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भारत की सबसे लंबी और अंतरराष्ट्रीय ट्रेनें: एक सफर, कई राज्य और बदलती सीमाएं

डिब्रूगढ़ से कन्याकुमारी तक 4 हजार किमी से ज्यादा का सफर, तो कहीं ट्रेन भारत की सीमा पार कर पहुंचती है दूसरे देश; जानिए लंबी दूरी की ट्रेनों की खासियत, सुविधाएं और अंतरराष्ट्रीय रेल संपर्क

भारत की सबसे लंबी और अंतरराष्ट्रीय ट्रेनें: एक सफर, कई राज्य और बदलती सीमाएं

डिब्रूगढ़ से कन्याकुमारी तक 4 हजार किमी से ज्यादा का सफर, तो कहीं ट्रेन भारत की सीमा पार कर पहुंचती है दूसरे देश; जानिए लंबी दूरी की ट्रेनों की खासियत, सुविधाएं और अंतरराष्ट्रीय रेल संपर्क

भारत का रेल नेटवर्क सिर्फ यात्रियों को एक शहर से दूसरे शहर तक पहुंचाने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह देश की भौगोलिक विविधता और पड़ोसी देशों से जुड़ाव की कहानी भी कहता है। कुछ ट्रेनें हजारों किलोमीटर की यात्रा पूरी करती हैं और कई राज्यों को एक धागे में पिरो देती हैं। वहीं भारत की अंतरराष्ट्रीय रेल कनेक्टिविटी बांग्लादेश और नेपाल तक पहुंचती है।

इनमें डिब्रूगढ़-कन्याकुमारी विवेक एक्सप्रेस सबसे खास है। भारतीय रेलवे के एक आधिकारिक प्रकाशन में विवेक एक्सप्रेस को भारत की सबसे लंबी दूरी तय करने वाली ट्रेन बताया गया है। पुराने समय-सारिणी के अनुसार इसका सफर करीब 4,286 किलोमीटर और 82 घंटे 30 मिनट का था, जबकि समय-सारिणी और परिचालन बदलावों के कारण दूरी व यात्रा समय अलग स्रोतों में अलग मिल सकते हैं।

पूर्वोत्तर से दक्षिण तक दौड़ती विवेक एक्सप्रेस

विवेक एक्सप्रेस का सफर भारतीय रेल की विशालता को समझने का शानदार उदाहरण है। डिब्रूगढ़ से कन्याकुमारी तक की यात्रा में ट्रेन पूर्वोत्तर भारत से निकलकर देश के कई हिस्सों को पार करती है और दक्षिणी छोर कन्याकुमारी तक पहुंचती है।

यानी एक ही रेल यात्रा में यात्री भारत के अलग-अलग भौगोलिक क्षेत्रों, भाषाओं, खानपान और संस्कृतियों की झलक देख सकते हैं।

4 हजार किलोमीटर से ज्यादा का रेल सफर

विवेक एक्सप्रेस की दूरी को लेकर अलग-अलग समय-सारिणी में अंतर देखने को मिलता है। इसलिए इसे भारत की सबसे लंबी दूरी वाली नियमित यात्री रेल सेवाओं में प्रमुख कहना अधिक सटीक है।

लंबी दूरी के कारण इस तरह की ट्रेनों में आरक्षित स्लीपर और एसी श्रेणियां यात्रियों के लिए महत्वपूर्ण होती हैं।

पूर्वोत्तर को केरल से जोड़ती अरोनाई सुपरफास्ट

सिलचर–तिरुवनंतपुरम अरोनाई सुपरफास्ट एक्सप्रेस भी देश की सबसे लंबी रेल यात्राओं में शामिल है। यह पूर्वोत्तर भारत को दक्षिण भारत के केरल से जोड़ती है।

करीब चार हजार किलोमीटर के आसपास का यह रेल सफर भारत की लंबाई को महसूस कराने वाला अनुभव है। यात्रा के दौरान ट्रेन कई राज्यों और प्रमुख रेल मार्गों से गुजरती है।

क्यों खास है यह ट्रेन?

