भारत के हर कोने सेभारत दर्शन - Local यात्रा

अंडमान की 10 रहस्यमयी जगहें: कहीं धरती उगलती है कीचड़ तो कहीं जंगल में खड़े हैं वीरान महल, एक द्वीप आज भी दुनिया से दूर

समुद्र के बीच धधक रहा भारत का इकलौता सक्रिय ज्वालामुखी

Andaman Mysterious Places: अंडमान का नाम आते ही नीला समुद्र, सफेद रेत और नारियल के पेड़ आंखों के सामने आ जाते हैं। लेकिन समुद्र के बीच फैले इन द्वीपों की एक दूसरी दुनिया भी है। कहीं धरती के भीतर से कीचड़ उबलता है, कहीं सक्रिय ज्वालामुखी आज भी मौजूद है, कहीं अंग्रेजों के पुराने शहर के खंडहर जंगल में खड़े हैं तो कहीं ऐसा द्वीप है, जहां रहने वाले लोग बाहरी दुनिया से लगभग पूरी तरह अलग हैं। अंडमान की ये जगहें अपने रहस्य, इतिहास और प्राकृतिक घटनाओं के कारण सामान्य पर्यटन स्थलों से बिल्कुल अलग हैं।

समुद्र के बीच छिपी है रहस्यों की दुनिया

अंडमान-निकोबार द्वीपसमूह बंगाल की खाड़ी में फैला द्वीपों का समूह है। यहां के ज्यादातर पर्यटन स्थलों की पहचान समुद्र और प्राकृतिक सुंदरता से होती है, लेकिन कुछ जगहें अपने भीतर ऐसी कहानियां समेटे हैं, जो लोगों की जिज्ञासा बढ़ाती हैं।

इनमें कुछ रहस्य प्रकृति ने बनाए हैं और कुछ इतिहास ने। कहीं ज्वालामुखी धरती के भीतर की हलचल का संकेत देता है तो कहीं पुराने खंडहर उस दौर की याद दिलाते हैं, जब अंडमान ब्रिटिश शासन के लिए दंड और प्रशासन का महत्वपूर्ण केंद्र था।

आइए जानते हैं अंडमान की ऐसी ही 10 जगहों के बारे में।

1. बैरन आइलैंड—समुद्र के बीच धधकता भारत का सक्रिय ज्वालामुखी

अंडमान की रहस्यमयी जगहों की बात हो तो बैरन आइलैंड सबसे पहले आता है। यह भारत का एकमात्र सक्रिय ज्वालामुखी है।

समुद्र के बीच स्थित इस द्वीप का अधिकांश हिस्सा ज्वालामुखीय गतिविधियों से बना है। यहां समय-समय पर विस्फोट और राख निकलने की घटनाएं दर्ज की गई हैं।

दूर से देखने पर यह द्वीप बेहद अलग दिखाई देता है। नीले समुद्र के बीच काली ज्वालामुखीय चट्टानें और ऊंचा शंकु इसे किसी दूसरी दुनिया जैसा रूप देते हैं।

लेकिन यह सामान्य पर्यटन स्थल नहीं है। द्वीप पर उतरने के लिए अनुमति संबंधी नियम लागू होते हैं। पर्यटक सामान्यतः नाव से इसे दूर से देखते हैं।

रहस्य क्या है?
धरती के नीचे मौजूद ज्वालामुखीय गतिविधियां कब फिर सक्रिय होंगी, यह प्राकृतिक प्रक्रिया वैज्ञानिक निगरानी का विषय है।

2. रॉस आइलैंड—जहां जंगल ने निगल लिया पूरा शहर

रॉस आइलैंड

आज रॉस आइलैंड को नेताजी सुभाष चंद्र बोस द्वीप के नाम से जाना जाता है।

कभी यह ब्रिटिश प्रशासन का महत्वपूर्ण केंद्र था। यहां अधिकारियों के आवास, चर्च, अस्पताल और दूसरी इमारतें थीं। लेकिन समय बीतने के साथ यह जगह वीरान होती गई।

