों की देखभाल की जाती है। इसके अलावा स्वास्थ्य जांच शिविर, रक्तदान, जरूरतमंद परिवारों की सहायता और शिक्षा से जुड़ी गतिविधियां भी संचालित की जाती हैं।

मंदिर से जुड़े सेवा कार्यों का आधार जरूरतमंद लोगों की मदद और समाज के प्रति जिम्मेदारी को माना जाता है। धार्मिक आयोजनों के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं, इसलिए मंदिर परिसर में उनके लिए भोजन और अन्य सुविधाओं की व्यवस्था भी की जाती है।

यहां होने वाले धार्मिक पर्व और आयोजन श्रद्धालुओं को एक साथ आने का अवसर देते हैं। दीपोत्सव, अन्नकूट, हिंडोला और अन्य पर्वों पर मंदिर में विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।

बच्चों और युवाओं को जोड़ने का प्रयास

किसी भी धार्मिक परंपरा को आगे बढ़ाने में नई पीढ़ी की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। कुंडलधाम में बच्चों और युवाओं के लिए आध्यात्मिक शिक्षा तथा सांस्कृतिक गतिविधियों पर ध्यान दिया जाता है। शिविरों और कार्यक्रमों में धार्मिक शिक्षाओं के साथ नाटक, खेल और रचनात्मक गतिविधियों को भी शामिल किया जाता है।

इसका उद्देश्य बच्चों को केवल धार्मिक जानकारी देना नहीं, बल्कि उन्हें अनुशासन, सेवा, नैतिक मूल्यों और अपनी संस्कृति के प्रति समझ विकसित करने का अवसर देना है। डिजिटल माध्यमों से धार्मिक प्रसंगों को प्रस्तुत करना भी इसी दिशा में एक प्रयास है।

कैसे पहुंचें कुंडलधाम?

कुंडलधाम गुजरात के बोटाद जिले के कुंडल गांव में स्थित है। यहां पहुंचने के लिए पहले बोटाद तक रेल या सड़क मार्ग से यात्रा की जा सकती है। इसके बाद स्थानीय सड़क मार्ग से कुंडल गांव पहुंचा जा सकता है।

दर्शन के लिए जाने से पहले मंदिर की आधिकारिक वेबसाइट पर पूजा के समय, विशेष आयोजनों और ठहरने की सुविधाओं के बारे में जानकारी लेना बेहतर रहेगा।

स्रोत: गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स

जमुना दयाल

जमुना दयाल वाराणसी के निवासी हैं और उन्हें हिंदी समाचार मीडिया में 10 से अधिक वर्षों का गहन रिपोर्टिंग अनुभव है। उन्होंने अमर उजाला और दैनिक जागरण जैसे देश के प्रतिष्ठित समाचार पत्रों में जिला रिपोर्टर के रूप में कार्य करते हुए खेल, शिक्षा, राजनीति, कृषि तथा सामाजिक मुद्दों को प्रमुखता से कवर किया है। शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो उन्होंने महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ से जनसंचार में परास्नातक (MJMC) की डिग्री प्राप्त की है और यूजीसी नेट (UGC NET) परीक्षा उत्तीर्ण की है।

Related Articles

Back to top button