इस ट्रेन की सबसे बड़ी विशेषता है कि यह देश के दो दूर-दराज क्षेत्रों—असम के बराक घाटी क्षेत्र और केरल—के बीच सीधा रेल संपर्क उपलब्ध कराती है।

कन्याकुमारी से कटरा तक हिमसागर एक्सप्रेस

अगर भारत के एक छोर से दूसरे छोर की यात्रा का उदाहरण देखना हो तो हिमसागर एक्सप्रेस बेहद खास है। यह कन्याकुमारी से श्री माता वैष्णो देवी कटरा तक जाती है।

दक्षिण भारत से शुरू होकर यह ट्रेन उत्तर भारत के महत्वपूर्ण तीर्थ क्षेत्र तक पहुंचती है। इस कारण इसका धार्मिक और पर्यटन महत्व भी काफी अधिक है।

एक ट्रेन, दो बड़े तीर्थ क्षेत्र

एक तरफ कन्याकुमारी देश के दक्षिणी छोर का प्रमुख पर्यटन स्थल है, तो दूसरी ओर कटरा वैष्णो देवी यात्रा का प्रमुख प्रवेश बिंदु है। इस लिहाज से हिमसागर एक्सप्रेस देश के अलग-अलग हिस्सों को जोड़ने वाली महत्वपूर्ण रेल सेवा है।

लंबी दूरी की अन्य प्रमुख ट्रेनें

भारत में लंबी दूरी तय करने वाली कई अन्य सेवाएं भी हैं। इनमें तिरुनेलवेली–कटरा एक्सप्रेस, फिरोजपुर कैंट–रामेश्वरम हमसफर एक्सप्रेस, न्यू तिनसुकिया–एसएमवीटी बेंगलुरु एक्सप्रेस और अगरतला–एसएमवीटी बेंगलुरु हमसफर एक्सप्रेस जैसी ट्रेनें शामिल हैं।

इन ट्रेनों की दूरी और यात्रा अवधि समय-सारिणी तथा परिचालन व्यवस्था के अनुसार बदल सकती है। इसलिए यात्रा की योजना बनाते समय भारतीय रेलवे की नवीनतम समय-सारिणी देखना जरूरी है।

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लंबी दूरी की ट्रेनों में क्या-क्या सुविधाएं मिलती हैं?

लंबी यात्रा को ध्यान में रखते हुए ट्रेनों में अलग-अलग श्रेणी के कोच और यात्री सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। हालांकि सभी सुविधाएं हर ट्रेन में एक जैसी नहीं होतीं।

प्रमुख सुविधाएं

एसी और स्लीपर कोच
आरक्षित सीट और बर्थ
सोने के लिए बर्थ
शौचालय
सामान रखने की जगह
ट्रेन में भोजन एवं नाश्ते की सुविधा
ट्रेन-साइड वेंडिंग
कुछ ट्रेनों में पेंट्री कार
कुछ सेवाओं में ई-कैटरिंग

भारतीय रेलवे की RailMadad सेवा के माध्यम से यात्री शिकायत और सहायता संबंधी सेवाएं भी प्राप्त कर सकते हैं। रेलवे के आधिकारिक पोर्टल पर टिकट, ट्रेन पूछताछ, आरक्षण और अन्य सेवाओं की जानकारी उपलब्ध है।

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भारत की सीमाएं पार करती हैं ये ट्रेनें

भारत की रेल यात्रा सिर्फ देश की सीमा तक सीमित नहीं है। भारत की अंतरराष्ट्रीय यात्री रेल कनेक्टिविटी का सबसे प्रमुख उदाहरण बांग्लादेश है। वहीं नेपाल के साथ सीमा-पार रेल संपर्क का लगातार विस्तार किया जा रहा है।

भारत-बांग्लादेश के बीच मैत्री एक्सप्रेस, बंधन एक्सप्रेस और मिताली एक्सप्रेस जैसी सेवाएं शुरू की गई थीं। विदेश मंत्रालय के दस्तावेज के अनुसार मैत्री एक्सप्रेस कोलकाता-ढाका, बंधन एक्सप्रेस कोलकाता-खुलना और मिताली एक्सप्रेस न्यू जलपाईगुड़ी-ढाका को जोड़ती है।

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मैत्री एक्सप्रेस: कोलकाता से ढाका

मैत्री एक्सप्रेस भारत-बांग्लादेश रेल संपर्क का सबसे चर्चित नाम है। यह कोलकाता को ढाका से जोड़ती है और इसकी शुरुआत 2008 में हुई थी। पूर्वी रेलवे के दस्तावेज में इसकी दूरी करीब 375 किलोमीटर दर्ज है।

यह ट्रेन दोनों देशों के बीच लोगों की आवाजाही, पर्यटन और पारिवारिक संपर्क को आसान बनाने के उद्देश्य से महत्वपूर्ण रही है।

अभी क्या है स्थिति?