आज पुराने भवनों के खंडहरों पर पेड़-पौधे उग आए हैं। दीवारों के बीच से निकली जड़ें और जंगल से घिरी पुरानी इमारतें ऐसा दृश्य बनाती हैं, मानो प्रकृति ने धीरे-धीरे पूरे शहर को अपने कब्जे में ले लिया हो।

यही रॉस आइलैंड की सबसे खास तस्वीर है—एक समय का व्यस्त औपनिवेशिक केंद्र और आज खामोश खंडहर।

3. बाराटांग की गुफाएं—चट्टानों के भीतर बनी प्राकृतिक भूलभुलैया

बाराटांग द्वीप अपनी लाइमस्टोन यानी चूना-पत्थर की गुफाओं के लिए प्रसिद्ध है।

लाखों वर्षों में पानी और भूगर्भीय प्रक्रियाओं ने चट्टानों को धीरे-धीरे काटकर ऐसी संरचनाएं बनाई हैं। गुफाओं के भीतर चट्टानों के आकार और बनावट लगातार बदलती दिखाई देती है।

गुफा तक पहुंचने की यात्रा भी कम रोमांचक नहीं है। मैंग्रोव से घिरे जलमार्ग और जंगलों से गुजरने के बाद अचानक चट्टानों के बीच यह प्राकृतिक दुनिया सामने आती है।

यह कोई रहस्यमयी शक्ति का परिणाम नहीं, बल्कि धरती की लंबी भूगर्भीय प्रक्रिया का जीवंत उदाहरण है।

4. बाराटांग के मड वॉल्केनो—यहां आग नहीं, निकलता है कीचड़

ज्वालामुखी का नाम सुनते ही आग और लावा की तस्वीर बनती है। लेकिन बाराटांग में प्रकृति का नजारा अलग है।

यहां मड वॉल्केनो यानी कीचड़ का ज्वालामुखी देखने को मिलता है। भूगर्भीय गैस और दबाव के कारण मिट्टी और कीचड़ ऊपर की तरफ आता है और छोटे-छोटे ज्वालामुखी जैसी संरचनाएं बनाता है।

यहां लावा नहीं निकलता। इसी वजह से इसे सामान्य ज्वालामुखी से अलग समझना चाहिए।

धरती के भीतर गैसों की हलचल से ऊपर आती मिट्टी इस जगह को अंडमान के सबसे अनोखे प्राकृतिक स्थलों में शामिल करती है।

5. नॉर्थ सेंटिनल आइलैंड—जिसे दुनिया आज भी पूरी तरह नहीं जानती

अंडमान का सबसे चर्चित रहस्य नॉर्थ सेंटिनल आइलैंड है।

यहां सेंटिनलीज समुदाय रहता है, जिसने बाहरी दुनिया से लंबे समय से दूरी बनाए रखी है। इस समुदाय के बारे में जानकारी सीमित है और उनके जीवन में बाहरी हस्तक्षेप से बचाने के लिए भारतीय कानून के तहत द्वीप संरक्षित क्षेत्र है।

इसलिए यह कोई सामान्य पर्यटन स्थल नहीं है और यहां जाने या संपर्क करने की कोशिश करना प्रतिबंधित है।

इस द्वीप का रहस्य इसी बात में है कि आधुनिक दुनिया के इतने करीब होने के बावजूद यहां रहने वाले समुदाय का जीवन बाहरी लोगों के लिए काफी हद तक अनजान है।

6. वाइपर आइलैंड—खंडहरों में छिपी काले पानी की कहानी

अंडमान का इतिहास सिर्फ सेलुलर जेल तक सीमित नहीं है। वाइपर आइलैंड भी ब्रिटिश दौर की दंड व्यवस्था से जुड़ा रहा है।

यहां जेल और प्रशासन से जुड़े अवशेष रहे हैं। बाद में सेलुलर जेल के निर्माण और उसके विस्तार के साथ इसका महत्व कम होता गया।