बांग्लादेश के साथ राजनीतिक और सुरक्षा परिस्थितियों के कारण इन यात्री सेवाओं का संचालन प्रभावित हुआ है। पूर्वी रेलवे के हालिया दस्तावेज में मैत्री और बंधन एक्सप्रेस के जुलाई 2024 से रद्द होने का उल्लेख है।

इसलिए इन ट्रेनों को वर्तमान में नियमित रूप से चल रही सेवाओं के रूप में प्रस्तुत करने के बजाय निलंबित/रद्द अंतरराष्ट्रीय यात्री सेवाएं कहना अधिक सही है।

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बंधन एक्सप्रेस: कोलकाता से खुलना

बंधन एक्सप्रेस पश्चिम बंगाल के कोलकाता को बांग्लादेश के खुलना से जोड़ने वाली अंतरराष्ट्रीय ट्रेन सेवा रही है। इसका मार्ग पेट्रापोल-बेनापोल सीमा से होकर गुजरता है।

पूर्वी रेलवे के दस्तावेज के अनुसार इसकी दूरी करीब 172 किलोमीटर है और इसकी शुरुआत 2017 में हुई थी।

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मिताली एक्सप्रेस: न्यू जलपाईगुड़ी से ढाका

मिताली एक्सप्रेस भारत-बांग्लादेश रेल संपर्क की तीसरी प्रमुख यात्री सेवा है। यह न्यू जलपाईगुड़ी को ढाका से जोड़ती है और 2022 में शुरू की गई थी। विदेश मंत्रालय ने भी इसे दोनों देशों के बीच पर्यटन और लोगों के संपर्क को बढ़ाने वाली रेल सेवा के रूप में दर्ज किया है।

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नेपाल से भी बढ़ रहा है रेल संपर्क

भारत और नेपाल के बीच रेल संपर्क का विस्तार पिछले कुछ वर्षों में तेजी से हुआ है। जयनगर-बिजलपुरा-बरदिबास और जोगबनी-बिराटनगर जैसी परियोजनाएं सीमा-पार रेल कनेक्टिविटी को मजबूत कर रही हैं।

भारतीय रेलवे के नेशनल रेल प्लान में जयनगर-बिजलपुरा-बरदिबास तथा जोगबनी-बिराटनगर रेल संपर्क का उल्लेख किया गया है।

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जयनगर से जनकपुर-कुर्था तक रेल सेवा

बिहार का जयनगर नेपाल के कुर्था से रेल संपर्क में है। भारतीय रेलवे की वार्षिक रिपोर्ट में जयनगर से कुर्था तक 34.90 किलोमीटर के क्रॉस-बॉर्डर रेल सेक्शन के उद्घाटन का उल्लेख है।

यह रेल सेवा दोनों देशों के सीमावर्ती क्षेत्रों के लोगों के लिए विशेष महत्व रखती है।

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अयोध्या-जनकपुर रेल सेवा की तैयारी

भारत-नेपाल रेल संबंधों में आने वाले समय की सबसे दिलचस्प योजनाओं में जनकपुर-अयोध्या यात्री ट्रेन सेवा शामिल है।

जून 2026 में भारत और नेपाल के अधिकारियों के बीच सीमा-पार रेल परियोजनाओं की समीक्षा के दौरान जनकपुर-अयोध्या यात्री सेवा शुरू करने के लिए Standard Operating Procedures (SOPs) पर चर्चा हुई।

अगर यह सेवा शुरू होती है तो इसका धार्मिक पर्यटन पर बड़ा असर पड़ सकता है। जनकपुर को माता सीता से जुड़ा प्रमुख धार्मिक स्थल और अयोध्या को भगवान राम से जुड़ा प्रमुख तीर्थ माना जाता है। ऐसे में दोनों स्थानों के बीच रेल संपर्क श्रद्धालुओं के लिए महत्वपूर्ण सुविधा बन सकता है।

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जोगबनी-बिराटनगर: यात्री ही नहीं, मालगाड़ी भी

भारत-नेपाल रेल संपर्क का एक और महत्वपूर्ण उदाहरण जोगबनी-बिराटनगर है। यह करीब 18.60 किलोमीटर लंबा ब्रॉडगेज रेल संपर्क है और जून 2023 में इसका उद्घाटन हुआ था।

जुलाई 2026 में इसी रेल संपर्क के जरिए कोलकाता बंदरगाह से नेपाल के बिराटनगर तक सीधी कंटेनर मालगाड़ी भेजी गई। इससे भारत और नेपाल के बीच व्यापारिक माल ढुलाई में सीमा पर माल उतारने-चढ़ाने की जरूरत कम हुई और लॉजिस्टिक्स को बेहतर बनाने में मदद मिली।

यात्री रेल से आगे बढ़ता संपर्क

इससे साफ है कि भारत की सीमा-पार रेल कनेक्टिविटी केवल यात्रियों तक सीमित नहीं है। आने वाले समय में इसका इस्तेमाल व्यापार, पर्यटन और क्षेत्रीय आर्थिक सहयोग को बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण हो सकता है।

पाकिस्तान के साथ रेल संपर्क क्यों बंद है?

भारत और पाकिस्तान के बीच पहले समझौता एक्सप्रेस और थार एक्सप्रेस जैसी यात्री सेवाएं चलती थीं। लेकिन वर्तमान में दोनों देशों के बीच नियमित यात्री रेल सेवा संचालित नहीं है।

इसलिए भारत की मौजूदा अंतरराष्ट्रीय रेल कनेक्टिविटी की चर्चा करते समय बांग्लादेश और नेपाल सबसे महत्वपूर्ण पड़ोसी देश हैं।

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एक नजर में भारत की सीमा-पार रेल कनेक्टिविटी

देशप्रमुख रेल संपर्कस्थिति
बांग्लादेशमैत्री एक्सप्रेसनिलंबित/सेवा प्रभावित
बांग्लादेशबंधन एक्सप्रेसनिलंबित
बांग्लादेशमिताली एक्सप्रेसनिलंबित
नेपालजयनगर-कुर्थासीमा-पार यात्री रेल संपर्क
नेपालजोगबनी-बिराटनगररेल संपर्क, यात्री/माल ढुलाई क्षमता
नेपालजनकपुर-अयोध्यायात्री सेवा की तैयारी
नेपालरक्सौल-काठमांडूप्रस्तावित/अध्ययनाधीन संपर्क
पाकिस्तानसमझौता एक्सप्रेसनिलंबित
पाकिस्तानथार एक्सप्रेसनिलंबित
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निष्कर्ष: रेल की पटरियों पर दिखता है भारत का विस्तार

भारत की सबसे लंबी दूरी की ट्रेनें देश की भौगोलिक विविधता को जोड़ती हैं, जबकि सीमा-पार रेल परियोजनाएं भारत को पड़ोसी देशों के साथ जोड़ने का काम कर रही हैं। एक तरफ डिब्रूगढ़ से कन्याकुमारी तक हजारों किलोमीटर की यात्रा भारतीय रेल की विशालता दिखाती है, तो दूसरी तरफ जयनगर-कुर्था और जोगबनी-बिराटनगर जैसे संपर्क बताते हैं कि रेल अब सीमा-पार व्यापार और क्षेत्रीय सहयोग का माध्यम भी बन रही है।

आने वाले समय में अयोध्या-जनकपुर जैसे प्रस्तावित संपर्क शुरू होते हैं तो भारत की रेल यात्रा का दायरा केवल परिवहन से आगे बढ़कर धार्मिक पर्यटन, संस्कृति और अंतरराष्ट्रीय संपर्क की नई कहानी लिख सकता है।

जमुना दयाल

जमुना दयाल वाराणसी के निवासी हैं और उन्हें हिंदी समाचार मीडिया में 10 से अधिक वर्षों का गहन रिपोर्टिंग अनुभव है। उन्होंने अमर उजाला और दैनिक जागरण जैसे देश के प्रतिष्ठित समाचार पत्रों में जिला रिपोर्टर के रूप में कार्य करते हुए खेल, शिक्षा, राजनीति, कृषि तथा सामाजिक मुद्दों को प्रमुखता से कवर किया है। शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो उन्होंने महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ से जनसंचार में परास्नातक (MJMC) की डिग्री प्राप्त की है और यूजीसी नेट (UGC NET) परीक्षा उत्तीर्ण की है।

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