आज यहां बचे अवशेष अंडमान के उस इतिहास की याद दिलाते हैं, जब दूर समुद्र में स्थित इन द्वीपों को ब्रिटिश शासन ने कैदियों को रखने और दंड देने के लिए इस्तेमाल किया था।

यहां का रहस्य किसी भूतिया कहानी में नहीं, बल्कि उन खामोश दीवारों में छिपे इतिहास में है।

7. सेलुलर जेल—हर कोठरी के पीछे छिपी स्वतंत्रता की कहानी

सेलुलर जेल

पोर्ट ब्लेयर की सेलुलर जेल को आज राष्ट्रीय स्मारक का दर्जा प्राप्त है।

ब्रिटिश शासन के दौरान यहां भारतीय स्वतंत्रता सेनानियों समेत कई राजनीतिक कैदियों को रखा गया। जेल की बनावट ऐसी थी कि कैदियों को एक-दूसरे से अलग रखा जा सके।

इसका केंद्रीय टावर और उससे निकलती शाखाएं जेल की निगरानी व्यवस्था को समझने में मदद करती हैं। आज इसकी बची हुई संरचनाएं उस दौर की कठोर जेल व्यवस्था की गवाही देती हैं।

रात में होने वाला लाइट एंड साउंड शो इस इतिहास को लोगों तक पहुंचाने का एक माध्यम है, लेकिन असली प्रभाव जेल की उन पुरानी कोठरियों को देखकर होता है, जहां कभी कैदी बंद रहते थे।

8. माउंट मणिपुर—घने जंगलों के बीच समुद्र का अलग संसार

पहले माउंट हैरियट के नाम से जाना जाने वाला माउंट मणिपुर अंडमान के प्राकृतिक क्षेत्रों में महत्वपूर्ण स्थान रखता है।

घने उष्णकटिबंधीय जंगल, पहाड़ी रास्ते और ऊंचाई से दिखाई देने वाला समुद्र इस जगह को अलग रूप देते हैं।

यहां रहस्य किसी प्राचीन कहानी में नहीं बल्कि जंगल की जैव विविधता और द्वीप की भौगोलिक बनावट में है।

ऊंचाई पर खड़े होकर समुद्र और आसपास के द्वीपों को देखना यह एहसास कराता है कि अंडमान सिर्फ समुद्र तटों का समूह नहीं है।

9. नारकोंडम—समुद्र में उठा ज्वालामुखीय द्वीप

अंडमान क्षेत्र में नारकोंडम द्वीप भी अपनी भौगोलिक विशेषताओं के कारण खास है।

यह ज्वालामुखीय उत्पत्ति वाला द्वीप है और सामान्य पर्यटन स्थलों की सूची से अलग है। यहां की भौगोलिक स्थिति और विशिष्ट वन्यजीव इसे वैज्ञानिक और प्रकृति अध्ययन के लिहाज से महत्वपूर्ण बनाते हैं।

नारकोंडम की खासियत यही है कि यह उन द्वीपों में है, जहां प्रकृति ने अलग परिस्थितियों में अपना विशिष्ट संसार विकसित किया है।

10. बाराटांग के मैंग्रोव—पानी में बनी प्राकृतिक भूलभुलैया

बाराटांग की पहचान सिर्फ गुफाओं और मड वॉल्केनो से नहीं है। यहां के मैंग्रोव जलमार्ग भी अपने आप में एक अलग अनुभव देते हैं।

नाव संकरे जलमार्ग से आगे बढ़ती है और दोनों ओर मैंग्रोव की जड़ें पानी के भीतर और ऊपर फैली दिखाई देती हैं।

ऊपर घना जंगल और नीचे शांत पानी। कई जगह रास्ता इतना संकरा लगता है कि ऐसा महसूस होता है जैसे नाव किसी प्राकृतिक सुरंग में प्रवेश कर गई हो।

दरअसल मैंग्रोव अंडमान के तटीय पारिस्थितिकी तंत्र के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। ये समुद्री जीवन के लिए आवास उपलब्ध कराने के साथ तटों को प्राकृतिक सुरक्षा भी देते हैं।

रहस्य सिर्फ डरावनी कहानियों में नहीं

अंडमान की इन जगहों को रहस्यमयी कहने का मतलब यह नहीं कि हर जगह भूत-प्रेत या किसी अलौकिक घटना से जुड़ी है।

असल में यहां के रहस्य तीन अलग-अलग दुनिया से आते हैं।

प्रकृति का रहस्य—बैरन आइलैंड और मड वॉल्केनो।

इतिहास का रहस्य—रॉस आइलैंड, वाइपर आइलैंड और सेलुलर जेल।

मानव सभ्यता का रहस्य—नॉर्थ सेंटिनल आइलैंड और वहां रहने वाला संरक्षित समुदाय।

यही तीनों मिलकर अंडमान को भारत के सबसे अलग द्वीप क्षेत्रों में शामिल करते हैं।

समुद्र के नीचे भी छिपी है अंडमान की कहानी

अंडमान की रहस्यमयता जमीन तक सीमित नहीं है। इसके आसपास का समुद्री क्षेत्र भी जैव विविधता से भरपूर है। प्रवाल भित्तियां, मैंग्रोव और समुद्री जीव इस क्षेत्र को वैज्ञानिक दृष्टि से महत्वपूर्ण बनाते हैं।

यानी यहां जितना हिस्सा आंखों के सामने दिखाई देता है, उससे कहीं ज्यादा कहानी समुद्र और धरती के भीतर छिपी है।

एक तरफ ज्वालामुखी, दूसरी तरफ वीरान महल

अंडमान की सबसे बड़ी खूबसूरती शायद यही विरोधाभास है।

एक तरफ समुद्र के बीच आज भी सक्रिय ज्वालामुखी है। दूसरी तरफ कभी अंग्रेजों के वैभव का प्रतीक रहा रॉस आइलैंड अब खंडहरों में बदल चुका है।

एक ओर बाराटांग में धरती से कीचड़ बाहर आता है तो दूसरी ओर सेलुलर जेल स्वतंत्रता आंदोलन की कठोर स्मृतियां समेटे खड़ी है।

और इन सबके बीच नॉर्थ सेंटिनल जैसा द्वीप है, जहां बाहरी दुनिया के लिए प्रवेश लगभग बंद है।

अंडमान का असली रहस्य

अंडमान को समझने के लिए सिर्फ समुद्र किनारे खड़ा होना पर्याप्त नहीं। इसके द्वीपों की परतें खोलने पर पता चलता है कि यहां ज्वालामुखी भी है, आदिम प्रकृति भी, औपनिवेशिक इतिहास भी और ऐसी मानव सभ्यता भी, जो आधुनिक दुनिया से अपनी दूरी बनाए हुए है।

शायद इसी वजह से अंडमान का रहस्य किसी एक जगह में नहीं, बल्कि उसके पूरे भूगोल में बिखरा हुआ है—समुद्र के ऊपर भी और उसके नीचे भी।

जमुना दयाल

जमुना दयाल वाराणसी के निवासी हैं और उन्हें हिंदी समाचार मीडिया में 10 से अधिक वर्षों का गहन रिपोर्टिंग अनुभव है। उन्होंने अमर उजाला और दैनिक जागरण जैसे देश के प्रतिष्ठित समाचार पत्रों में जिला रिपोर्टर के रूप में कार्य करते हुए खेल, शिक्षा, राजनीति, कृषि तथा सामाजिक मुद्दों को प्रमुखता से कवर किया है। शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो उन्होंने महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ से जनसंचार में परास्नातक (MJMC) की डिग्री प्राप्त की है और यूजीसी नेट (UGC NET) परीक्षा उत्तीर्ण की है।

Related Articles

Back to top button